उपलब्ध नोट्स

यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा अध्ययन सामग्री

Exam Exam year Stream Book Fee Total Payable fee
UPSC Pre 2019 Graduate in any Stream 7500/- 7500/-

इस अध्ययन सामग्री के लाभ:

  • यह अध्ययन सामग्री संघ लोक सेवा आयोग के पाठ्यक्रम को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
  • जैसा कि आप जानते हैं हमारा ध्येय इस कार्यक्रम के माध्यम से हर उस अभ्यर्थी को लाभ प्रदान करना है, जो किसी विवशता के कारण कोचिंग कक्षाएँ ज्वॉइन करने में असमर्थ है, लेकिन सिविल सेवक बनने का सपना संजोए हुए है।
  • इस सामग्री के निर्माण में केवल आधिकारिक और विश्वसनीय तथ्यों एवं आँकड़ों का ही उपयोग किया गया है।
  • इस अध्ययन सामग्री को सहज और सरल भाषा में तैयार किया गया है जो समझने में बेहद आसान है और लंबे समय तक याद रखी जा सकती है।
  • इस सामग्री में प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों के पाठ्यक्रम को शामिल किया गया है।
  • परीक्षा से कुछ समय पूर्व रिवीज़न करने हेतु क्विक रिवीज़न पॉइंट शामिल किये गए हैं।
  • प्रत्येक अध्याय के अंत में उस खंड से विगत 17 वर्षों के दौरान पूछे गए प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्नों (उत्तर सहित) एवं विगत 4 वर्षों में आए मुख्य परीक्षा के प्रश्नों का समावेश किया गया है।
  • कौटिल्य संस्थान सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के बीच लोकप्रिय और भरोसेमंद संस्थान है। अतः आप निश्चिंत होकर हमारी अध्ययन सामग्री का लाभ उठा सकते हैं।
  • हमारे पास पेशेवर प्रबंधन के साथ ही प्रत्येक विषय के लिये प्रतिभावान और अनुभवी कंटेंट लेखकों की टीम है, जो पूरी लगन के साथ आपके लिये गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री तैयार करती है।

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एमपीपीएससी प्रारंभिक परीक्षा नोट्स

Exam Exam year Stream Book Fee Total Payable fee
MPPSC Pre 2019 Graduate in any Stream 7500/- 6000/- 6000/-

इस अध्ययन सामग्री के लाभ:

  • यह अध्ययन सामग्री मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के पाठ्यक्रम को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
  • जैसा कि आप जानते हैं हमारा ध्येय इस कार्यक्रम के माध्यम से हर उस अभ्यर्थी को लाभ प्रदान करना है, जो किसी विवशता के कारण कोचिंग कक्षाएँ ज्वॉइन करने में असमर्थ है, लेकिन सिविल सेवक बनने का सपना संजोए हुए है।
  • इस सामग्री के निर्माण में केवल आधिकारिक और विश्वसनीय तथ्यों एवं आँकड़ों का ही उपयोग किया गया है।
  • इस अध्ययन सामग्री को सहज और सरल भाषा में तैयार किया गया है जो समझने में बेहद आसान है और लंबे समय तक याद रखी जा सकती है।
  • इस सामग्री में प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों के पाठ्यक्रम को शामिल किया गया है।
  • परीक्षा से कुछ समय पूर्व रिवीज़न करने हेतु क्विक रिवीज़न पॉइंट शामिल किये गए हैं।
  • प्रत्येक अध्याय के अंत में उस खंड से विगत 17 वर्षों के दौरान पूछे गए प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्नों (उत्तर सहित) एवं विगत 4 वर्षों में आए मुख्य परीक्षा के प्रश्नों का समावेश किया गया है।
  • दृष्टि संस्थान सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के बीच लोकप्रिय और भरोसेमंद संस्थान है। अतः आप निश्चिंत होकर हमारी अध्ययन सामग्री का लाभ उठा सकते हैं।
  • हमारे पास पेशेवर प्रबंधन के साथ ही प्रत्येक विषय के लिये प्रतिभावान और अनुभवी कंटेंट लेखकों की टीम है, जो पूरी लगन के साथ आपके लिये गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री तैयार करती है।

