राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षा

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 315(1) के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग (यू.पी.एस.सी.) के साथ-साथ प्रत्येक राज्य में राज्य आधारित सरकारी, अर्द्ध-सरकारी, न्यायिक एवं अन्य अधीनस्थ सेवाओं के आयोजन के लिये ‘राज्य लोक सेवा आयोग’ की स्थापना का प्रावधान किया गया है। यह आयोग इन सेवाओं से संबद्ध परीक्षाओं का आयोजन कराता है। राज्य लोक सेवा आयोगों द्वारा आयोजित सर्वाधिक लोकप्रिय परीक्षा ‘पी.सी.एस.’ (प्रोविंशियल सिविल सर्विसेज़) परीक्षा है।

  • यू.पी.एस.सी. की परीक्षा की तैयारी के दौरान ज़्यादातर अभ्यर्थी राज्य सिविल सेवा (पी.सी.एस.) परीक्षाओं में भी सम्मिलित होते हैं। यह प्रवृत्तिअधिकांशत: हिंदी भाषी राज्यों के अभ्यर्थियों में देखने को मिलती है।
  • ‘पी.सी.एस.’ परीक्षाओं में उत्तीर्ण होने वाले अभ्यर्थी संबंधित राज्य विशेष के प्रशासन के अंग होते हैं जिनकी नियुक्ति उस राज्य विशेष में ज़िला, प्रखंड व तहसील स्तर पर की जाती है।
  • स्थायित्व, सम्मान एवं कार्य करने की व्यापकएवं अनुकूल दशाओं इत्यादि का बेहतर मंच उपलब्ध कराने के कारण ये परीक्षाएँ अभ्यर्थियों एवं समाज के बीच सदैव प्राथमिकता एवं गौरव की विषयवस्तु रही हैं।

परीक्षा में सम्मिलित होने हेतु अर्हताएं 

  • राज्य लोक सेवा आयोगों द्वारा आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं में सामान्यत: किसी भी राज्य के अभ्यर्थी, जो आयोग द्वारा निर्धारित शर्तों (आयु सीमा, शैक्षिक योग्यता इत्यादि) को पूरा करते हों, सम्मिलित हो सकते हैं।
  • इन परीक्षाओं में सम्मिलित होने के लिये आवेदक की न्यूनतम आयु 21 वर्ष (किन्हीं विशिष्ट पद हेतु 18 वर्ष) तथा अधिकतम आयु भिन्न राज्य लोक सेवा आयोगों द्वारा (कुछ विशेष आरक्षित प्रावधानों को छोड़कर) सामान्यत: 35-40 वर्ष निर्धारित की गई है।
  • इन परीक्षाओं में सम्मिलित होने के लिये आवेदक को भारत में केन्द्रीय या राज्य विधानमंडल द्वारा अधिकृत किसी  विश्वविद्यालय या संसद के एक अधिनियम द्वारा स्थापित या घोषित शिक्षण संस्थान जिसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम,1956 की धारा-3 के अंतर्गत या आयोग के परामर्श से एक विश्वविद्यालय के रूप में मान्यता दी गई हो, से डिग्री धारक होना चाहिये।
  • राज्य लोक सेवा आयोगों द्वारा पी.सी.एस. परीक्षा में कुछ विशेष पदों (पुलिस उपाधीक्षक, अधीक्षक कारागार इत्यादि) के लिये शारीरिक मापदंड (सामान्यत: 165-167 सेमी.की लम्बाई इत्यादि ) तथा कुछ विशेष पदों (सांख्यिकीय अधिकारी, बेसिक शिक्षा अधिकारी, लेखाधिकारी इत्यादि) के लिये विशेष शैक्षणिक योग्यता का निर्धारण किया गया है।
  • सिविल सेवा परीक्षा में आरक्षण कोटे का निर्धारण जहाँ केद्र सरकार द्वारा किया जाता है, वहीं ‘पी.सी.एस.’ परीक्षाओं में आरक्षण कोटे का निर्धारण विभिन्न राज्यों द्वारा अपने-अपने तरीके से किया जाता है। इसलिये यह भी संभव है कि यदि कोई ‘जाति’ किसी राज्य में ‘आरक्षित श्रेणी’ के अंतर्गत आती हो, उसे अन्य राज्य के संदर्भ में ‘सामान्य श्रेणी’ का माना जाए।

परीक्षा की तैयारी कैसे करें ?  

  • सिविल सेवा परीक्षाकी तरह ही सभी पी.सी.एस. परीक्षाओं में भी तीन स्तर (प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार) होते हैं। हालाँकि, विभिन्न राज्यों की पी.सी.एस. परीक्षाओं की प्रकृति में अंतर अवश्य है, जैसे- राजस्थान, उत्तराखंड एवं छत्तीसगढ़ में प्रारंभिक परीक्षा में ऋणात्मक अंकन (Negative marking) का प्रावधान है, जबकि अन्य राज्यों (जिनका उल्लेख इस वेबसाइट में किया गया है ) में नहीं है। ऐसे ही, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ में प्रारंभिक परीक्षा में दो प्रश्नपत्र होते हैं, जिनमें द्वितीय प्रश्नपत्र के रूप में सीसैट (सिविल सर्विसेज़ एप्टिट्यूड टेस्ट) का प्रश्नपत्र होता है। झारखण्ड में द्वितीय प्रश्नपत्र के रूप में ‘झारखण्ड का सामान्य ज्ञान’ पूछा जाता है, जबकि बिहार और राजस्थान में प्रारंभिक परीक्षा में एक ही प्रश्नपत्र (सामान्य अध्ययन) होता है।
  • प्रश्नों की प्रकृति एवं प्रक्रिया में सूक्ष्म अंतर होने के बावजूदसिविल सेवा परीक्षा के प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा के पाठ्यक्रम के अध्ययन की पी.सी.एस. परीक्षाओं में सार्थक भूमिका होती है, इसलिये यू.पी.एस.सी. की परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी अगर उपयुक्त रणनीति के साथ-साथ परीक्षा की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए पी.सी.एस. परीक्षाओं की तैयारी करें तो पी.सी.एस. परीक्षाओं में उनके सफल होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • पी.सी.एस. परीक्षा में सफल होने की एक अन्य अनिवार्य शर्त है- तथ्यों पर मज़बूत पकड़, जबकिसिविल सेवा परीक्षा में तथ्यों के साथ-साथ विश्लेषणात्मक क्षमता की भी आवश्यकता होती है। अत: अभ्यर्थियों को एक संतुलित रणनीति के साथ तैयारी करने की आवश्यकता है।
  • देखा जाए तो कुछ राज्य लोक सेवा आयोगों ने अपने प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा के पाठ्यक्रम को संघ लोक सेवा आयोग के अनुरूप बनाने का प्रयास किया है, किंतु इन दोनों परीक्षाओं में पूछे जाने वाले प्रश्नों की प्रकृति एवं आयोगों द्वारा अपेक्षित उत्तर में अंतर होने के कारण इनकी गंभीर समझ होनी अनिवार्य है।
  • इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए ‘हमारी टीम’ ने एक सार्थक पहल की है जिसके तहतहमने एक ऐसा मंच तैयार किया है जहाँ संघ लोक सेवा आयोग (यू.पी.एस.सी.) के साथ-साथ विभिन्न राज्य लोक सेवा आयोगों की पी.सी.एस. परीक्षाओं में सफलता सुनिश्चित करने के लिये कुशल मार्गदर्शन उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। इसकी सहायता से आप यू.पी.एस.सी. की परीक्षा के साथ-साथ विभिन्न राज्य लोक सेवा आयोगों द्वारा आयोजित पी.सी.एस. परीक्षाओं की प्रकृति, प्रक्रिया एवं उनमें सफल होने की रणनीति को समझ सकेंगे।

परीक्षा हेतु उपयुक्त रणनीति 

  • किसी भी परीक्षा को उत्तीर्ण करने के लिये उसकी प्रकृति एवं प्रक्रिया के अनुरूप उचित एवं गतिशील रणनीति बनाने की आवश्यकता होती है, जबकि पी.सी.एस. परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अधिकांश अभ्यर्थी इन परीक्षाओं की रणनीति को या तो समझ नहीं पाते हैं या फिर इसे गंभीरता से नहीं लेते हैं।फलस्वरूप परीक्षा में अपेक्षानुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं।
  • पी.सी.एस. परीक्षाओं के नवीनतम पैटर्न को ध्यान में रखते हुए इस वेबसाइट पर विभिन्न राज्य लोक सेवा आयोगों द्वारा आयोजित की जाने वाली ‘पी.सी.एस.’ परीक्षाओं में सफलता सुनिश्चित करने के लिये एक कुशल रणनीति बनाने का गंभीर प्रयास किया गया है।
  • अभ्यर्थियों की सुविधा के लिये इस वेबसाइट पर विभिन्न ‘पी.सी.एस.’ परीक्षाओं का संक्षिप्त परिचय, प्रकृति एवं प्रक्रिया, रणनीति, अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs), विज्ञप्ति का  संक्षिप्त विवरण, पाठ्यक्रम (प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा), विगत वर्षो में इन परीक्षाओं में पूछे गये प्रश्नों (प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा) का संकलन, टॉपर्स इंटरव्यू आदि प्रस्तुत किया गया है।
  • अभ्यर्थियों की सुविधा के लिये इस वेबसाइट पर, सामान्य अध्ययन के लिये आवश्यक अध्ययन सामग्री के रूप में कक्षा-6 से कक्षा-12 तक की एन.सी.ई.आर.टी. की सभी विषयों की पुस्तकों से अध्यायवार वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का संकलन (व्याख्या सहित उत्तर के साथ) उपलब्ध कराया गया है।
  • साथ ही, समसामयिक घटनाक्रम से संबंधित प्रश्नों को हल करने के लिये इस वेबसाइट पर दैनिक समाचार विश्लेषण, दैनिक लेख विश्लेषणएवं उनसे संबंधित वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का संकलन (व्याख्या सहित उत्तर के साथ) प्रतिदिन उपलब्ध कराया जाता है।
  • राज्य विशेष से सम्बंधित प्रश्नों को हल करने के लिये उस राज्य से संबंधित प्रमुख परीक्षोपयोगी विषयों पर अवधारणात्मक व तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध कराई गई  है।
  • इन परीक्षाओं में सफलता सुनिश्चित करने तथा अभ्यर्थियों के व्यक्तित्व विकास के लिये भी वेबसाइट पर हर संभव प्रयास किया गया है जिनका विस्तृत विवरण विभिन्न टैबों के रूप में वर्गीकृत है।

