प्रत्येक राज्य में राज्य आधारित सरकारी, और न्यायिक एवं अन्य सेवाओं के आयोजन के लिये ‘राज्य लोक सेवा आयोग’ की स्थापना का प्रावधान किया गया है। यह आयोग इन सेवाओं से जुड़ी हुई परीक्षाओं का आयोजन कराता है। मध्य प्रदेश राज्य में भी राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा परीक्षाएं आयोजित करवाई जाती है।
मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की गई परीक्षा वर्ष में एक बार होती है जिसे तीन स्तरों में पूर्ण किया जाता है। इस परीक्षा के माध्यम से अभ्यर्थी को प्रशासनिक सेवा में सम्मान एवं कार्य करने के लिए व्यापक एवं अनुकूल मंच प्राप्त होता है। सही दिशा में प्राप्त मार्गदर्शन, और एमपीपीएससी नोट्स के माध्यम से कोई भी अभ्यर्थी एमपीपीएससी परीक्षा में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकता है।

मध्यप्रदेश राज्य सेवा परीक्षा में सम्मिलित होने हेतु महत्त्वपूर्ण अर्हताएं –

राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं में किसी भी राज्य के अभ्यर्थी, जो आयोग द्वारा निर्धारित शर्तों जैसे कि आयु, सीमा, शैक्षिक योग्यता, इत्यादि को पूरा करते हों, सम्मिलित हो सकते हैं।
इन परीक्षाओं में सम्मिलित होने के लिये आवेदक की न्यूनतम आयु 21 वर्ष तथा अधिकतम आयु म.प्र. लोक सेवा आयोग द्वारा (कुछ विशेष आरक्षित प्रावधानों को छोड़कर) सामान्यत: 35-40 वर्ष निर्धारित की गई है।
इन परीक्षाओं में सम्मिलित होने के लिये आवेदक को भारत में केन्द्रीय या राज्य विधानमंडल द्वारा अधिकृत किसी विश्वविद्यालय जिसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम,1956 की धारा-3 के अंतर्गत या आयोग के परामर्श से एक विश्वविद्यालय के रूप में मान्यता दी गई हो, से डिग्री धारक होना चाहिये।
मध्य प्रदेश राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा कुछ विशेष पदों (पुलिस उपाधीक्षक, अधीक्षक कारागार इत्यादि) के लिये शारीरिक मापदंड (सामान्यत: 165-167 सेमी.की लम्बाई इत्यादि ) तथा कुछ विशेष पदों (सांख्यिकीय अधिकारी, बेसिक शिक्षा अधिकारी, लेखाधिकारी इत्यादि) के लिये विशेष शैक्षणिक योग्यता का निर्धारण किया गया है। यह विशेष मानदंड अभ्यर्थी द्वारा पूर्ण करना आवश्यक है।

मध्यप्रदेश राज्य सेवा आयोग के लिए नोट्स का महत्व –

किसी भी परीक्षा की तरह मध्य प्रदेश राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की जाने वाली इस परीक्षा में भी नोट्स का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है कई बड़े संस्थानों और कोचिंग द्वारा विद्यार्थियों को विशेष प्रकार के नोट्स और पुस्तकें प्रदान की जाती हैं जिनके माध्यम से उनकी तैयारी सुगम हो सकती है। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग परीक्षा के लिए कौटिल्य एकेडमी संस्थान द्वारा जारी किए गए एमपीपीएससी नोट्स आपकी तैयारी में अत्यंत लाभकारी सिद्ध होंगे।

परिचय (Introduction):

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एम.पी.पी.एस.सी.) द्वारा राज्य विशेष प्रशासन से सम्बंधित विभिन्न पदों सहित अन्य अधीनस्थ सेवाओं का आयोजन किया जाता है। सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले ज्यादातर अभ्यर्थी (विशेषकर हिंदी माध्यम) संघ लोक सेवा आयोग (यू.पी.एस.सी.) की परीक्षा के साथ-साथ इस आयोग द्वारा आयोजित सर्वाधिक प्रतिष्ठित ‘मध्य प्रदेश राज्य सेवा परीक्षा’ में भी सम्मिलित होते हैं।

आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाएँ:

मध्य प्रदेश में राज्य आधारित सरकारी, अर्द्ध-सरकारी, न्यायिक, राज्य वन सेवा एवं अन्य अधीनस्थ सेवाओं का आयोजन मुख्य रूप से मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एम.पी.पी.एस.सी.), इंदौर द्वारा किया जाता है।
आयोग द्वारा आयोजित सर्वाधिक लोकप्रिय परीक्षा‘मध्य प्रदेश राज्य सेवा परीक्षा’ एवं ‘मध्य प्रदेश राज्य वन सेवा परीक्षा’ है।
‘मध्य प्रदेश राज्य सेवा परीक्षा’ के लिये सामान्य शैक्षणिक योग्यता जहाँ किसी भी विषय के साथ स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण होना है, वहीं ‘मध्य प्रदेश राज्य वन सेवा परीक्षा’ के लिये सामान्यत: विज्ञान विषय के साथ स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।

 

एम.पी.पी.सी.एस. परीक्षा- प्रक्रिया

आयोग द्वारा आयोजित इस प्रतियोगी परीक्षा में सामान्यत: क्रमवार तीन स्तर सम्मिलित हैं-
1 : प्रारंभिक परीक्षा – वस्तुनिष्ठ प्रकृति
2 : मुख्य परीक्षा – वर्णनात्मक प्रकृति
3 : साक्षात्कार – मौखिक
आयोग द्वारा आयोजित प्रारंभिक परीक्षा की प्रकृति वस्तुनिष्ठ (बहुविकल्पीय) होती है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक प्रश्न के लिये दिये गए चार संभावित विकल्पों (a, b, c और d) में से एक सही विकल्प का चयन करना होता है।

प्रश्न से सम्बंधित इस चयनित विकल्प को आयोग द्वारा दिये गए ओ.एम.आर. शीट में उसके सम्मुख दिये गए सम्बंधित गोले (सर्किल) में उचित स्थान पर केवल काले बॉल पॉइंट पेन से भरना होता है।
एम.पी.पी.एस.सी. द्वारा आयोजित इस परीक्षा में गलत उत्तर के लिये किसी भी प्रकार की नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान नहीं है।
यदि किसी प्रश्न का अभ्यर्थी एक से अधिक उत्तर देता हैं, तो उस उत्तर को गलत माना जाएगा।
प्रश्नपत्र दो भाषाओं (हिंदी एवं अंग्रेजी) में दिये गए होते हैं, अभ्यर्थी इन दोनों में से किसी भी भाषा में अपनी सहजता के आधार पर प्रश्नों का उत्तर दे सकते हैं।
वर्तमान में आयोग की इस प्रारंभिक परीक्षा में दो अनिवार्य प्रश्नपत्र (क्रमशः ‘सामान्य अध्ययन’ एवं ‘सामान्य अभिरुचि परीक्षण’) पूछे जाते हैं, जिसकी परीक्षा एक ही दिन दो विभिन्न पालियों में दो-दो घंटे की समयावधि में सम्पन्न होती है।
प्रथम प्रश्नपत्र ‘सामान्य अध्ययन’ का है, जिसमें प्रश्नों की कुल संख्या 100 एवं अधिकतम अंक 200 निर्धारित हैं।
द्वितीय प्रश्नपत्र ‘सामान्य अभिरुचि परीक्षण’ का है, जिसे सीसैट के नाम से भी जाना जाता है। जिसमें प्रश्नों की कुल संख्या 100 एवं अधिकतम अंक 200 निर्धारित हैं।

मुख्य परीक्षा की प्रक्रिया:

