क्या आत्महत्या ही आखरी रास्ता है?

क्या आत्महत्या ही आखरी रास्ता है?

   Kautilya Academy    10-09-2020

 

"थकता कौन नहीं जीवन में, हर किसी ने यहां विराम लिया।

 गलती इस में तेरी ही रही, क्यूं तूने पूर्ण विराम लिया।।"

 

हम सभी के जीवन में किसी ना किसी मोड़ पर निराशा दस्तक देती है। जो कमजोर होता है वह आसानी से आत्महत्या को चुन लेता है, परंतु जो साहसी होता है वह आत्मसम्मान को चुनता है। इस लेख में मैं विद्यार्थियों के मन में यह बात डालना चाहती हूं की आत्महत्या किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। समस्याओं के आगे भी जीवन है, और संभवतः एक ऐसा जीवन जिसमें सफलता आपकी राह देख रही है।

आत्महत्या समाधान नहीं है !!

आत्महत्या, एक ऐसा शब्द है जो सुनने में आसान, लेकिन सामना करने में बहुत मुश्किल है। यह सिर्फ एक सेकंड में किसी का जीवन छीन लेती है और अगले ही पल सब कुछ समाप्त हो जाता है।

कोई आत्महत्या क्यों करता है?

अपने घर और परिवार से दूर दिल्ली में रहने वाले एक IAS अभ्यर्थी को जीवन में कई उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है। वह एक सफल आईएएस अधिकारी बनने का सपना देख रहा होता है। दुर्भाग्यवश, 15 घंटे के अध्ययन के कठिन परिश्रम, समर्पण पूर्ण दैनिक दिनचर्या के बावजूद, कड़ी प्रतिस्पर्धा के उच्च स्तर के कारण वह अपने पहले प्रयास में असफल रहता है और आत्महत्या कर लेता है। क्या यह विफलता उसकी कमज़ोरी है या परिस्थितियों का सामना न कर पाने की उसकी असफलता?

हर साल लाखों छात्र प्रतियोगी परीक्षा के लिए आवेदन करते हैं और पद सैकड़ों या हजारों में होते हैं। सभी को एक पल में सफल नहीं किया जा सकता है और यह वर्तमान परिदृश्य की वास्तविकता है जिसमें मांग उपलब्ध संसाधनों से बहुत अधिक है। "10 वीं कक्षा की परीक्षा में फेल एक स्कूली छात्र ने की आत्महत्या" हर वर्ष परीक्षा परिणाम घोषित होने के पश्चात इस प्रकार की न्यूज़ अखबार में आम होती है। क्या इतनी छोटी उम्र में कोई बालक या बालिका असफल होने की शर्म से छुटकारा पाने के लिए, आत्महत्या को एक बेहतर तरीका मानता है। वह ऐसा क्यों करता है? क्या वह इस छोटी सी उम्र में जीवन में असफलता और बाधाओं के वास्तविक अर्थ को अच्छी तरह से जानता है, मुझे नहीं लगता। फिर भी उसने अपने माता-पिता और प्रियजनों की आकांक्षाओं, सपनों और उम्मीदों को पीछे छोड़ते हुए सब कुछ समाप्त कर दिया।

कभी-कभी आत्महत्या को असहनीय पीड़ा से बचने के लिए एक प्रयास माना जाता है। लेकिन कष्ट और दु:ख अस्थायी हैं स्थायी नहीं। जब अकेले और निराशाजनक होने की भावना पैदा होती है, तो हम स्थायी रूप से खुद को बर्बाद कर लेते हैं। लेकिन यह कभी नैतिक तरीका नहीं हो सकता। सिर्फ इसलिए कि आप निराश महसूस कर रहे हैं इसका मतलब यह नहीं है कि जीवन और आपकी स्थिति वास्तव में निराशाजनक है।

