बीपीओ व उसके कार्य

बीपीओ व उसके कार्य

   Kautilya Academy    08-01-2019

बीपीओ व उसके कार्य

बीपीओ का अर्थ होता है बिजनेस प्रोसेस आइटसोर्सिंग। इसका अर्थ है कि जब एक कंपनी अपने सारे काम खुद नहीं कर पाती है तब वो दूसरे कंपनीज की मदद लेती है जिन्‍हें उस काम में महारत हासिल हो, ऐसा करने से उन्‍हें अपने काम में बड़ा लाभ होता है। उन्‍हें अपने काम समय में मिल जाते हैं और उनकी कॉस्‍ट भी सामान्‍य होती है। हम इन Processes की बात करें तब इसमें मुख्‍य रूप से कस्‍टमर सर्विस, टेक्निकल सपोर्ट, बिलींग, एडमिनिस्‍ट्रेशन आदि मुख्‍य होते हैं।

    अक्‍सर BPO एक्जिक्‍यूटिव्‍स को टास्‍क को मॉनिटर करने का कार्य दिया जाता है, और वो प्राय: तौर से बैक ऑफिस में ही कार्य करते हैं इनके कई काम होते हैं जैसे कस्‍टमर को मदद करना, Clients को बिलिंग और पर्चेसिंग में मदद करना शामिल है। BPO Operation में मुख्‍य रूप से एक कंपनी अपने कॉन्‍ट्रेक्‍ट को किसी थर्ड पार्टी वेन्‍डर को प्रदान करती है उनके बैक ऑफिस टास्‍क को करने के लिये अक्‍सर पाया गया है कि बड़े आर्गनाइजेशन इस प्रक्रिया को मनी सेविंग टेकनिक मानते हैं। क्‍यूंकि ऐसा करनेसे वो अपने कोर टास्‍क पर ज्‍यादा ध्‍यान दे सकते हैं इससे वो बैक ऑफिस के काम को आउटसोर्स करतेहैं और खुद फ्रंट ऑफिस के प्रोसेस को संभालते हैं।

    एक बीपीओ के सामने बहुत सारे टॉस्‍क होते हैं करने के लिए जो सबसे महत्‍वपूर्ण कार्य होता है कि वो अपने कस्‍टमर के सेटिसफेक्‍शनपर ज्‍यादा ध्‍यान देना।  

 

।। बीपीओ की कहानी ।।

बीपीओ कंपनी का कंसेप्‍ट सबसे पहली बार Ross Perot ने शुरू किया था जब उन्‍होंने सन् 1962 में Electronic Data Systems (EDS) की स्‍थापना की। EDS अपने क्‍लांइट से ये बात कहती थी ‘’आप भले ही Product की डीजाइनिंग, मेन्‍युफेक्‍चरिंग ओर सेलिंग से परिचित हों लेकिन हम इन्‍फारमेशन टेक्‍नोलॉजी बेच सकते हैं जिसकी आपको जरूरत है लेकिन बदले में आपको हमें इस सर्विस के लिये प्रतिमाह कुछ फीस प्रदान करना होगी लेकिन गौर करने वाली बात ये है की ये सर्विस कम से कम 2 से 10 साल का होना चाहिए।‘’

 

।। बीपीओ के फायदे ।।

(1)    बिजनेस प्रोसेस की स्‍पीड और इफिशियंसी कॉफी हद तक बढ़ जाती है।

(2)    Employees के समय की बचत होती है जिससे वो ज्‍यादा समय कोर बिजनेस स्‍ट्रेटेजीस को बढ़ाने में लगा सकते हैं जो कि बाद में उन्‍हें Competitive Advantage प्रदान करता है।

(3)    Organisational growth में तरक्‍की होती है क्‍यूंकि जब Capital Resources ओर Asset Expenditures की जरूरत नहीं होती है।

(4)    Organisations को उनके Unrelated Primary business strategy assets में समय देने की जरूरत नहीं पड़ती है जिससे वो अपना सारा Focus Core Strategies को Develop करने में लगा सकते हैं।

(5)    Low Operating Cost  का होना।

(6)    Improved Automation का होना।

(7)    Scaling में ज्‍यादा Eligibility  होना।   

(8)    इससे वो Experts और Technologies को आसानी से Access कर सकते हैं।

(9)    Consumer और Products के विषय में Smarter Analytics बनाया जा सकता है।

 

।। बीपीओ की Disadvantages ।।

(1)    Data Privacy की breach होने की संभावना ज्‍यादा होती है।

(2)    यहाँ पर रनिंग कॉस्‍ट को Underestimate कर दिया जाता है।

(3)    Service Provider के उपर ज्‍यादा निर्भर रहना पड़ता है।


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