 

पी.सी.एस. (प्रारंभिक परीक्षा) प्रारूप

परीक्षा प्रश्नपत्र कुल योग ऋणात्मक अंकन
उत्तर प्रदेश
पी.सी.एस.
प्रवर प्रश्नपत्र -1 (सामान्य अध्ययन )- 200 अंक, 150 प्रश्न
* प्रश्नपत्र -2 (सीसैट ) – 200 अंक , 100 प्रश्न
200 अंक 1/3
अवर ‘सामान्य अध्ययन’ प्रश्नपत्र – 300 अंक , 150 प्रश्न 300 अंक NA
आर.ओ./ ए. आर. ओ. प्रश्नपत्र -1 (सामान्य अध्ययन )- 140 अंक, 140 प्रश्न
प्रश्नपत्र -2 (सामान्य हिंदी ) – 60 अंक, 60 प्रश्न
200 अंक 1/3
बिहार पी.सी.एस. ‘सामान्य अध्ययन’ प्रश्नपत्र – 150 अंक, 150 प्रश्न 150 अंक NA
राजस्थान पी.सी.एस. (आर.ए.एस. /आर. टी. एस.) ‘सामान्य ज्ञान एवं सामान्य विज्ञान’ प्रश्नपत्र – 200 अंक , 150 प्रश्न 200 अंक 1/3
मध्य प्रदेश
पी.सी.एस.
राज्य सेवा परीक्षा प्रश्नपत्र -1 (सामान्य अध्ययन )- 200 अंक, 100 प्रश्न
**प्रश्नपत्र -2 (सीसैट ) – 200 अंक , 100 प्रश्न
200 अंक NA
राज्य वन सेवा परीक्षा प्रश्नपत्र -1 (सामान्य अध्ययन )- 200 अंक, 100 प्रश्न
प्रश्नपत्र -2 (सीसैट ) – 200 अंक , 100 प्रश्न
400 अंक
उत्तराखंड पी.सी.एस. प्रश्नपत्र -1 (सामान्य अध्ययन)- 150 अंक , 150 प्रश्न
प्रश्नपत्र -2 (सीसैट ) – 150 अंक , 100 प्रश्न
300 अंक 1/4
झारखंड पी.सी.एस. प्रश्नपत्र -1 (सामान्य अध्ययन )- 200 अंक, 100 प्रश्न
प्रश्नपत्र -2 (झारखंड का सामान्य ज्ञान) -200 अंक , 100 प्रश्न
400 अंक NA
छत्तीसगढ़ पी.सी.एस. (राज्य सेवा परीक्षा) प्रश्नपत्र -1 (सामान्य अध्ययन )- 200 अंक, 100 प्रश्न
*** प्रश्नपत्र -2 (सीसैट ) -200 अंक , 100 प्रश्न
200 अंक 1/3
हिमाचल प्रदेश पी.सी.एस. प्रश्नपत्र -1 (सामान्य अध्ययन) – 200 अंक, 100 प्रश्न
**** प्रश्नपत्र -2 (सीसैट) – 200 अंक, 100 प्रश्न
200 अंक 1/3

नोट-

  • * उत्तर प्रदेशपी.सी.एस. (प्रवर) परीक्षा में सीसैट का यह प्रश्नपत्र  क्वालिफाइंग  प्रकृति का है । इसमें सफल होने के लिये न्यूनतम 33% अंक प्राप्त करना अनिवार्य है।
  • **मध्य प्रदेश राज्य सेवा परीक्षा में सीसैट का यह प्रश्नपत्र  क्वालिफाइंग  प्रकृति का है। इसमें सफल होने के लिये न्यूनतम अर्हकारी अंक (सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिये न्यूनतम 40% तथा राज्य के अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/ अन्य पिछड़ा वर्ग एवं विकलांग श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिये न्यूनतम 30%) प्राप्त करना अनिवार्य है।
  • *** छत्तीसगढ़ पी.सी.एस. (राज्य सेवा परीक्षा)की परीक्षा में सीसैट का यह प्रश्नपत्र क्वालिफाइंग प्रकृति का है। इसमें सफल होने के लिये न्यूनतम 33% अंक प्राप्त करना अनिवार्य है ।
  • **** हिमाचल प्रदेश पी.सी.एस. की परीक्षा में सीसैट का यह प्रश्नपत्र क्वालिफाइंग प्रकृति का है। इसमें सफल होने के लिये न्यूनतम 33% अंक प्राप्त करना अनिवार्य है ।
  • प्रारंभिक परीक्षा की प्रकृति वस्तुनिष्ठ (बहुविकल्पीय) होती है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक प्रश्न के लिये दिये गए चार संभावित विकल्पों (a, b, c और d) में से एक सही विकल्प का चयन करना होता है। बिहार एवं छत्तीसगढ़ राज्य सेवा परीक्षा में पाँच संभावित विकल्पों (a, b, c, d  एवं e) में से किसी एक विकल्प का चयन करना होता है|
  • प्रारंभिक परीक्षा में प्राप्त किये गये अंकों को मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार में प्राप्त किये गये अंकों के साथ नहीं जोड़ा जाता है |