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 एमपपीएससी मुख्य परीक्षा अध्ययन सामग्री

Exam Exam year Stream Book Fee Total Payable fee
MPPSC Mains 2019 Graduate in any Stream 20000/- 20000/-

मुख्य बिंदु:

  • यह अध्ययन सामग्री मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की मुख्य परीक्षा के पाठ्यक्रम को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
  • जैसा कि आप जानते हैं हमारा ध्येय इस कार्यक्रम के माध्यम से हर उस अभ्यर्थी को लाभ प्रदान करना है, जो किसी विवशता के कारण कोचिंग कक्षाएँ ज्वॉइन करने में असमर्थ है, लेकिन सिविल सेवक बनने का सपना संजोए हुए है।
  • इस सामग्री के निर्माण में केवल आधिकारिक और विश्वसनीय तथ्यों एवं आँकड़ों का ही उपयोग किया गया है।
  • इस अध्ययन सामग्री को सहज और सरल भाषा में तैयार किया गया है जो समझने में बेहद आसान है और लंबे समय तक याद रखी जा सकती है।
  • इस सामग्री में प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों के पाठ्यक्रम को शामिल किया गया है।
  • परीक्षा से कुछ समय पूर्व रिवीज़न करने हेतु क्विक रिवीज़न पॉइंट शामिल किये गए हैं।
  • प्रत्येक अध्याय के अंत में उस खंड से विगत 17 वर्षों के दौरान पूछे गए प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्नों (उत्तर सहित) एवं विगत 4 वर्षों में आए मुख्य परीक्षा के प्रश्नों का समावेश किया गया है।
  • दृष्टि संस्थान सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के बीच लोकप्रिय और भरोसेमंद संस्थान है। अतः आप निश्चिंत होकर हमारी अध्ययन सामग्री का लाभ उठा सकते हैं।
  • हमारे पास पेशेवर प्रबंधन के साथ ही प्रत्येक विषय के लिये प्रतिभावान और अनुभवी कंटेंट लेखकों की टीम है, जो पूरी लगन के साथ आपके लिये गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री तैयार करती है।

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 एमपीएसआई परीक्षा नोट्स

Exam Exam year Stream Book Fee Total Payable fee
MPSI 2019 Graduate in any Stream 5000/- 5000/-

Key Features:

  • यह अध्ययन सामग्री एमपीएसआई परीक्षा के पाठ्यक्रम को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
  • जैसा कि आप जानते हैं हमारा ध्येय इस कार्यक्रम के माध्यम से हर उस अभ्यर्थी को लाभ प्रदान करना है, जो किसी विवशता के कारण कोचिंग कक्षाएँ ज्वॉइन करने में असमर्थ है, लेकिन सिविल सेवक बनने का सपना संजोए हुए है।
  • इस सामग्री के निर्माण में केवल आधिकारिक और विश्वसनीय तथ्यों एवं आँकड़ों का ही उपयोग किया गया है।
  • इस अध्ययन सामग्री को सहज और सरल भाषा में तैयार किया गया है जो समझने में बेहद आसान है और लंबे समय तक याद रखी जा सकती है।
  • इस सामग्री में प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों के पाठ्यक्रम को शामिल किया गया है।
  • परीक्षा से कुछ समय पूर्व रिवीज़न करने हेतु क्विक रिवीज़न पॉइंट शामिल किये गए हैं।
  • प्रत्येक अध्याय के अंत में उस खंड से विगत 17 वर्षों के दौरान पूछे गए प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्नों (उत्तर सहित) एवं विगत 4 वर्षों में आए मुख्य परीक्षा के प्रश्नों का समावेश किया गया है।
  • दृष्टि संस्थान सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के बीच लोकप्रिय और भरोसेमंद संस्थान है। अतः आप निश्चिंत होकर हमारी अध्ययन सामग्री का लाभ उठा सकते हैं।
  • हमारे पास पेशेवर प्रबंधन के साथ ही प्रत्येक विषय के लिये प्रतिभावान और अनुभवी कंटेंट लेखकों की टीम है, जो पूरी लगन के साथ आपके लिये गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री तैयार करती है।