आत्महत्या आपके पूरे परिवार के साथ-साथ आपके प्रियजनों को भी प्रभावित करेगी। जो लोग आपके करीब हैं, वे आपकी मौत से बहुत डर जाएंगे। आपकी मृत्यु का दुःख उस व्यक्ति के दिल में एक स्थायी छेद बना देगा जो कभी भी सफलतापूर्वक ठीक नहीं होगा। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, 15 से 29 आयु वर्ग के लोगों में हर साल 8,00,000 से अधिक लोग आत्महत्या करते हैं। पिछले कुछ दशकों में, संख्या खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। स्थिति को रोकने के लिए सरकार, शैक्षणिक संस्थानों, स्वास्थ्य नीति निर्माताओं, कोचिंग संस्थानों, सोशल मीडिया, गैर सरकारी संगठनों, मनोचिकित्सकों, माता-पिता, मित्रों और समाज को शामिल करते हुए बहुआयामी दृष्टिकोण होना चाहिए।

हम यह संख्या सिर्फ यह दिखाने के लिए प्रस्तुत कर रहे हैं कि आप अकेले निराशा किस स्थिति का सामना नहीं कर रहे हैं। आपके साथ और इस तरह से बहुत सारे लोग हैं। इस चरण का सामना करने का सबसे अच्छा तरीका सकारात्मक मानसिकता वाले लोगों के साथ जुड़ना और आत्मा को प्रोत्साहित करना है। असफलता हमारे लिए एक बेहतर संस्करण बनाती है, निराश होने के बजाय उनसे सीखें।

प्रतियोगी परीक्षा के अभिलाषी उदास क्यों हो जाते हैं?

वे आम तौर पर अलग-थलग रहते हैं, अपने परिवारों और मित्रों से दूर रहते हैं, होमसिकनेस रखते हैं। वे दूर के शहरों में रहने वाले हजारों नए लोगों से मिलते हैं और एक प्रतिस्पर्धी दुनिया का हिस्सा बन जाते हैं। अपनी व्यस्त दिनचर्या के कारण उन्हें अपनी भावनाओं को दूसरों के साथ साझा करने के लिए शायद ही कोई समय मिलता है। प्रतिस्पर्धा के बढ़ते स्तर ने उन्हें उनकी क्षमताओं के प्रति निराश और विहीन कर दिया है।

माता-पिता और रिश्तेदारों को सुझाव

     अपने बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार रखें ताकि वे हर समस्या के साथ-साथ आपके साथ खुशियाँ साझा कर सकें।

     उनके साथ जुड़े रहें, अन्यथा वे अकेले और उदास महसूस कर सकते हैं।

     बेहतर परिणाम के लिए उन पर कभी भी दबाव न डालें, यह भीतर एक नकारात्मक मानसिकता पैदा करेगा।

     उम्मीद अच्छी है लेकिन अपने बच्चों पर ज़बरदस्ती उन्हें थोपने की कोशिश न करें। यह घृणा की भावना विकसित कर सकता है।

     हमेशा उन्हें प्रेरित करने की कोशिश करें और हर परिस्थिति में उनके साथ रहने की भावना विकसित करें।

     अपने बच्चे को जीवन में सभी सफलताओं और असफलताओं के लिए तैयार करें और जीवन जीने की भावना को बढ़ावा दें।

     उन्हें सिखाए, असफल होना ठीक है, जीवन में आत्महत्या के अलावा भी कई सुंदर विकल्प हैं।

     युवाओं के बीच दोस्ती सबसे खूबसूरत और खुला रिश्ता है। एक अच्छा दोस्त बनें, विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो अकेले हैं और जिन्हें समर्थन की आवश्यकता है। 

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तेज़ दुनिया के इस युग में लोग एक दूसरे से अधिक मशीनों से जुड़े हुए हैं। अकेलेपन की भावना कुछ लोगों के दिल में गहरी जगह बना लेती है, जो उन्हें उजाड़ देती है। समस्याओं से जूझकर आगे बढ़ना सीखें।

 

ख़ुशबू राजपूत द्वारा लिखित।


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