पी.सी.एस. (मुख्य परीक्षा) प्रारूप

परीक्षा प्रश्नपत्र  उपयोग   साक्षात्कार कुल योग
उत्तर प्रदेश
पी.सी.एस.
प्रवर अनिवार्य प्रश्नपत्र –
सामान्य हिंदी – 150 अंक
निबंध – 150 अंक
सामान्य अध्ययन -1 लिखित (वर्णनात्मक)- 200 अंक
सामान्य अध्ययन -2 लिखित (वर्णनात्मक)- 200 अंक
सामान्य अध्ययन -3 लिखित (वर्णनात्मक)- 200 अंक
सामान्य अध्ययन -4 लिखित (वर्णनात्मक)- 200 अंक
वैकल्पिक प्रश्नपत्र –
वैकल्पिक विषय – 1 (प्रश्नपत्र -1) – 200 अंक
वैकल्पिक विषय – 1 (प्रश्नपत्र -2) – 200 अंक
1500 अंक 100 अंक 1600 अंक
अवर प्रश्नपत्र -1 सामान्य अध्ययन (वस्तुनिष्ठ)- 200 अंक, 120 प्रश्न
प्रश्नपत्र -2 सामान्य हिंदी एवं निबंध – 200 अंक (100 + 100)
400 अंक 50 अंक 450 अंक
आर.ओ./ ए. आर. ओ. प्रश्नपत्र -1 सामान्य अध्ययन (वस्तुनिष्ठ)- 120 अंक, 120 प्रश्न
प्रश्नपत्र -2 सामान्य हिंदी एवं आलेखन – 100 अंक
प्रश्नपत्र- 3 सामान्य शब्द एवं हिंदी व्याकरण (वस्तुनिष्ठ ) – 60 अंक, 30 प्रश्न
प्रश्नपत्र -4 निबंध – 120 अंक
400 अंक टाइपिंग टेस्ट
(ए.आर.ओ. )
400 अंक
बिहार पी.सी.एस. *सामान्य हिंदी – 100 अंक
(क्वालिफाइंग अंक 30 %, इस प्रश्नपत्र में प्राप्त अंकों को मेरिट लिस्ट में नहीं जोड़ा जाता है)
सामान्य अध्ययन 1 – 300 अंक
सामान्य अध्ययन 2 – 300 अंक
वैकल्पिक विषय – 300अंक
900 अंक 120 अंक 1020 अंक
राजस्थान पी.सी.एस.
(आर.ए.एस. /आर. टी. एस.)
प्रश्नपत्र-1 (सामान्य अध्ययन ) – 200 अंक
प्रश्नपत्र-2 (सामान्य अध्ययन ) – 200 अंक
प्रश्नपत्र- 3 (सामान्य अध्ययन) – 200 अंक
प्रश्न पत्र-4 (सामान्य हिंदी एवं सामान्य अंग्रेज़ी) – 200अंक
800 अंक 100 अंक 900 अंक
मध्य प्रदेश पी.सी.एस.
(राज्य सेवा परीक्षा)
प्रश्नपत्र-1 (सामान्य अध्ययन ) – 300 अंक
प्रश्नपत्र-2 (सामान्य अध्ययन ) – 300 अंक
प्रश्नपत्र- 3 (सामान्य अध्ययन) – 300 अंक
प्रश्नपत्र -4 (सामान्य अध्ययन ) – 200 अंक
प्रश्नपत्र -5 (सामान्य हिंदी ) – 200 अंक
प्रश्नपत्र -6 ( हिंदी निबंध लेखन) – 100अंक
1400 अंक 175 अंक 1575 अंक
उत्तराखंड पी.सी.एस. प्रश्नपत्र -1 (भाषा) – 300 अंक
(क्वालिफाइंग अंक 35 %, इस प्रश्नपत्र में प्राप्त अंकों को मेरिट लिस्ट में जोड़ा जाता है)
प्रश्नपत्र-2 (सामान्य अध्ययन ) – 200 अंक
प्रश्नपत्र-3 (सामान्य अध्ययन ) – 200 अंक
प्रश्नपत्र- 4 (सामान्य अध्ययन) – 200 अंक
प्रश्नपत्र- 5 (सामान्य अध्ययन ) – 200 अंक
प्रश्नपत्र- 6 (सामान्य अध्ययन ) – 200 अंक
प्रश्नपत्र- 7 (सामान्य अध्ययन) – 200 अंक
1500 अंक 200 अंक 1700 अंक
झारखंड पी.सी.एस. प्रश्नपत्र-1 (सामान्य हिंदी एवं सामान्य अंग्रेज़ी)-100 अंक
(क्वालिफाइंग अंक 30%
इस प्रश्नपत्र में प्राप्त अंकों को मेरिट लिस्ट में नहीं जोड़ा जाता है )
प्रश्नपत्र- 2 (भाषा एवं साहित्य) -150 अंक
प्रश्नपत्र-3 (सामान्य अध्ययन ) – 200 अंक
प्रश्नपत्र- 4 (सामान्य अध्ययन) – 200 अंक
प्रश्नपत्र- 5 (सामान्य अध्ययन ) – 200 अंक
प्रश्नपत्र- 6 (सामान्य अध्ययन ) – 200 अंक
950 अंक 100 अंक 1050 अंक
छत्तीसगढ़ पी.सी.एस.
(राज्य सेवा परीक्षा)
प्रश्नपत्र -1 (भाषा)- 200 अंक
प्रश्नपत्र -2 (निबंध) – 200 अंक
प्रश्नपत्र-3 (सामान्य अध्ययन ) – 200 अंक
प्रश्नपत्र- 4 (सामान्य अध्ययन) – 200 अंक
प्रश्नपत्र- 5 (सामान्य अध्ययन ) – 200 अंक
प्रश्नपत्र- 6 (सामान्य अध्ययन ) – 200 अंक
प्रश्नपत्र- 7 (सामान्य अध्ययन) – 200 अंक
1400 अंक 150 अंक 1550 अंक
हिमाचल प्रदेश पी.सी.एस. प्रश्नपत्र-1 (सामान्य अंग्रेज़ी) – 100 अंक
(क्वालिफाइंग अंक 40%, इस प्रश्नपत्र में प्राप्त अंकों को मेरिट लिस्ट में नहीं जोड़ा जाता है)
प्रश्नपत्र- 2 (सामान्य हिंदी) – 100 अंक
(क्वालिफाइंग अंक 40%, इस प्रश्नपत्र में प्राप्त अंकों को मेरिट लिस्ट में नहीं जोड़ा जाता है )
प्रश्नपत्र- 3 निबंध -100 अंक
प्रश्नपत्र- 4 (सामान्य अध्ययन) – 200 अंक
प्रश्नपत्र- 5 (सामान्य अध्ययन) – 200 अंक
प्रश्नपत्र- 6 (सामान्य अध्ययन) – 200 अंक
प्रश्नपत्र- 7 वैकल्पिक विषय (प्रश्नपत्र -1) – 100 अंक
प्रश्नपत्र- 8 वैकल्पिक विषय (प्रश्नपत्र -2) – 100 अंक
900 अंक 150 अंक 1050 अंक

 

 

 

एम.पी.पी.एस.सी. FAQs

प्रश्न – 1 : एम.पी.पी.सी.एस. प्रारंभिक परीक्षा में द्वितीय प्रश्नपत्र (सीसैट) के क्वालिफाइंग होने का क्या अर्थ है?
उत्तर: एम.पी.पी.सी.एस. प्रारंभिक परीक्षा में द्वितीय प्रश्नपत्र ‘सीसैट’ जिसे ‘सामान्य अभिरुचि परीक्षण’ के नाम से जाना जाता है, के क्वालिफाइंग होने का अर्थ है कि इसमें न्यूनतम 40% अंक प्राप्त करना अनिवार्य है चूँकि इस प्रश्नपत्र में प्रश्नों की कुल संख्या 100 एवं अधिकतम अंक 200 निर्धारित है। अत: अभ्यर्थियों को अपनी सफलता सुनिश्चित करने के लिये इस प्रश्नपत्र में न्यूनतम 80 अंक या उससे अधिक अंक प्राप्त करने अनिवार्य होंगे।
इस प्रश्नपत्र में 80 अंक से कम अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों के प्रथम प्रश्नपत्र की कॉपी का मूल्यांकन ही नहीं किया जाता है, इसलिये प्रथम प्रश्नपत्र में चाहे जितना भी अच्छा प्रदर्शन किया गया हो द्वितीय प्रश्नपत्र में क्वालिफाइंग अंक प्राप्त करना अनिवार्य है।
आयोग द्वारा सामान्य श्रेणी एवं राज्य के बाहर के अभ्यर्थियों के लिये यह न्यूनतम अर्हकारी अंक 40% तथा राज्य के अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग एवं विकलांग श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिये न्यूनतम 30% निर्धारित किया गया है।

प्रश्न – 2 : प्रारंभिक परीक्षा के दौरान प्रश्नों का समाधान किस क्रम में करना चाहिये? क्या किसी विशेष क्रम से लाभ होता है?

उत्तरप्रारंभिक परीक्षा के दौरान प्रश्नों के समाधान के क्रम को लेकर ज्यादातर अभ्यर्थियों में भ्रम की स्थिति बनी रहती है। इस परीक्षा में प्रश्नों को किस क्रम में हल किया जाये? इसका उत्तर सभी के लिये एक नहीं हो सकता। अगर आप सामान्य अध्ययन एवं सीसैट के सभी विषयों में सहज हैं और आपकी गति भी संतोषजनक है तो आप किसी भी क्रम में प्रश्न हल करके सफल हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में बेहतर यही होता है कि जिस क्रम में प्रश्न आते जाएँ, उसी क्रम में उन्हें हल करते हुए बढ़ें। किन्तु अगर आपकी स्थिति इतनी सुरक्षित नहीं है तो आपको प्रश्नों के क्रम पर विचार करना चाहिये। ऐसी स्थिति में आप सबसे पहले, उन प्रश्नों को हल करें जो सबसे कम समय लेते हैं।
यदि आपकी मध्य प्रदेश राज्य विशेष के सन्दर्भ में पकड़ अच्छी है तो आपको इससे सम्बंधित पूछे जाने वाले 20-25 प्रश्नों को पहले हल कर लेना चाहिये क्योंकि उनमें समय कम लगेगा और उत्तर ठीक होने की संभावना भी ज़्यादा होगी। ये 20-25 प्रश्न हल करने के बाद आपकी स्थिति काफी मजबूत हो चुकी होगी। इसके बाद, आप तेज़ी से वे प्रश्न करते चलें जिनमें आप सहज हैं और उन्हें छोड़ते चलें जो आपकी समझ से परे हैं। जिन प्रश्नों के संबंध में आपको लगता है कि वे पर्याप्त समय मिलने पर हल किये जा सकते हैं, उन्हें कोई निशान लगाकर छोड़ते चलें।
सीसैट के प्रश्नपत्र में भी यही प्रक्रिया अपनायी जा सकती है। अर्थात उन प्रश्नों को पहले हल कर लेना चाहिये जिसमें समय कम लगता हो और उत्तर ठीक होने की संभावना ज़्यादा होती है।
एक सुझाव यह भी हो सकता है कि एक ही प्रकार के प्रश्न लगातार करने से बचें। अगर आपको ऐसा लगे तो बीच में आधारभूत संख्यनन के कुछ सवाल कर लें, उसके बाद अन्य प्रश्नों को हल करें। सरल से कठिन प्रश्नों की ओर बढ़ने की यह प्रक्रिया दोनों प्रश्नपत्रों को हल करते समय अपनायी जा सकती है। चूँकि इस परीक्षा में किसी भी प्रकार के ऋणात्मक अंक का प्रावधान नहीं है इसलिये किसी भी प्रश्न को अनुत्तरित न छोड़ें और अंत में शेष बचे हुए प्रश्नों को अनुमान के आधार पर हल करने का प्रयास करें।

प्रश्न – 3 : परीक्षा में समयप्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है, उसके लिये क्या किया जाना चाहिये?

उत्तर :  पिछले प्रश्न के उत्तर में दिये गए सुझावों पर ध्यान दें। उसके अलावा, परीक्षा से पहले मॉक-टेस्ट शृंखला में भाग लें और हर प्रश्नपत्र में परीक्षण करें कि किस वर्ग के प्रश्न कितने समय में हो पाते हैं। ज़्यादा समय लेने वाले प्रश्नों को पहले ही पहचान लेंगे तो परीक्षा में समय बर्बाद नहीं होगा। बार-बार अभ्यास करने से गति बढ़ाई जा सकती है।

प्रश्न – 4 : ‘कटऑफक्या है? इसका निर्धारण कैसे होता है?