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 एसएससी परीक्षा नोट्स

Exam Exam year Stream Book Fee Total Payable fee
SSC 2019 Graduate in any Stream 3750/- 3750/-

Key Features:

  • यह अध्ययन सामग्री एसएससी परीक्षा के पाठ्यक्रम को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
  • जैसा कि आप जानते हैं हमारा ध्येय इस कार्यक्रम के माध्यम से हर उस अभ्यर्थी को लाभ प्रदान करना है, जो किसी विवशता के कारण कोचिंग कक्षाएँ ज्वॉइन करने में असमर्थ है, लेकिन सिविल सेवक बनने का सपना संजोए हुए है।
  • इस सामग्री के निर्माण में केवल आधिकारिक और विश्वसनीय तथ्यों एवं आँकड़ों का ही उपयोग किया गया है।
  • इस अध्ययन सामग्री को सहज और सरल भाषा में तैयार किया गया है जो समझने में बेहद आसान है और लंबे समय तक याद रखी जा सकती है।
  • इस सामग्री में प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों के पाठ्यक्रम को शामिल किया गया है।
  • परीक्षा से कुछ समय पूर्व रिवीज़न करने हेतु क्विक रिवीज़न पॉइंट शामिल किये गए हैं।
  • प्रत्येक अध्याय के अंत में उस खंड से विगत 17 वर्षों के दौरान पूछे गए प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्नों (उत्तर सहित) एवं विगत 4 वर्षों में आए मुख्य परीक्षा के प्रश्नों का समावेश किया गया है।
  • दृष्टि संस्थान सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के बीच लोकप्रिय और भरोसेमंद संस्थान है। अतः आप निश्चिंत होकर हमारी अध्ययन सामग्री का लाभ उठा सकते हैं।
  • हमारे पास पेशेवर प्रबंधन के साथ ही प्रत्येक विषय के लिये प्रतिभावान और अनुभवी कंटेंट लेखकों की टीम है, जो पूरी लगन के साथ आपके लिये गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री तैयार करती है।

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 बैंक परीक्षा अध्ययन सामग्री

Exam Exam year Stream Book Fee Total Payable fee
BANK 2019 Graduate in any Stream 3750/- 3750/-

Key Features:

  • यह अध्ययन सामग्री बैंक परीक्षा के पाठ्यक्रम को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
  • जैसा कि आप जानते हैं हमारा ध्येय इस कार्यक्रम के माध्यम से हर उस अभ्यर्थी को लाभ प्रदान करना है, जो किसी विवशता के कारण कोचिंग कक्षाएँ ज्वॉइन करने में असमर्थ है.
  • इस सामग्री के निर्माण में केवल आधिकारिक और विश्वसनीय तथ्यों एवं आँकड़ों का ही उपयोग किया गया है।
  • इस अध्ययन सामग्री को सहज और सरल भाषा में तैयार किया गया है जो समझने में बेहद आसान है और लंबे समय तक याद रखी जा सकती है।
  • इस सामग्री में प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों के पाठ्यक्रम को शामिल किया गया है।
  • परीक्षा से कुछ समय पूर्व रिवीज़न करने हेतु क्विक रिवीज़न पॉइंट शामिल किये गए हैं।
  • प्रत्येक अध्याय के अंत में उस खंड से विगत 17 वर्षों के दौरान पूछे गए प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्नों (उत्तर सहित) एवं विगत 4 वर्षों में आए मुख्य परीक्षा के प्रश्नों का समावेश किया गया है।
  • दृष्टि संस्थान सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के बीच लोकप्रिय और भरोसेमंद संस्थान है। अतः आप निश्चिंत होकर हमारी अध्ययन सामग्री का लाभ उठा सकते हैं।
  • हमारे पास पेशेवर प्रबंधन के साथ ही प्रत्येक विषय के लिये प्रतिभावान और अनुभवी कंटेंट लेखकों की टीम है, जो पूरी लगन के साथ आपके लिये गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री तैयार करती है।