प्रारंभिक परीक्षा में सफल हुए अभ्यर्थियों के लिये मुख्य परीक्षा का आयोजन आयोग द्वारा निर्धारित राज्य के विभिन्न केन्द्रों पर किया जाता है।
मुख्य परीक्षा में छ: अनिवार्य प्रश्नपत्र [सामान्य अध्ययन प्रथम प्रश्नपत्र, सामान्य अध्ययन द्वितीय प्रश्नपत्र, सामान्य अध्ययन तृतीय प्रश्नपत्र, सामान्य अध्ययन चतुर्थ प्रश्नपत्र, सामान्य हिंदी (पंचम प्रश्नपत्र) एवं ‘हिन्दी निबंध लेखन’ (षष्ठम प्रश्नपत्र)] पूछे जाएंगे।
मुख्य परीक्षा कुल1400 अंकों की होती है।
सामान्य अध्ययन के क्रमशः तीन प्रश्नपत्र (सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र, सामान्य अध्ययन द्वितीय प्रश्नपत्र एवं सामान्य अध्ययन तृतीय प्रश्नपत्र) में प्रत्येक के लिये अधिकतम 300-300 अंक निर्धारित हैं।
सामान्य अध्ययन चतुर्थ प्रश्नपत्र एवं सामान्य हिंदी (पंचम प्रश्नपत्र) के लिये 200-200 अंक निर्धारित हैं।
‘हिन्दी निबंध लेखन’ (षष्ठम प्रश्नपत्र) के लिये 100 अंक निर्धारित हैं।
‘सामान्य हिंदी’ तथा ‘हिन्दी निबंध लेखन’ के प्रश्नपत्र को छोड़कर सामान्य अध्ययन के चारों प्रश्नपत्र हिंदी तथा अंग्रेजी माध्यम में उपलब्ध होंगे। अभ्यर्थी केवल उसी भाषा में परीक्षा दे सकेगा जो उसने अपने मुख्य परीक्षा के आवेदन पत्र में माध्यम के रूप में चयनित किया है।
परीक्षा के सभी विषयों में कम से कम शब्दों में की गई संगठित, सूक्ष्म और सशक्त अभिव्यक्ति को श्रेय मिलेगा।

साक्षात्कार की प्रक्रिया:

मुख्य परीक्षा में चयनित अभ्यर्थियों को सामान्यत: एक माह पश्चात् आयोग के समक्ष साक्षात्कार के लिये उपस्थित होना होता है।
साक्षात्कार के दौरान अभ्यर्थियों के व्यक्तित्व का परीक्षण किया जाता है। इसमें आयोग के सदस्यों द्वारा आयोग में निर्धारित स्थान पर मौखिक प्रश्न पूछे जाते हैं, जिसका उत्तर अभ्यर्थी को मौखिक रूप से देना होता है।
मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार में प्राप्त किये गए अंकों के योग के आधार पर अंतिम रूप से मेरिट लिस्ट तैयार की जाती है।
सम्पूर्ण साक्षात्कार समाप्त होने के सामान्यत: एक सप्ताह पश्चात अन्तिम रूप से चयनित अभ्यर्थियों की सूची जारी की जाती है।
उपरोक्त वर्णित प्रत्येक प्रश्नपत्र में 40 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य है। अनुसूचित जाति / जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा नि:शक्त श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम अर्हकारी अंक 30 प्रतिशत होंगे।

परीक्षा की तैयारी कैसे करें ?

सिविल सेवा परीक्षा की तरह ही एमपीपीएससी परीक्षा में भी तीन स्तर (प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार) होते हैं।सिविल सेवा परीक्षा की तरह ही एमपीपीएससी परीक्षा में भी तीन स्तर (प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार) होते हैं।
एमपीपीएससी परीक्षा में सफल होने के लिए अनिवार्य है – तथ्यों पर मज़बूत पकड़ और विश्लेषणात्मक क्षमता। अत: अभ्यर्थियों को एक संतुलित रणनीति के साथ तैयारी करने की आवश्यकता है।
परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों की प्रकृति एवं आयोग द्वारा अपेक्षित उत्तर में अंतर होने के कारण विषय की गंभीर समझ होनी अनिवार्य है।
इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए कौटिल्य एकेडमी ने एक सार्थक पहल की है। जिसके तहत हमने एक ऐसा मंच तैयार किया है जहाँ एमपीपीएससी के साथ-साथ परीक्षाओं में सफलता सुनिश्चित करने के लिये, कुशल मार्गदर्शन उपलब्ध कराने हेतु विशेष एमपीपीएससी नोट्स तैयार किए गए है।
इसकी सहायता से आप की एमपीपीएससी परीक्षा के साथ-साथ विभिन्न आयोगों द्वारा आयोजित पी.सी.एस. परीक्षाओं की प्रकृति, प्रक्रिया एवं उनमें सफल होने की रणनीति को समझ सकेंगे।