उत्तर : ‘कट-ऑफ’ का अर्थ है- वे न्यूनतम अंक जिन्हें प्राप्त कर के कोई उम्मीदवार परीक्षा में सफल हुआ है। एम.पी.पी.एस.सी. परीक्षा में हर वर्ष प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा तथा साक्षात्कार के परिणाम में ‘कट-ऑफ’ तय की जाती है। ‘कट-ऑफ’ या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवार सफल घोषित किये जाते हैं और शेष असफल। आरक्षण व्यवस्था के अंतर्गत यह कट-आॉफ भिन्न-भिन्न वर्गों के उम्मीदवारों के लिए भिन्न-भिन्न होती हैं।
प्रारंभिक परीक्षा में ‘कट-ऑफ’ का निर्धारण प्रथम प्रश्नपत्र सामान्य अध्ययन के अंकों के आधार पर किया जाता है, क्योंकि द्वितीय प्रश्नपत्र सीसैट केवल क्वालिफाइंग होता है।
‘कट-ऑफ’ की प्रकृति स्थिर नहीं है। इसमें हर साल उतार-चढ़ाव होता रहता है। इसका निर्धारण सीटों की संख्या, प्रश्नपत्रों के कठिनाई स्तर तथा उम्मीदवारों की संख्या व गुणवत्ता जैसे कारकों पर निर्भर करता है।  अगर प्रश्नपत्र सरल होंगे, या उम्मीदवारों की संख्या व गुणवत्ता ऊँची होगी तो कट-ऑफ बढ़ जाएगा और विपरीत स्थितियों में अपने आप कम हो जाएगा।
कुछ लोग कहते हैं कि सीसैट के प्रश्नपत्र में क्वालिफाइंग अंक से अधिक अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को वरीयता दी जाती है जबकि कम अंक प्राप्त करने वाले परीक्षा से बाहर हो जाते हैं। वस्तुतः ये दोनों बातें भ्रामक हैं। ऐसी अफवाहों पर आपको ध्यान नहीं देना चाहिये।

प्रश्न – 5 : मैं शुरू से गणित में कमज़ोर हूँ, क्या मैं सीसैट में सफल हो सकता हूँ?

उत्तर : जी हाँ, आप ज़रूर सफल हो सकते हैं। सीसैट के 100 प्रश्नों में से गणित के अधिकतम 15-20 प्रश्न पूछे जाते हैं और उनमें से भी आधे प्रश्न तर्कशक्ति (रीजनिंग) के होते हैं। इन प्रश्नों की प्रकृति साधारण होती है अत: थोड़ा प्रयास करने से हल हो जाते हैं। हो सके तो गणित में कुछ ऐसे टॉपिक्स तैयार कर लीजिये जो आपको समझ में आते हैं और जिनसे प्रायः सवाल भी पूछे जाते हैं। उदाहरण के लिये, अगर आप प्रतिशतता और अनुपात जैसे टॉपिक्स तैयार कर लेंगे तो गणित के 3-4 प्रश्न ठीक हो जाएंगे। ऋणात्मक अंक के निर्धारित न होने से आप कुछ प्रश्न अनुमान से भी सही कर सकते हैं।

प्रश्न – 6 : एम.पी.पी.एस.सी. की प्रारम्भिक परीक्षा मेंमध्य प्रदेश राज्य विशेषके सन्दर्भ में कितने प्रश्न पूछे जाते हैं? इसकी तैयारी कैसे करें?

उत्तरएम.पी.पी.एस.सी. की प्रारम्भिक परीक्षा में ‘मध्य प्रदेश राज्य विशेष’ के सन्दर्भ में लगभग 20-25 प्रश्न पूछे जाते हैं। सामान्य अध्ययन के इस प्रश्नपत्र में कुल 100 प्रश्नों में से 20-25 प्रश्न केवल मध्य प्रदेश राज्य विशेष के सन्दर्भ में पूछा जाना इस विषय की महत्ता को स्वयं ही स्पष्ट करता है। मध्य प्रदेश राज्य विशेष’ के सन्दर्भ में मध्य प्रदेश का इतिहास, कला एवं  संस्कृति तथा भूगोल के साथ-साथ यहाँ की राजनीति एवं अर्थव्यवस्था पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं। इसी प्रकार प्रारम्भिक परीक्षा के पूरे पाठ्यक्रम का मध्य प्रदेश राज्य के सन्दर्भ में अध्ययन करना लाभदायक रहता है। मध्य प्रदेश राज्य विशेष से सम्बंधित प्रश्नों को हल करने में मध्य प्रदेश सरकार के प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘मध्य प्रदेश राज्य विशेष’ या बाजार में उपलब्ध किसी मानक राज्य स्तरीय पुस्तक का अध्ययन करना लाभदायक रहेगा।

प्रश्न – 7 : क्यामॉक टेस्टदेने से प्रारम्भिक परीक्षा में कोई लाभ होता है? अगर हाँ, तो क्या ?

उत्तर

  • प्रारम्भिक परीक्षाओं के लिये मॉक टैस्ट देना अत्यंत लाभदायक सिद्ध होता है। इसका पहला लाभ है कि आप परीक्षा में होने वाले तनाव (Anxiety) पर नियंत्रण करना सीख जाते हैं।
  • दूसरे, अलग-अलग परीक्षाओं में आप यह प्रयोग कर सकते हैं कि प्रश्नों को किस क्रम में करने से आप सबसे बेहतर परिणाम तक पहुँच पा रहे हैं। इन प्रयोगों के आधार पर आप अपनी परीक्षा संबंधी रणनीति निश्चित कर सकते हैं।
  • तीसरे, समय प्रबंधन की क्षमता बेहतर होती है।
  • चौथा लाभ है कि आपको यह अनुमान होता रहता है कि अपने प्रतिस्पर्द्धियों की तुलना में आपका स्तर क्या है?
  • ध्यान रहे कि ये सभी लाभ तभी मिलते हैं अगर आपने मॉक टेस्ट शृंखलाका चयन भली-भाँति सोच-समझकर किया है।

 

प्रश्न – 8 : मैं हिंदी व्याकरण में शुरू से ही अपने को असहज महसूस करता हूँ, क्या मैं एम.पी.पी.एस.सी. की मुख्य परीक्षा में सफल हो पाऊँगा?

उत्तर : जी हाँ, आप ज़रूर सफल हो सकते हैं। मुख्य परीक्षा का पंचम प्रश्नपत्र भाषागत ज्ञान से सम्बंधित है जिसमें ‘सामान्य हिंदी’ के संबंध में कुल 200 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं, जिसका उत्तर आयोग द्वारा दी गयी उत्तर-पुस्तिका में लिखना होता है। इसमें ‘सामान्य हिंदी’ का प्रश्नपत्र स्नातक स्तर का होता है। इसके पाठ्यक्रम में पल्लवन, संधि, समास, संक्षेपण, प्रारूप लेखन, वाक्य प्रयोग, शब्दावली तथा प्रारंभिक व्याकरण, अपठित गद्यांश, प्रतिवेदन एवं अनुवाद शामिल है। सच यह है कि हिंदी व्याकरण के ये प्रश्न काफी आसान होते हैं जिसमें एक सामान्य अभ्यर्थी भी नियमित अभ्यास करके औसत अंक प्राप्त कर सकता है।

प्रश्न – 9 : मैं अंग्रेज़ी में शुरू से ही कमजोर हूँ, क्या मैं एम.पी.पी.एस.सी. की मुख्य परीक्षा में सफल हो पाऊँगा?

उत्तर : जी हाँ, आप ज़रूर सफल हो सकते हैं। मुख्य परीक्षा का पंचम प्रश्नपत्र भाषागत ज्ञान से सम्बंधित है, जिसमें कुल 200 अंक के प्रश्न पूछे जाते हैं, जिसका उत्तर आयोग द्वारा दी गई उत्तर-पुस्तिका में लिखना होता है। इस प्रश्नपत्र में केवल 20 अंकों वाले अनुवाद खंड में अंग्रेजी के ज्ञान की आवश्यकता होती है (शेष 180 अंक के प्रश्न सामान्य हिंदी से सम्बंधित होते हैं)। इसमें दिये गए वाक्य/गद्यांश का अंग्रेजी से हिंदी एवं हिंदी से अंग्रेजी में अनुवाद करना होता है। सच तो यह है कि ये वाक्य/गद्यांश काफी आसान भाषा में दिये गए होते हैं और एक सामान्य विद्यार्थी भी इसका नियमित अभ्यास करके अच्छा अनुवाद कर सकता हैं।

प्रश्न – 10 : क्या सभी प्रश्नों के उत्तर को .एम.आर. शीट पर एक साथ भरना चाहिये या उत्तर का चयन करने के साथसाथ भरते रहना चाहिये?

उत्तर : प्रश्नों को हल करना जितना महत्त्वपूर्ण है उतना ही महत्त्वपूर्ण उसे ओ.एम.आर. शीट पर भरना है। बेहतर होगा कि 4-5 प्रश्नों के उत्तर निकालकर उन्हें शीट पर भरते जाएँ। हर प्रश्न के साथ उसे ओ.एम.आर. शीट पर भरने में ज़्यादा समय खर्च होता है। दूसरी ओर, कभी-कभी ऐसा भी होता है कि कई उम्मीदवार अंत में एक साथ ओ.एम.आर. शीट भरना चाहते हैं पर समय की कमी के कारण उसे भर ही नहीं पाते। ऐसी दुर्घटना से बचने के लिये सही तरीका यही है कि आप 4-5 प्रश्नों के उत्तरों को एक साथ भरते चलें। सीसैट के प्रश्नों में प्रायः एक अनुच्छेद या सूचना के आधार पर 5-6 प्रश्न पूछे जाते हैं। ऐसी स्थिति में वे सभी प्रश्न एक साथ कर लेने चाहिये और साथ ही ओ.एम आर. शीट पर भी उन्हें भर दिया जाना चाहिये। चूँकि गोलों को केवल काले बॉल पॉइंट पेन से भरना होता है, अत: उन्हें भरते समय विशेष सावधानी रखें। व्हाइटनर का प्रयोग कदापि न करें।

प्रश्न – 11 : एम.पी.पी.एस.सी. की मुख्य परीक्षा मेंहिन्दी निबंध लेखनके प्रश्नपत्र की क्या भूमिका है? इसमें अच्छे अंक प्राप्त करने के लिये क्या रणनीति अपनायी जानी चाहिये?