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संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी), जो भारत का एक संवैधानिक निकाय है, भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) जैसी अखिल भारतीय सेवाओं तथा भारतीय विदेश सेवा (IFS), भारतीय राजस्व सेवा (IRS), भारतीय रेलवे यातायात सेवा (IRTS) एवं भारतीय कंपनी कानून सेवा (ICLS) आदि जैसी प्रतिष्ठित सेवाओं हेतु अभ्यर्थियों का चयन करने के लिये प्रत्येक वर्ष सिविल सेवा परीक्षा आयोजित करता है। प्रत्येक वर्ष लाखों अभ्यर्थी अपना भाग्य आज़माने के लिये इस परीक्षा में बैठते हैं। तथापि, उनमें से चंद अभ्यर्थियों को ही “राष्ट्र के वास्तुकार” (Architect of Nation) की संज्ञा से विभूषित इन प्रतिष्ठित पदों तक पहुँचने का सौभाग्य प्राप्त होता है। ‘सिविल सेवा परीक्षा’ मुख्यत: तीन चरणों (प्रारंभिक, मुख्य एवं साक्षात्कार) में सम्पन्न की जाती है जिनका सामान्य परिचय इस प्रकार है-

प्रारंभिक परीक्षा:

  • सिविल सेवा परीक्षा का प्रथम चरण प्रारंभिक परीक्षा कहलाता है। इसकी प्रकृति पूरी तरह वस्तुनिष्ठ (बहुविकल्पीय) होती है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक प्रश्न के लिये दिये गए चार संभावित विकल्पों (a, b, c और d) में से एक सही विकल्प का चयन करना होता है।
  • प्रश्न से सम्बंधित आपके चयनित विकल्प को आयोग द्वारा दी गई ओएमआर सीट में प्रश्न के सम्मुख दिये गए संबंधित गोले (सर्किल) में उचित स्थान पर काले बॉल पॉइंट पेन से भरना होता है।
  • सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 200 अंकों की होती है।
  • वर्तमान में प्रारंभिक परीक्षा में दो प्रश्नपत्र शामिल हैं। पहला प्रश्नपत्र ‘सामान्य अध्ययन’ (100 प्रश्न, 200 अंक) का है, जबकि दूसरे को ‘सिविल सेवा अभिवृत्ति परीक्षा’ (Civil Services Aptitude Test) या ‘सीसैट’ (80 प्रश्न, 200 अंक) का होता है और यह क्वालीफाइंग पेपर के रूप में है। सीसैटप्रश्नपत्र में 33% अंक प्राप्त करने आवश्यक हैं।
  • दोनों प्रश्नपत्रों में ‘निगेटिव मार्किंग की व्यवस्था लागू है जिसके तहत 3 उत्तर गलत होने पर 1 सही उत्तर के बराबर अंक काट लिये जाते हैं।
  • प्रारंभिक परीक्षा में कट-ऑफ का निर्धारण सिर्फ प्रथम प्रश्नपत्र यानी सामान्य अध्ययन के आधार पर किया जाता है।

मुख्य परीक्षा: 