परीक्षा हेतु उपयुक्त रणनीति

किसी भी परीक्षा को उत्तीर्ण करने के लिये उसकी प्रकृति एवं प्रक्रिया के अनुरूप उचित एवं गतिशील रणनीति बनाने की आवश्यकता होती है।
अभ्यर्थियों की सुविधा के लिये इस वेबसाइट पर विभिन्न परीक्षाओं का संक्षिप्त परिचय, सभी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण नोट्स, प्रकृति एवं प्रक्रिया, रणनीति, अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs), विज्ञप्ति का संक्षिप्त विवरण, पाठ्यक्रम (प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा), विगत वर्षो में इन परीक्षाओं में पूछे गये प्रश्नों (प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा) का संकलन, टॉपर्स इंटरव्यू आदि प्रस्तुत किया गया है।

नोट-
**मध्य प्रदेश राज्य सेवा परीक्षा में सीसैट का यह प्रश्नपत्र क्वालिफाइंग प्रकृति का है। इसमें सफल होने के लिये न्यूनतम अर्हकारी अंक (सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिये न्यूनतम 40% तथा राज्य के अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/ अन्य पिछड़ा वर्ग एवं विकलांग श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिये न्यूनतम 30%) प्राप्त करना अनिवार्य है।
प्रारंभिक परीक्षा की प्रकृति वस्तुनिष्ठ (बहुविकल्पीय) होती है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक प्रश्न के लिये दिये गए चार संभावित विकल्पों (a, b, c और d) में से एक सही विकल्प का चयन करना होता है।
प्रारंभिक परीक्षा में प्राप्त किये गये अंकों को मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार में प्राप्त किये गये अंकों के साथ नहीं जोड़ा जाता है ।

एम.पी.पी.एस.सी. FAQs

प्रश्न – 1 : प्रारंभिक परीक्षा के दौरान प्रश्नों का समाधान किस क्रम में करना चाहिये?
उत्तर : प्रारंभिक परीक्षा के दौरान प्रश्नों के समाधान के क्रम को लेकर ज्यादातर अभ्यर्थियों में भ्रम की स्थिति बनी रहती है। अगर आप सामान्य अध्ययन एवं सीसैट के सभी विषयों में सहज हैं और आपकी गति भी संतोषजनक है तो आप किसी भी क्रम में प्रश्न हल करके सफल हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में बेहतर यही होता है कि जिस क्रम में प्रश्न आते जाएँ, उसी क्रम में उन्हें हल करते हुए बढ़ें। अगर आप सभी विषयों में पारंगत नहीं है, तो ऐसी स्थिति में आप सबसे पहले, उन प्रश्नों को हल करें जो सबसे कम समय लेते हैं।

प्रश्न – 2 : परीक्षा में समय-प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है, उसके लिये क्या किया जाना चाहिये?
उत्तर : परीक्षा से पहले मॉक-टेस्ट में भाग लें और हर प्रश्नपत्र में परीक्षण करें कि किस वर्ग के प्रश्न कितने समय में हो पाते हैं। ज़्यादा समय लेने वाले प्रश्नों को पहले ही पहचान लेंगे तो परीक्षा में समय बर्बाद नहीं होगा। बार-बार अभ्यास करने से गति बढ़ाई जा सकती है।