उत्तर : इस मुख्य परीक्षा का षष्ठम प्रश्नपत्र ‘हिन्दी निबंध लेखन’ से सम्बंधित है जिसमें कुल 100 अंकों के तीन निबंध पूछे जाते हैं, जिसका उत्तर आयोग द्वारा दिये गए उत्तर-पुस्तिका में अधिकतम दो घंटे की समय सीमा में लिखना होता है। एम.पी.पी.एस.सी. की मुख्य परीक्षा में कुल 1400 अंकों में हिंदी निबंध के लिये 100 अंकों का निर्धारित होना इस विषय की महत्ता एवं अंतिम चयन में सहभागिता को स्वयं ही स्पष्ट करती है।
निबंध लेखन के माध्यम से किसी व्यक्ति की मौलिकता एवं व्यक्तित्व का परीक्षण किया जाता है। वास्तव में निबंध लेखन एक कला है जिसका विकास एक कुशल मार्गदर्शन में सतत अभ्यास से किया जा सकता हैं। पूर्व में निबंध के लिये बाज़ार में कोई स्तरीय पुस्तक उपलब्ध नहीं होने के कारण इसके लिये अध्ययन सामग्री की कमी थी। लेकिन हाल ही में दृष्टि पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित ‘निबंध-दृष्टि’ पुस्तक ने इस कमी को दूर कर दिया है। इस पुस्तक में लिखे गए निबंध न केवल परीक्षा के दृष्टिकोण से श्रेणी के अनुसार विभाजित हैं बल्कि प्रत्येक निबंध की भाषा-शैली एवं अप्रोच स्तरीय है। इसके अतिरिक्त इसमें अच्छे अंक प्राप्त करने के लिये आप परीक्षा से पूर्व इससे सम्बंधित किसी मॉक टेस्ट शृंखला में सम्मिलित हो सकते हैं। अगर संभव हो तो ‘दृष्टि द विज़न’ संस्थान, में चलायी जाने वाली निबंध की क्लास में भाग ले सकते हैं ।

प्रश्न – 12 : एम.पी.पी.एस.सी. द्वारा आयोजित इस परीक्षा में साक्षात्कार की क्या भूमिका है? इसकी तैयारी कैसे करें?

उत्तर : वर्ष 2014 में एम.पी.पी.एस.सी. की इस परीक्षा में साक्षात्कार के लिये कुल 175 अंक निर्धारित किया गया (पूर्व में यह 250 अंकों का होता था) है। चूँकि मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार में प्राप्त किये गए अंकों के योग के आधार पर ही अंतिम रूप से मेधा सूची (मेरिट लिस्ट) तैयार की जाती है, इसलिये इस परीक्षा में अंतिम चयन एवं पद निर्धारण में साक्षात्कार की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।
साक्षात्कार के दौरान अभ्यर्थियों के व्यक्तित्व का परीक्षण किया जाता है, जिसमें आयोग के सदस्यों द्वारा आयोग में निर्धारित स्थान पर मौखिक प्रश्न पूछे जाते हैं, जिसका उत्तर अभ्यर्थी को मौखिक रूप से देना होता है। एम.पी.पी.एस.सी. के साक्षात्कार में आप सामान्य परिस्थितियों में न्यूनतम 70 अंक तथा अधिकतम 125 अंक प्राप्त कर सकते हैं। यद्यपि साक्षात्कार इस परीक्षा का अंतिम चरण है, लेकिन इसकी तैयारी प्रारंभ से ही शुरू कर देना लाभदायक रहता है। वास्तव में किसी भी अभ्यर्थी के व्यक्तित्व का विकास एक निरंतर प्रक्रिया है। साक्षात्कार में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिये ‘साक्षात्कार की तैयारी’ (interview preparation) शीर्षक का अध्ययन करें।

 

 

परिचय (Introduction):

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एम.पी.पी.एस.सी.), इंदौर द्वारा राज्य विशेष प्रशासन से सम्बंधित विभिन्न पदों सहित अन्य अधीनस्थ सेवाओं का आयोजन किया जाता है। सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले ज्यादातर अभ्यर्थी (विशेषकर हिंदी माध्यम) संघ लोक सेवा आयोग (यू.पी.एस.सी.) की परीक्षा के साथ-साथ इस आयोग द्वारा आयोजित सर्वाधिक प्रतिष्ठित ‘मध्य प्रदेश राज्य सेवा परीक्षा’ में भी सम्मिलित होते हैं। प्रश्नों की प्रकृति एवं प्रक्रिया में अंतर होने के बावजूद यू.पी.एस.सी. के प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा के पाठ्यक्रम के अध्ययन की इस परीक्षा में सार्थक भूमिका होती है, इसलिये सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र इस परीक्षा में भी सफल होते हैं।

आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाएँ:

  • मध्य प्रदेश में राज्य आधारित सरकारी, अर्द्ध-सरकारी, न्यायिक, राज्य वन सेवा एवं अन्य अधीनस्थ सेवाओं का आयोजन मुख्य रूप से मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एम.पी.पी.एस.सी.), इंदौर द्वारा किया जाता है।
  • आयोग द्वारा आयोजित सर्वाधिक लोकप्रिय परीक्षामध्य प्रदेश राज्य सेवा परीक्षा’ एवं ‘मध्य प्रदेश राज्य वन सेवा परीक्षा है। वर्ष 2017 में आवेदन पत्र के प्रारूप में परिवर्तन किया गया जिससे अभ्यर्थी अब इन दोनों परीक्षाओं के लिये कॉमन ऑनलाइन आवेदन पत्र भर सकते हैं , बशर्ते कि वे राज्य वन सेवा परीक्षा में भी बैठने की अर्हता रखते हों।
  • ‘मध्य प्रदेश राज्य सेवा परीक्षा’ के लिये सामान्य शैक्षणिकयोग्यता जहाँ किसी भी विषय के साथ स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण होना है, वहीं ‘मध्य प्रदेश राज्य वन सेवा परीक्षा’ के लिये सामान्यत: विज्ञान विषय के साथ स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। स्नातक के अंतिम वर्ष में अध्ययनरत अभ्यर्थी भी आवेदन पत्र भरने के पात्र (कुछ शर्तों के साथ) होते हैं।
  • ‘मध्य प्रदेश राज्य सेवा परीक्षा’ को प्रायः ‘एम.पी.पी.सी.एस.’ के नाम से भी जाना जाता है।

एम.पी.पी.सी.एस. परीक्षाप्रकृति एवं प्रक्रिया

परीक्षा की प्रकृति

  • आयोग द्वारा आयोजित इस प्रतियोगी परीक्षा में सामान्यत: क्रमवार तीन स्तर सम्मिलित हैं-
    1 : प्रारंभिक परीक्षा – वस्तुनिष्ठ प्रकृति
    2 :  मुख्य परीक्षा – वर्णनात्मक प्रकृति
    3 :  साक्षात्कार – मौखिक
  • वर्ष 2012में आयोग द्वारा एम.पी.पी.एस.सी. की प्रारंभिक परीक्षा एवं वर्ष 2014 में मुख्य परीक्षा की प्रकृति एवं पाठ्यक्रम में महत्त्वपूर्ण बदलाव किया गया। इसका विस्तृत विवरण नीचे दिया गया है।

परीक्षा की प्रक्रिया:

प्रारंभिक परीक्षा की प्रक्रिया:

  • सर्वप्रथम आयोग द्वारा इन परीक्षाओं से सम्बंधित विज्ञप्ति जारी की जाती है उसके पश्चात ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरने की प्रक्रिया शुरू होती है। फॉर्म भरने की प्रक्रिया संबंधी विस्तृत जानकारी ‘विज्ञप्ति’ के अंतर्गत ‘ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?’ शीर्षक में दी गयी होती है।
  • विज्ञप्ति में उक्त परीक्षा से सम्बंधित विभिन्न पहलुओं का विस्तृत विवरण दिया गया होता है। अत: फॉर्म भरने से पहले इसका अध्ययन करना लाभदायक रहता है।
  • फॉर्म भरने की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद सामान्यतः 1 से 2 माह पश्चात् प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की जाती है।
  • यह प्रारंभिक परीक्षा एक ही दिन आयोग द्वारा निर्धारित राज्य के विभिन्न केन्द्रों पर सम्पन्न होती है।
  • आयोग द्वारा आयोजित इस प्रारंभिक परीक्षा की प्रकृति वस्तुनिष्ठ (बहुविकल्पीय) होती है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक प्रश्न के लिये दिये गए चार संभावित विकल्पों (a, b, c और d) में से एक सही विकल्प का चयन करना होता है।
  • प्रश्न से सम्बंधित इस चयनित विकल्प को आयोग द्वारा दिये गए ओ.एम.आर. शीट में उसके सम्मुख दिये गए सम्बंधित गोले (सर्किल) में उचित स्थान परकेवल काले बॉल पॉइंट पेन से भरना होता है।
  • एम.पी.पी.एस.सी. द्वारा आयोजित इस परीक्षा में गलत उत्तर के लिये किसी भी प्रकार कीनेगेटिव मार्किंग का प्रावधान नहीं है।
  • यदि किसी प्रश्न का अभ्यर्थी एक से अधिक उत्तर देता हैं, तो उस उत्तर को गलत माना जाएगा।
  • प्रश्नपत्र दो भाषाओं (हिंदी एवं अंग्रेजी) में दिये गए होते हैं, अभ्यर्थी इन दोनों में से किसी भी भाषा में अपनी सहजता के आधार पर प्रश्नों का उत्तर दे सकते हैं।
  • आयोग द्वारावर्ष 2012 में इस प्रारंभिक परीक्षा की प्रकृति में बदलाव किया गया जिसके अनुसार, द्वितीय प्रश्नपत्र में पूछे जाने वाले वैकल्पिक विषय (वस्तुनिष्ठ) के स्थान पर ‘सामान्य अभिरुचि परीक्षण’ (जनरल एप्टिट्यूड टेस्ट) के प्रश्नपत्र को अपनाया गया।
  • वर्तमान में आयोग की इस प्रारंभिक परीक्षा में दो अनिवार्य प्रश्नपत्र (क्रमशः ‘सामान्य अध्ययन’ एवं ‘सामान्य अभिरुचि परीक्षण’) पूछे जाते हैं, जिसकी परीक्षा एक ही दिन दो विभिन्न पालियों में दो-दो घंटे की समयावधि में सम्पन्न होती है।  ‘सामान्य अभिरुचि परीक्षण’ के प्रश्नपत्र को ‘सीसैट’ (सिविल सर्विस एप्टिट्यूड टेस्ट) के नाम से भी से जाना जाता है।
  • प्रथम प्रश्नपत्रसामान्य अध्ययन का है, जिसमें प्रश्नों की कुल संख्या 100 एवं अधिकतम अंक 200 निर्धारित हैं।
  • द्वितीय प्रश्नपत्रसामान्य अभिरुचि परीक्षणका है, जिसमें प्रश्नों की कुल संख्या 100 एवं अधिकतम अंक 200 निर्धारित हैं।
  • वर्ष 2017 से ‘मध्य प्रदेश राज्य सेवा परीक्षा’ एवं  ‘मध्य प्रदेश राज्य वन सेवा परीक्षा’ के लिये एक ही (कॉमन) प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की जाएगी जबकि मुख्य परीक्षा पूर्व की भाँति अलग-अलग आयोजित होगी।
  • मध्य प्रदेश राज्य सेवा परीक्षा’ के लिये यह प्रारंभिक परीक्षा 200 अंकों की होती है क्योंकि इसमें ‘सामान्य अभिरुचि परीक्षण’ के प्रश्नपत्र में प्राप्त अंकों को कट-ऑफ निर्धारण में नहीं जोड़ा जाता है, जबकि ‘मध्य प्रदेश राज्य वन सेवा परीक्षा के लिये यह परीक्षा कुल 400 अंकों की होती है क्योंकि इसमें ‘सामान्य अभिरुचि परीक्षण’ के प्रश्नपत्र में प्राप्त अंकों को कट-ऑफ निर्धारण में जोड़ा जाता है।
  • वर्ष 2015से आयोग ने ‘मध्य प्रदेश राज्य सेवा परीक्षा’ के इस चरण में ‘सामान्य अभिरुचि परीक्षण’ के प्रश्नपत्र को केवल क्वालिफाइंग कर दिया है। अर्थात इस प्रश्नपत्र में आयोग द्वारा निर्धारित क्वालिफाइंग अंक प्राप्त करने वाले तथा सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्र में निर्धारित कट-ऑफ स्तर को प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी ही मुख्य परीक्षा के लिये सफल घोषित किये जाएंगे।
  • प्रारंभिकपरीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये सामान्यत: 75–80% अंक प्राप्त करने की आवश्यकता होती है, किन्तु कभी-कभी प्रश्नों के कठिनाई स्तर को देखते हुए यह प्रतिशत कम भी हो सकता है।
  • प्रारंभिक परीक्षा की प्रकृति क्वालिफाइंग होती है। इसमें प्राप्त अंकों को मुख्य परीक्षा या साक्षात्कार के अंकों के साथ नहीं जोड़ा जाता है।

नोट

  • मुख्य परीक्षा की पात्रता के लिये अभ्यर्थी को प्रारंभिक परीक्षा के प्रत्येक प्रश्नपत्र मेंन्यूनतम 40% अंक प्राप्त करना अनिवार्य है।
  • राज्य के अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/ अन्य पिछड़ा वर्ग एवं विकलांग श्रेणी के अभ्यर्थियों के लियेन्यूनतम अर्हकारी अंक 30% निर्धारित किया गया है।

मुख्य परीक्षा की प्रक्रिया:

  • मुख्य परीक्षा में प्रवेश पाने वाले अभ्यर्थियों की संख्या विज्ञापन में प्रदर्शित की गई सेवा तथा पदों के विभिन्न प्रवर्गों से भरी जाने वाली कुल रिक्तियों की संख्या से15 गुना होगी तथा समान अंक प्राप्त (वर्गवार/श्रेणीवार) अभ्यर्थियों को भी मुख्य परीक्षा हेतु अर्ह घोषित किया जाएगा।
  • प्रारंभिक परीक्षा में सफल हुए अभ्यर्थियों के लिये मुख्य परीक्षा का आयोजन आयोग द्वारा निर्धारित राज्य के विभिन्न केन्द्रों पर किया जाता है।
  • वर्ष 2014में एम.पी.पी.एस.सी. की इस मुख्य परीक्षा के पाठ्यक्रम में आमूलचूल परिवर्तन किया गया। इससे पूर्व इस मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन के साथ-साथ दो वैकल्पिक विषयों के प्रश्नपत्र भी पूछे जाते थे, जिन्हें अब हटा दिया गया है।
  • अब इस मुख्य परीक्षा में: अनिवार्य प्रश्नपत्र  [सामान्य अध्ययन प्रथम प्रश्नपत्र,  सामान्य अध्ययन द्वितीय प्रश्नपत्र,  सामान्य अध्ययन तृतीय प्रश्नपत्र, सामान्य अध्ययन चतुर्थ प्रश्नपत्र, सामान्य हिंदी (पंचम प्रश्नपत्र) एवं ‘हिन्दी निबंध लेखन’ (षष्ठम प्रश्नपत्र)] पूछे जाएंगे। इसकी विस्तृत जानकारी के अंतर्गत ‘पाठ्यक्रम’ शीर्षक में दी गई है।
  • मुख्य परीक्षा की प्रकृति वर्णनात्मक/विश्लेषणात्मक होगी, इसमें प्रश्नों का स्वरुप अत्यंत लघु, लघु एवं दीर्घउत्तरीय या निबंधात्मक प्रकृति का होगा। इन सभी प्रश्नों के उत्तर को आयोग द्वारा दी गयी उत्तर-पुस्तिका में अधिकतमतीन घंटे (षष्ठम प्रश्नपत्र ‘निबंध लेखन’ के लिए दो घंटे की समय सीमा) की समय सीमा में लिखना होता है।
  • मुख्य परीक्षा कुल1400 अंकों की होती है।
  • सामान्य अध्ययन के क्रमशः तीन प्रश्नपत्र (सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र, सामान्य अध्ययन द्वितीय प्रश्नपत्र एवं सामान्य अध्ययन तृतीय प्रश्नपत्र) में प्रत्येक के लिये अधिकतम 300-300 अंक निर्धारित हैं।
  • सामान्य अध्ययन चतुर्थ प्रश्नपत्र एवं सामान्य हिंदी (पंचम प्रश्नपत्र) के लिये 200-200 अंक निर्धारित हैं।
  • ‘हिन्दी निबंध लेखन’ (षष्ठम प्रश्नपत्र) के लिये 100 अंक निर्धारित हैं।
  • सामान्य हिंदी तथा‘हिन्दी निबंध लेखन’ के प्रश्नपत्र को छोड़कर सामान्य अध्ययन के चारों प्रश्नपत्र हिंदी तथा अंग्रेजी माध्यम में उपलब्ध होंगे। अभ्यर्थी केवल उसी भाषा में परीक्षा दे सकेगा जो उसने अपने मुख्य परीक्षा के आवेदन पत्र में माध्यम के रूप में चयनित किया है।
  • सामान्य अध्ययन के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय प्रश्नपत्र दो खंडों (‘अ’ एवं ‘ब’) में विभाजित रहेंगे। प्रत्येक खंड 150 अंकों का होगा तथा  प्रत्येक खंड में 15 अति लघु उत्तरीय, 10 लघु उत्तरीय एवं 3 दीर्घउत्तरीय या निबंधात्मक प्रकृति के प्रश्न रहेंगे। आयोग द्वारा प्रश्नों की संख्या में आवश्यकतानुसार परिवर्तन किया जा सकता है।
  • चतुर्थ प्रश्नपत्र में एक ही खंड रहेगा जिसमें 15 लघु स्तरीय तथा 15 लघु स्तरीय संक्षिप्तटिप्पणियाँ सम्मिलित रहेंगी तथा एक या दो केस स्टडी से सम्बंधित लघु स्वरुप के प्रश्न पूछे जाएंगे। आयोग द्वारा प्रश्नों की संख्या में आवश्यकतानुसार परिवर्तन किया जा सकता है।
  • पंचम प्रश्नपत्र ‘सामान्य हिंदी’ का होगा। इसका उत्तर अभ्यर्थियों को अनिवार्य रूप से हिंदी में देना होगा। इसमें 20 लघु स्तरीय, एक गद्यांश का हिंदी से अंग्रेजी में अनुवाद तथा 8 लघु स्तरीय संक्षिप्तटिप्पणियाँ सम्मिलित रहेंगी। आयोग द्वारा प्रश्नों की संख्या में आवश्यकतानुसार परिवर्तन किया जा सकता है।
  • षष्ठम प्रश्नपत्र ‘हिन्दी निबंध लेखन’ का होगा। यह प्रश्नपत्र तीन खण्डों में विभाजित होगा। प्रत्येक खंड से एक निबंध लिखना होगा।
  • परीक्षा के इस चरण में सफलता प्राप्त करने के लिये सामान्यत: 60-65% अंक प्राप्त करने की आवश्यकता होती है। हालाँकि पाठ्यक्रम में बदलाव के कारण यह प्रतिशत कुछ कम या ज़्यादा भी हो सकता है।
  • पूर्व की भाँति ही इन प्रश्नपत्रों में प्राप्त किये गए अंक मेधा सूची में जोड़े जाएंगे।
  • परीक्षा के सभी विषयों में कम से कम शब्दों में की गई संगठित, सूक्ष्म और सशक्त अभिव्यक्ति को श्रेय मिलेगा।