  • सिविल सेवा परीक्षा का दूसरा चरण ‘मुख्य परीक्षा’ कहलाता है।
  • प्रारंभिक परीक्षा का उद्देश्य सिर्फ इतना है कि सभी उम्मीदवारों में से कुछ गंभीर व योग्य उम्मीदवारों को चुन लिया जाए तथा वास्तविक परीक्षा उन चुने हुए उम्मीदवारों के बीच आयोजित कराई जाए।
  • प्रारंभिक परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों को सामान्यतः अक्तूबर-नवंबर माह के दौरान मुख्य परीक्षा देने के लिये आमंत्रित किया जाता है।
  • मुख्य परीक्षा कुल 1750 अंकों की है जिसमें 1000 अंक सामान्य अध्ययन के लिये (250-250 अंकों के 4 प्रश्नपत्र)500 अंक एक वैकल्पिक विषय के लिये (250-250 अंकों के 2 प्रश्नपत्र) तथा 250 अंक निबंध के लिये निर्धारित हैं।
  • मुख्य परीक्षा में ‘क्वालिफाइंग’ प्रकृति के दोनों प्रश्नपत्रों (अंग्रेज़ी एवं हिंदी या संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल कोई भाषा) के लिये 300-300 अंक निर्धारित हैं, जिनमें न्यूनतम अर्हता अंक 25% (75 अंक) निर्धारित किये गए हैं। इन प्रश्नपत्रों के अंक योग्यता निर्धारण में नहीं जोड़े जाते हैं।
  • मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र अंग्रेज़ी और हिंदी दोनों भाषाओं में साथ-साथ प्रकाशित किये जाते हैं, हालाँकि उम्मीदवारों को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं में से किसी में भी उत्तर देने की छूट होती है (केवल साहित्य के विषयों में यह छूट है कि उम्मीदवार उसी भाषा की लिपि में उत्तर लिखे है, चाहे उसका माध्यम वह भाषा न हो)।
  • गौरतलब है कि जहाँ प्रारंभिक परीक्षा पूरी तरह वस्तुनिष्ठ (Objective) होती है, वहीं मुख्य परीक्षा में अलग-अलग शब्द सीमा वाले वर्णनात्मक (Descriptive) या व्यक्तिनिष्ठ (Subjective) प्रश्न पूछे जाते हैं। इन प्रश्नों में विभिन्न विकल्पों में से उत्तर चुनना नहीं होता बल्कि अपने शब्दों में लिखना होता है। यही कारण है कि मुख्य परीक्षा में सफल होने के लिये अच्छी लेखन शैली बहुत महत्त्वपूर्ण मानी जाती है।

साक्षात्कार: 

  • सिविल सेवा परीक्षा का अंतिम एवं महत्त्वपूर्ण चरण साक्षात्कार (Interview) कहलाता है।
  • मुख्य परीक्षा मे चयनित अभ्यर्थियों को सामान्यत: अप्रैल- मई माह में आयोग के समक्ष साक्षात्कार के लिये उपस्थित होना होता है।
  • इसमें न तो प्रारंभिक परीक्षा की तरह सही उत्तर के लिये विकल्प दिये जाते हैं और न ही मुख्य परीक्षा के कुछ प्रश्नपत्रों की तरह अपनी सुविधा से प्रश्नों के चयन की सुविधा होती है। हर प्रश्न का उत्तर देना अनिवार्य होता है और हर उत्तर पर आपसे प्रतिप्रश्न भी पूछे जा सकते हैं। हर गलत या हल्का उत्तर ‘नैगेटिव मार्किंग’ जैसा नुकसान करता है और इससे भी मुश्किल बात यह कि परीक्षा के पहले दो चरणों के विपरीत इसके लिये कोई निश्चित पाठ्यक्रम भी नहीं है। दुनिया में जो भी प्रश्न सोचा जा सकता है, वह इसके पाठ्यक्रम का हिस्सा है। दरअसल, यह परीक्षा अपनी प्रकृति में ही ऐसी है कि उम्मीदवार का बेचैन होना स्वाभाविक है।
  • यूपीएससी द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा में इंटरव्यू के लिये कुल 275 अंक निर्धारित किये गए हैं। मुख्य परीक्षा के अंकों (1750 अंक) की तुलना में इस चरण के लिये निर्धारित अंक कम अवश्य हैं लेकिन अंतिम चयन एवं पद निर्धारण में इन अंकों का विशेष योगदान होता है।
  • इंटरव्यू के दौरान अभ्यर्थियों के व्यक्तित्व का परीक्षण किया जाता है, जिसमें आयोग में निर्धारित स्थान पर इंटरव्यू बोर्ड के सदस्यों द्वारा मौखिक प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनका उत्तर अभ्यर्थी को मौखिक रूप से ही  देना होता है। यह प्रक्रिया अभ्यर्थियों की संख्या के अनुसार सामान्यत: 40-50 दिनों तक चलती है।
  • मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार में प्राप्त किये गए अंकों के योग के आधार पर अंतिम रूप से मेधा सूची (मेरिट लिस्ट) तैयार की जाती है।
  • इस चरण के लिये चयनित सभी अभ्यर्थियों का इंटरव्यू समाप्त होने के सामान्यत: एक सप्ताह पश्चात् अन्तिम रूप से चयनित अभ्यर्थियों की सूची जारी की जाती है।

संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा का प्रारूप इस प्रकार है –

परीक्षा  परीक्षा आयोजन का माह  (सामान्यत:) विषय  कुल अंक 
*1  प्रारंभिक  जून सामान्य अध्ययन  प्रश्नपत्र  I & II

प्रश्नपत्र  I – 200

प्रश्नपत्र  II – 200

मुख्य  अक्तूबर –नवंबर

सामान्य अध्ययन  (प्रश्नपत्र –I)

सामान्य अध्ययन  (प्रश्नपत्र –II)

सामान्य अध्ययन  (प्रश्नपत्र –III)

सामान्य अध्ययन  (प्रश्नपत्र –IV)

वैकल्पिक विषय (प्रश्नपत्र –I)

वैकल्पिक विषय (प्रश्नपत्र –II)

निबंध लेखन

250

250

250

250

250

250

250

*2 अनिवार्य : अंग्रेज़ी

*3 अनिवार्य : भारतीय भाषा

300

300

साक्षात्कार  मार्च-अप्रैल व्यक्तित्व परीक्षण 275

 

नोट:

  • *1 प्रारंभिक परीक्षा में प्राप्त किये गये अंकों को मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार के अंकों के साथ नहीं जोड़ा जाता है।
  • *2,*3  अनिवार्य अंग्रेज़ी एवं भारतीय भाषा में प्राप्त किये गए अंकों को भी मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार के अंकों (1750+275=2025) के साथ नहीं जोड़ा जाता है। 
  • उम्मीदवार का अंतिम चयन मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार में प्राप्त किये गये अंकों के योग के आधार पर होता है।     

आखिर हम सिविल सेवक के रूप में अपना कॅरियर क्यों चुनना चाहते हैं- क्या सिर्फ देश सेवा के लिये? वो तो अन्य रूपों में भी की जा सकती है। या फिर सिर्फ पैसों के लिये? लेकिन इससे अधिक वेतन तो अन्य नौकरियों एवं व्यवसायों में मिल सकता है। फिर ऐसी क्या वजह है कि सिविल सेवा हमें इतना आकर्षित करती है? आइये, अब हम आपको सिविल सेवा की कुछ खूबियों से अवगत कराते हैं जो इसे आकर्षण का केंद्र बनाती हैं।