प्रश्न – 3 : ‘कट-ऑफ’ क्या है? इसका निर्धारण कैसे होता है?
उत्तर : ‘कट-ऑफ’ का अर्थ है- वे न्यूनतम अंक जिन्हें प्राप्त कर के कोई उम्मीदवार परीक्षा में सफल हुआ है। एम.पी.पी.एस.सी. परीक्षा में हर वर्ष प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा तथा साक्षात्कार के परिणाम में ‘कट-ऑफ’ तय की जाती है। ‘कट-ऑफ’ या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवार सफल घोषित किये जाते हैं और शेष असफल।
आरक्षण व्यवस्था के अंतर्गत यह कट-आॉफ भिन्न-भिन्न वर्गों के उम्मीदवारों के लिए भिन्न-भिन्न होती हैं।
प्रारंभिक परीक्षा में ‘कट-ऑफ’ का निर्धारण प्रथम प्रश्नपत्र सामान्य अध्ययन के अंकों के आधार पर किया जाता है, क्योंकि द्वितीय प्रश्नपत्र सीसैट केवल क्वालिफाइंग होता है।
‘कट-ऑफ’ की प्रकृति स्थिर नहीं है। इसमें हर साल उतार-चढ़ाव होता रहता है। इसका निर्धारण सीटों की संख्या, प्रश्नपत्रों के कठिनाई स्तर तथा उम्मीदवारों की संख्या व गुणवत्ता जैसे कारकों पर निर्भर करता है। अगर प्रश्नपत्र सरल होंगे, या उम्मीदवारों की संख्या व गुणवत्ता ऊँची होगी तो कट-ऑफ बढ़ जाएगा और विपरीत स्थितियों में अपने आप कम हो जाएगा।

प्रश्न – 4 : एम.पी.पी.एस.सी. की प्रारम्भिक परीक्षा में ‘मध्य प्रदेश राज्य विशेष’ के सन्दर्भ में कितने प्रश्न पूछे जाते हैं? इसकी तैयारी कैसे करें?
उत्तर : एम.पी.पी.एस.सी. की प्रारम्भिक परीक्षा में ‘मध्य प्रदेश राज्य विशेष’ के सन्दर्भ में लगभग 20-25 प्रश्न पूछे जाते हैं। सामान्य अध्ययन के इस प्रश्नपत्र में कुल 100 प्रश्नों में से 20-25 प्रश्न केवल मध्य प्रदेश राज्य विशेष के सन्दर्भ में पूछा जाना इस विषय की महत्ता को स्वयं ही स्पष्ट करता है।
मध्य प्रदेश राज्य विशेष के सन्दर्भ में मध्य प्रदेश का इतिहास, कला एवं संस्कृति तथा भूगोल के साथ-साथ यहाँ की राजनीति एवं अर्थव्यवस्था पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं। कौटिल्य एकडेमी के एम.पी.पी.एस.सी. नोट्स के माध्यम से आप मध्य प्रदेश राज्य से जुड़ी संपूर्ण जानकारी विस्तृत रूप से प्राप्त कर सकते हैं।

प्रश्न – 5: क्या ‘मॉक टेस्ट’ देने से प्रारम्भिक परीक्षा में कोई लाभ होता है? अगर हाँ, तो क्या ?
उत्तर : प्रारम्भिक परीक्षाओं के लिये मॉक टेस्ट देना अत्यंत लाभदायक सिद्ध होता है। इसका पहला लाभ है कि आप परीक्षा में होने वाले तनाव (Anxiety) पर नियंत्रण करना सीख जाते हैं।
अलग-अलग परीक्षाओं में आप यह प्रयोग कर सकते हैं कि प्रश्नों को किस क्रम में करने से आप सबसे बेहतर परिणाम तक पहुँच पा रहे हैं।
समय प्रबंधन की क्षमता बेहतर होती है।
चौथा लाभ है कि आपको यह अनुमान होता रहता है कि अपने प्रतिस्पर्द्धियों की तुलना में आपका स्तर क्या है।

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