 

 

साक्षात्कार की प्रक्रिया:

  • मुख्य परीक्षा में चयनित अभ्यर्थियों को सामान्यत: एक माह पश्चात् आयोग के समक्ष साक्षात्कार के लिये उपस्थित होना होता है।
  • साक्षात्कार के दौरान अभ्यर्थियों के व्यक्तित्व का परीक्षण किया जाता है। इसमें आयोग के सदस्यों द्वारा आयोग में निर्धारित स्थान पर मौखिक प्रश्न पूछे जाते हैं, जिसका उत्तर अभ्यर्थी को मौखिक रूप से देना होता है। यह प्रक्रिया अभ्यर्थियों की संख्या के अनुसार एक से अधिक दिनों तक चलती है।
  • वर्ष 2014में एम.पी.पी.एस.सी. की इस परीक्षा में साक्षात्कार के लिये कुल 175 अंक निर्धारित किया गया (पूर्व में यह 250 अंकों का होता था)।
  • मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार में प्राप्त किये गए अंकों के योग के आधार पर अंतिम रूप से मेधा सूची (मेरिट लिस्ट) तैयार की जाती है।
  • सम्पूर्ण साक्षात्कार समाप्त होने के सामान्यत: एक सप्ताह पश्चात अन्तिम रूप से चयनित अभ्यर्थियों की सूची जारी की जाती है।
  • उपरोक्त वर्णित प्रत्येक प्रश्नपत्र में 40 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य है। अनुसूचित जाति / जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा नि:शक्त श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम अर्हकारी अंक 30 प्रतिशत होगे।

 

 

रणनीति

रणनीति की आवश्यकता क्यों

  • मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एम.पी.पी.एस.सी.), इंदौर द्वारा आयोजित परीक्षा में सफलता सुनिश्चित करने के लिये उसकी प्रकृति के अनुरूप उचित एवं गतिशील रणनीति बनाने की आवश्यकता है।
  • यह वह प्रथम प्रक्रिया है जिससे आप की आधी सफलता प्रारम्भ में ही सुनिश्चित हो जाती है।
  • ध्यातव्य है कि मध्य प्रदेश राज्य सेवा परीक्षा सामान्यत: तीन चरणों (प्रारंभिक, मुख्य एवं साक्षात्कार) में आयोजित की जाती है, जिसमें प्रत्येक अगले चरण में पहुँचने के लिये उससे पूर्व के चरण में सफल होना आवश्यक है।
  • इन तीनों चरणों की परीक्षा की प्रकृति एक दूसरे से भिन्न होती है। अत: प्रत्येक चरण में सफलता सुनिश्चित करने के लिये  अलग-अलग रणनीति बनाने की आवश्यकता है।

प्रारम्भिक परीक्षा की रणनीति :

  • विगत 5 से 10 वर्षों में प्रारम्भिक परीक्षा में पूछे गये प्रश्नों का सूक्ष्म अवलोकन करें और उन बिंदुओं तथा शीर्षकों पर ज्यादा ध्यान दें जिससे विगत वर्षों में प्रश्न पूछने की प्रवृत्ति ज्यादा रही है।
  • प्रथम प्रश्नपत्र ‘सामान्य अध्ययन’ के पाठ्यक्रम में सामान्य विज्ञान एवं पर्यावरण, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय महत्त्व की वर्तमान घटनाएँ, भारत का इतिहास एवं स्वतंत्र भारत, भारत का भूगोल एवं विश्व की सामान्य भौगोलिक जानकारी, भारतीय राजनीति एवं अर्थव्यवस्था, खेलकूद, मध्य प्रदेश का भूगोल, इतिहास एवं संस्कृति, मध्य प्रदेश की राजनीति एवं अर्थव्यवस्था, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी तथा कुछ अधिनियम जैसे- अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण अधिनियम) 1989, नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955 एवं मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 सम्मिलित हैं। इसकी विस्तृत जानकारी ‘पाठ्यक्रम’ शीर्षक में दी गई है।
  • इस परीक्षा के पाठ्यक्रम और विगत वर्षों में पूछे गये प्रश्नों की प्रकृति का सुक्ष्म अवलोकन करने पर ज्ञात होता है कि इसके कुछ खण्डों की गहरी अवधारणात्मक एवं तथ्यात्मक जानकारी अनिवार्य है। जैसे- ‘गदर पार्टी’ की स्थापना किसने की थी?  कंप्यूटर के किस भाग में स्मृतियों का संकलन होता है? मध्य प्रदेश का सबसे ऊँचा जलप्रपात कौन-सा है? इत्यादि ।
  • इन प्रश्नों को याद रखने और हल करने का सबसे आसान तरीका है कि विषय की तथ्यात्मक जानकारी से सम्बंधित संक्षिप्त नोट्स बना लिया जाए और उसका नियमित अध्ययन किया जाए जैसे– एक प्रश्न पूछा गया कि भारतीय संविधान में ‘संघवाद’ की अवधारणा किस देश से ली गई है? तो आप को भारतीय संविधान में विभिन्न देशों से ली गई प्रमुख अवधारणाओं की एक लिस्ट तैयार कर लेनी चाहिये ।
  • इस परीक्षा में पूछे जाने वाले विभिन्न अधिनियमों तथा संस्थाओं इत्यादि से सम्बंधित प्रश्नों के लिये भारत सरकार के प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित ‘भारत’ (इण्डिया इयर बुक) का बाज़ार में उपलब्ध संक्षिप्त विवरण तथा दृष्टि वेबसाइट पर उपलब्ध सम्बंधित पाठ्य सामग्री एवं इंटरनेट की सहायता ली जा सकती है।
  • इस परीक्षा में खेल कूद, कंप्यूटर, समसामयिक घटनाओं एवं राज्य विशेष से पूछे जाने वाले प्रश्नों की आवृति ज्यादा होती है, अत: इनका नियमित रूप से गंभीर अध्ययन करना चाहिये।
  • ‘विज्ञान’ एवं कंप्यूटर’ आधारित प्रश्नों को हल करने के लिये ‘सामान्य विज्ञान-लूसेंट’ की किताब सहायक हो सकती है। साथ ही दृष्टि प्रकाशन द्वारा प्रकाशित मानक मासिक पत्रिका ‘दृष्टि करेंट अफेयर्स टुडे’ के ‘विज्ञान विशेषांक’ का अध्ययन करना अभ्यर्थियों के लिये लाभदायक रहेगा।
  • ‘समसामयिक घटनाओं’ एवं ‘खेलकूद’ के प्रश्नों की प्रकृति और संख्या को ध्यान में रखते हुए आप नियमित रूप से किसी दैनिक अख़बार जैसे- द हिन्दू , दैनिक जागरण (राष्ट्रीय संस्करण) इत्यादि के साथ-साथ दृष्टि वेबसाइट पर उपलब्ध करेंट अफेयर्स के बिन्दुओं का अध्ययन कर सकते हैं। इसके अलावा इस खंड की तैयारी के लिये मानक मासिक पत्रिका ‘दृष्टि करेंट अफेयर्स टुडे’  का अध्ययन करना लाभदायक सिद्ध होगा।
  • राज्य विशेष से सम्बंधित प्रश्नों को हल करने में मध्य प्रदेश सरकार के प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘मध्य प्रदेश राज्य विशेष’ या बाजार में उपलब्ध किसी मानक राज्य स्तरीय पुस्तक का अध्ययन करना लाभदायक रहेगा।
  • द्वितीय प्रश्नपत्र ‘सामान्य अभिरुचि परीक्षण’ (सीसैट) केवल क्वालिफाइंग होता है। इसमें प्रश्नों की प्रकृति मैट्रिक स्तर की होती है। इसकी विस्तृत जानकारी ‘पाठ्यक्रम’ शीर्षक में दी गई है।
  • सामान्य मानसिक योग्यता से सम्बंधित प्रश्नों का अभ्यास पूर्व में पूछे गए प्रश्नों को विभिन्न खंडों में वर्गीकृत करके किया जा सकता है।
  • एम.पी.पी.एस.सी. की प्रारंभिक परीक्षा मेंनेगेटिव मार्किंग का प्रावधान नहीं होने के कारण किसी भी प्रश्न को अनुत्तरित न छोड़ें  और अंत में शेष बचे हुए प्रश्नों को अनुमान के आधार पर हल करने का प्रयास करें।
  • प्रारम्भिक परीक्षा तिथि से सामान्यत: 15-20 दिन पूर्व प्रैक्टिस पेपर्स एवं विगत वर्षों में प्रारम्भिक परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों  को निर्धारित समय सीमा (सामान्यत: दो घंटे) के अंदर हल करने का प्रयास करना लाभदायक होता है। इन प्रश्नों को हल करने से जहाँ विषय की समझ विकसित होती है, वहीं इन परीक्षाओं में दोहराव (रिपीट) वाले प्रश्नों को हल करना आसान हो जाता है।