  • यदि हम एक सिविल सेवक बनना चाहते हैं तो स्वाभाविक है कि हम ये भी जानें कि एक सिविल सेवक बनकर हम क्या-क्या कर सकते हैं? इस परीक्षा को पास करके हम किन-किन पदों पर नियुक्त होते हैं? हमारे पास क्या अधिकार होंगे? हमें किन चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा? इसमें हमारी भूमिका क्या और कितनी परिवर्तनशील होगी इत्यादि।
  • अगर शासन व्यवस्था के स्तर पर देखें तो कार्यपालिका के महत्त्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन सिविल सेवकों के माध्यम से ही होता है। वस्तुतः औपनिवेशिक काल से ही सिविल सेवा को इस्पाती ढाँचे के रूप में देखा जाता रहा है। हालाँकि, स्वतंत्रता प्राप्ति के लगभग 70 साल पूरे होने को हैं, तथापि इसकी महत्ता ज्यों की त्यों बनी हुई है, लेकिन इसमें कुछ संरचनात्मक बदलाव अवश्य आए हैं।
  • पहले, जहाँ यह नियंत्रक की भूमिका में थी, वहीं अब इसकी भूमिका कल्याणकारी राज्य के अभिकर्ता (Procurator) के रूप में तब्दील हो गई है, जिसके मूल में देश और व्यक्ति का विकास निहित है।
  • आज सिविल सेवकों के पास कार्य करने की व्यापक शक्तियाँ हैं, जिस कारण कई बार उनकी आलोचना भी की जाती है। लेकिन, यदि इस शक्ति का सही से इस्तेमाल किया जाए तो वह देश की दशा और दिशा दोनों बदल सकता है। यही वजह है कि बड़े बदलाव या कुछ अच्छा कर गुज़रने की चाह रखने वाले युवा इस नौकरी की ओर आकर्षित होते हैं और इस बड़ी भूमिका में खुद को शामिल करने के लिये सिविल सेवा परीक्षा में सम्मिलित होते हैं।
  • यह एकमात्र ऐसी परीक्षा है जिसमें सफल होने के बाद विभिन्न क्षेत्रों में प्रशासन के उच्च पदों पर आसीन होने और नीति-निर्माण में प्रभावी भूमिका निभाने का मौका मिलता है।
  • इसमें  केवल आकर्षक वेतन, पद की सुरक्षा, कार्य क्षेत्र का वैविध्य और अन्य तमाम प्रकार की सुविधाएँ ही नहीं मिलती हैं बल्कि देश के प्रशासन में शीर्ष पर पहुँचने के अवसर के साथ-साथ उच्च सामाजिक प्रतिष्ठा भी मिलती है।
  • हमें आए दिन ऐसे आईएएस, आईपीएस अधिकारियों के बारे में पढ़ने-सुनने को मिलता है, जिन्होंने अपने ज़िले या किसी अन्य क्षेत्र में कमाल का काम किया हो। इस कमाल के पीछे उनकी व्यक्तिगत मेहनत तो होती ही है, साथ ही इसमें बड़ा योगदान इस सेवा की प्रकृति का भी है जो उन्हें ढेर सारे विकल्प और उन विकल्पों पर सफलतापूर्वक कार्य करने का अवसर प्रदान करती है।
  • नीति-निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने के कारण ही सिविल सेवक नीतिगत सुधारों को मूर्त रूप प्रदान कर पाते हैं।
  • ऐसे अनेक सिविल सेवक हैं जिनके कार्य हमारे लिये प्रेरणास्रोत के समान हैं। जैसे- एक आईएएस अधिकारी  एस.आर. शंकरण जीवनभर बंधुआ मज़दूरी के खिलाफ लड़ते रहे तथा उन्हीं के प्रयासों से “बंधुआ श्रम व्यवस्था (उन्मूलन) अधिनियम,1976” जैसा कानून बना। इसी तरह बी.डी. शर्मा जैसे आईएएस अधिकारी ने पूरी संवेदनशीलता के साथ नक्सलवाद की समस्या को सुलझाने का प्रयास किया तथा आदिवासी इलाकों में सफलतापूर्वक कई गतिशील योजनाओं को संचालित कर खासे लोकप्रिय हुए। इसी तरह, अनिल बोर्डिया जैसे आईएएस अधिकारी ने शिक्षा के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण काम किया। ऐसे अनेक उदाहरण हैं जिनमें इस सेवा के अंतर्गत ही अनेक महान कार्य करने के अवसर प्राप्त हुए, जिसके कारण यह सेवा अभ्यर्थियों को काफी आकर्षित करती है।
  • स्थायित्व, सम्मान एवं कार्य करने की व्यापक, अनुकूल एवं मनोचित दशाओं इत्यादि का बेहतर मंच उपलब्ध कराने के कारण ये सेवाएँ अभ्यर्थियों एवं समाज के बीच सदैव प्राथमिकता एवं प्रतिष्ठा की विषयवस्तु रही हैं।
  • कुल मिलाकर, सिविल सेवा में जाने के बाद हमारे पास आगे बढ़ने और देश को आगे बढ़ाने के अनेक अवसर होते हैं। सबसे बढ़कर हम एक साथ कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, प्रबंधन जैसे विभिन्न क्षेत्रों के विकास में योगदान कर सकते हैं जो किसी अन्य सार्वजनिक क्षेत्र में शायद ही सम्भव है।
  • सिविल सेवकों के पास ऐसी अनेक संस्थागत शक्तियाँ होती हैं जिनका उपयोग करके वे किसी भी क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन ला सकते हैं। यही वजह है कि अलग-अलग क्षेत्रों में सफल लोग भी इस सेवा के प्रति आकर्षित होते हैं।
  • सिविल सेवा परीक्षा के अंतर्गत शामिल प्रत्येक सेवा की प्रकृति और चुनौतियाँ भिन्न-भिन्न हैं। इसलिये आगे हम प्रमुख सिविल सेवाओं के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे, जैसे- उनमें कार्य करने का कितना स्कोप है, प्रोन्नति की क्या व्यवस्था है, हम किस पद तक पहुँच सकते हैं आदि, ताकि अपने ‘कॅरियर’ के प्रति हमारी दृष्टि और भी स्पष्ट हो सके।

