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क्या है Public Safety Act

क्या है Public Safety Act

   Kautilya Academy    19-09-2019

क्या है Public Safety Act: यहां जाने इसके बारे में सबकुछ

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला को राज्य प्रशासन ने सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत बंदी बना लिया गया है. वे पीएसए के तहत बंदी बनाए जाने वाले राज्य पहले पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद हैं. उन्हें इसके अतिरिक्त जहां रखा गया है,उसे अस्थायी जेल का दर्जा दिया गया है.



फारुख अब्दुल्ला उस समय से नजरबंद हैं, जब 05 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर उसे दो केंद्रशासित प्रदेश में बांट दिया था. फारुख अब्दुल्ला के बेटे उमर अब्दुल्ला तथा पीडीपी मुखिया महबूबा मुफ्ती सहित कई दूसरे बड़े नेता भी हिरासत में रखे गए हैं.



क्या है सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए)?



सरकार सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत सुरक्षा कारणों को देखते हुए किसी भी व्यक्ति को दो साल तक नजरबंद कर सकती है. यह कानून जम्मू कश्मीर में पहली बार तत्कालीन मुख्यमंत्री शेख मोहम्मद अब्दुल्ला ने साल 1978 में लागू किया था.



इस कानून को तत्कालीन सरकार द्वारा लाने का मुख्य उद्देश्य लकड़ी की तस्करी को रोकना बताया गया था. इस कानून के तहत किसी इलाके की सुरक्षा व्यवस्था को सही तरह से बनाए रखने के मद्देनजर वहां नागरिकों के आने-जाने पर रोक लगा दी जाती हैं.



यह कानून सरकार को अधिकार देता है कि वह ऐसे किसी भी व्यक्ति को हिरासत में ले सकता है जो सुरक्षा व्यवस्था के लिए खतरा हो. यह कानून सरकार को 16 वर्ष से ज्यादा उम्र के किसी भी व्यक्ति को मुकदमा चलाए बिना दो साल की अवधि के लिए बंदी बनाने की अनुमति देता है.



पीएसए के तहत नजरबंदी के बाद क्या होता है?



अगर किसी व्यक्ति के काम से सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखने में कोई बाधा उत्पन्न होती है तो उसे एक वर्ष की प्रशासनिक हिरासत में लिया जा सकता है. डीएम पांच दिनों के भीतर व्यक्ति को लिखित रूप में नजरबंदी के कारण के बारे में सूचित करता है. हालांकि, डीएम को असाधारण मामलों में 10 दिनों के भीतर संवाद करने का अधिकार है. पीएसए के तहत हिरासत के आदेश डिवीजनल कमिश्नर या डिप्टी कमिश्नर द्वारा जारी किये जा सकते हैं.



हिरासत में लिए गए व्यक्ति को संवैधानिक सुरक्षा



हिरासत में लिए गए व्यक्ति को संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करना होता है. अधिनियम की धारा-22 लोगों के हित में की गई कार्रवाई के लिये सुरक्षा प्रदान करती है. इस कानून के प्रावधानों के मुताबिक हिरासत में लिये गए किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कोई मुकदमा, अभियोजन या कोई अन्य कानूनी कार्यवाही नहीं की जा सकती.

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