 

 

मुख्य परीक्षा की रणनीति:

  • एम.पी.पी.एस.सी. की मुख्य परीक्षा की प्रकृति वर्णनात्मक/विश्लेषणात्मक होने के कारण इसकी तैयारी की रणनीति प्रारंभिक परीक्षा से भिन्न होती है।
  • प्रारंभिक परीक्षा की प्रकृति जहाँ क्वालिफाइंग होती है, वहीं मुख्य परीक्षा में प्राप्त अंकों को अंतिम मेधा सूची में जोड़ा जाता है। अत: परीक्षा का यह चरण अत्यंत महत्त्वपूर्ण एवं काफी हद तक निर्णायक होता है।
  • सामान्य अध्ययन के प्रथम प्रश्नपत्र में ‘इतिहास एवं  संस्कृति’, ‘भूगोल’, ‘जल प्रबंधन’ तथा ‘आपदा एवं आपदा प्रबंधन’ से सम्बंधित टॉपिक्स सम्मिलित हैं, जिनका अभ्यर्थियों को मानक पुस्तकों के साथ अध्ययन करना एवं मुख्य परीक्षा के प्रश्नों की प्रकृति के अनुरूप संक्षिप्त बिन्दुवार नोट्स बनाना लाभदायक रहता है।
  • इतिहास विषय के अंतर्गत इस परीक्षा में विश्व के इतिहास को भी शामिल किया गया है, जिसका गहन अवलोकन एवं प्रश्नों की प्रकृति के अनुरूप उत्तर-लेखन ही अच्छे अंक दिलाने में सहायक होगा।
  • ‘आपदा एवं आपदा प्रबंधन’ विषय पर ‘दृष्टि करेंट अफेयर्स टुडे’ के आपदा प्रबंधन विशेषांक की सामग्री परीक्षोपयोगी है।
  • सामान्य अध्ययन द्वितीय प्रश्नपत्र में ‘संविधान, शासन की राजनैतिक एवं प्रशासनिक संरचना’, ‘बाह्य एवं आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे’, ‘सामाजिक एवं महत्त्वपूर्ण विधान’, ‘सामाजिक क्षेत्र, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं सशक्तिकरण’, ‘शिक्षण प्रणाली’, ‘मानव संसाधन विकास’, ‘कल्याणकारी कार्यक्रम’, ‘लोक सेवाएँ’, ‘लोक व्यय एवं लेखा’ तथा ‘अन्तर्राष्ट्रीय संगठन’ सम्मिलित हैं।
  • इस प्रश्नपत्र के पाठ्यक्रम को मानक पुस्तकों तथा इंटरनेट की सहायता से तैयार किया जा सकता है। जैसे- भारतीय राजव्यवस्था एवं प्रशासन तथा सामाजिक समस्याओं पर मानक पुस्तकों का अध्ययन किया जा सकता है। अन्य पाठ्यक्रम के लिये इण्डिया इयर बुक (भारत) तथा इंटरनेट की सहायता ली जा सकती है।
  • सामान्य अध्ययन तृतीय प्रश्नपत्र में ‘विज्ञान एवं तकनीकी’, ‘तर्क एवं आँकड़ों की व्याख्या’, ‘विकासशील तकनीकी’, ‘ऊर्जा’, ‘पर्यावरण एवं धारणीय विकास’ एवं ‘भारतीय अर्थव्यवस्था’ शामिल हैं।
  • इस पाठ्यक्रम की मानक अध्ययन सामग्री ‘दृष्टि द विज़न संस्थान’, दिल्ली के ‘डिस्टेंस लर्निंग प्रोग्राम’ (DLP) से प्राप्त की जा सकती है, जो इस प्रश्नपत्र एवं अन्य प्रश्नपत्रों से संबंधित पाठ्यक्रम की विस्तारपूर्वक अध्ययन-सामग्री की उपलब्धिता सुनिश्चित करेगा।
  • ‘तर्क एवं आँकड़ों की व्याख्या’ के लिये अंकगणित के अवधारणात्मक पहलुओं के साथ-साथ सांख्यिकी से सम्बंधित अवधारणाओं एवं प्रश्नों का अभ्यास अत्यंत आवश्यक है।
  • सामान्य अध्ययन का चतुर्थ प्रश्नपत्र मानवीय आवश्यकताओं एवं अभिप्रेरणाओं से संबंधित है। इसकी विस्तृत जानकारी ‘पाठ्यक्रम’ शीर्षक में दी गई है।
  • इस प्रश्नपत्र के पाठ्यक्रम की सामग्री के लिये दृष्टि प्रकाशन द्वारा प्रकाशित ‘दृष्टि करेंट अफेयर्स टुडे’ का‘एथिक्स विशेषांक’ अभ्यर्थियों के लिये विशेष उपयोगी रहेगा। साथ ही सभी प्रश्नपत्रों से संबंधित प्रश्नों का उत्तर-लेखन अभ्यास, परीक्षा में प्रभावशाली प्रस्तुतिकरण  में सहायक रहेगा।
  • पंचम प्रश्नपत्र ‘सामान्य हिंदी’ से संबंधित है। इस प्रश्नपत्र का उद्देश्य अभ्यर्थी की भाषागत कौशल की जाँच करना है। इसके पाठ्यक्रम की विस्तृत जानकारी ‘विज्ञप्ति का संक्षिप्त विवरण’ के अंतर्गत ‘पाठ्यक्रम’ शीर्षक में दी गई है।
  • इस प्रश्नपत्र का स्तर स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण छात्रों के समकक्ष होगा। इसके लिये हिंदी की स्तरीय पुस्तक जैसे– वासुदेवनंदन, हरदेव बाहरी द्वारा लिखित पुस्तकों का गहराई से अध्ययन एवं उपरोक्त विषयों पर निरंतर लेखन कार्य करना लाभदायक रहेगा।
  • षष्ठम प्रश्नपत्र ‘हिन्दी निबंध लेखन’ का होगा। इसके अंतर्गत अभ्यर्थियों को तीन निबंध लिखने होंगे।

प्रथम निबंध (लगभग 1000 शब्दों में) के लिये 50 अंक, द्वितीय निबंध (लगभग 250 शब्दों में) के लिये 25 अंक एवं तृतीय निबंध (लगभग 250 शब्दों में) के लिये 25 अंक निर्धारित किया गया है।

  • निबंध को रोचक बनाने के लिये श्लोक, कविता, उद्धरण, महापुरुषों के कथन इत्यादि का प्रयोग किया जा सकता है। निबंध की तैयारी के लिये दृष्टि प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘निबंध-दृष्टि’ का अध्ययन करना लाभदयक रहेगा।
  • उपरोक्त से स्पष्ट है कि मुख्य परीक्षा के समस्त पाठ्यक्रम का मध्य प्रदेश राज्य के सन्दर्भ में अध्ययन किया जाना लाभदायक रहेगा।
  • परीक्षा के इस चरण में सफलता प्राप्त करने के लिये सामान्यत: 60-65% अंक प्राप्त करने की आवश्यकता होती है। हालाँकि पाठ्यक्रम में बदलाव के कारण यह प्रतिशत कुछ कम भी हो सकता है।
  • परीक्षा के सभी विषयों में कम से कम शब्दों में की गई संगठित, सूक्ष्म और सशक्त अभिव्यक्ति को श्रेय मिलेगा।
  • विदित है कि वर्णनात्मक प्रकृति वाले प्रश्नपत्रों के उत्तर को उत्तर-पुस्तिका में लिखना होता है, अत: ऐसे प्रश्नों के उत्तर लिखते समय लेखन-शैली एवं तारतम्यता के साथ-साथ समय प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिये।
  • लेखन शैली एवं तारतम्यता का विकास निरंतर अभ्यास से आता है, जिसके लिये विषय की व्यापक समझ अनिवार्य है।

 

 

 

साक्षात्कार की रणनीति:

  • मुख्य परीक्षा में चयनित अभ्यर्थियों (सामान्यत: विज्ञप्ति में वर्णित कुल रिक्तियों की संख्या का 3 गुना) को सामान्यत: एक माह पश्चात आयोग के समक्ष साक्षात्कार के लिये उपस्थित होना होता है।
  • साक्षात्कार किसी भी परीक्षा का अंतिम एवं महत्त्वपूर्ण चरण होता है।
  • अंकों की दृष्टि से कम लेकिन अंतिम चयन एवं पद निर्धारण में इसका विशेष योगदान होता है।
  • साक्षात्कार के दौरान अभ्यर्थियों के व्यक्तित्व का परीक्षण किया जाता है, जिसमें आयोग के सदस्यों द्वारा आयोग में निर्धारित स्थान पर मौखिक प्रश्न पूछे जाते हैं जिसका उत्तर अभ्यर्थी को मौखिक रूप से देना होता है।
  • वर्ष 2014 में एम.पी.पी.एस.सी. की इस परीक्षा में साक्षात्कार के लिये कुल 175 अंक निर्धारित किया गया (पूर्व में यह 250 अंकों का होता था)।
  • आपका अंतिम चयन मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार में प्राप्त किये गए अंकों के योग के आधार पर तैयार किये गए मेधा सूची के आधार पर होता है।
  • साक्षात्कार में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिये ‘साक्षात्कार की तैयारी’ (interview preparation) शीर्षक का अध्ययन करें।

 

 

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग – पाठ्यक्रम

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