हम सभी ने सिविल सेवा परीक्षा (सामान्य रूप में आईएएस परीक्षा के नाम से प्रचलित) की तैयारी को लेकर प्रायः कई मिथकों को सुना है। इनमें से कई कथन इस परीक्षा की तैयारी शुरू करने वाले अभ्यर्थियों को भयभीत करते हैं तो कई अनुभवी अभ्यर्थियों को भी व्याकुल कर देते हैं। निम्नलिखित प्रश्नों के माध्यम से हमारा प्रयास यह है कि अभ्यर्थियों को इन मिथकों से दूर रखते हुए उनका ध्यान परीक्षा पर केन्द्रित करने को प्रेरित किया जाए। 

प्रश्न-1: कुछ लोग कहते हैं कि सिविल सेवा परीक्षा सभी परीक्षाओं में सर्वाधिक कठिन परीक्षा है, क्या यह सत्य है?
उत्तर: जी नहीं, यह पूर्णत: सही नहीं है। सिविल सेवा परीक्षा भी अन्य परीक्षाओं की ही तरह एक परीक्षा है, अंतर केवल इनकी प्रकृति एवं प्रक्रिया में है। अन्य परीक्षाओं की तरह यदि अभ्यर्थी इस परीक्षा की प्रकृति के अनुरूप उचित एवं गतिशील रणनीति बनाकर तैयारी करे तो उसकी सफलता की संभावना बढ़ जाती है। ध्यान रहे, अभ्यर्थियों की क्षमताओं में अंतर हो सकता है लेकिन उचित रणनीति एवं निरंतर अभ्यास से कोई लक्ष्य मुश्किल नहीं है।

प्रश्न-2: कहते हैं कि सिविल सेवा परीक्षा में सफल होने के लिये प्रतिदिन 16-18 घंटे अध्ययन करना आवश्यक है, क्या यह सत्य है?
उत्तर: सिविल सेवा परीक्षा सामान्यत: तीन चरणों (प्रारंभिक, मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार) में आयोजित की जाती है, जिनमें प्रत्येक चरण की प्रकृति एवं रणनीति अलग-अलग होती हैं। ऐसे में यह कहना कि इस परीक्षा में सफल होने के लिये प्रतिदिन 16-18 घंटे अध्ययन करना आवश्यक है, पूर्णत: सही नहीं है। सफलता, पढ़ाई के घंटों के अलावा अन्य पहलुओं पर भी निर्भर करती है। अभ्यर्थियों की क्षमताओं में अंतर होना स्वाभाविक है, हो सकता है किसी विषय को कोई अभ्यर्थी जल्दी समझ ले और कोई देर में, फिर भी अगर कोई अभ्यर्थी कुशल मार्गदर्शन में नियमित रूप से 8 घंटे पढ़ाई करता है तो उसके सफल होने की संभावना बढ़ जाती है।

प्रश्न-3: मैं कुछ व्यक्तिगत कारणों से दिल्ली नहीं जा सकता हूँ। कुछ लोग कहते हैं कि इस परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिये  दिल्ली में इसकी कोचिंग करनी आवश्यक है, क्या यह सत्य है?
उत्तर: जी नहीं, यह पूर्णत: सही नहीं है। विगत वर्षों के परीक्षा परिणामों को देखें तो कई ऐसे अभ्यर्थी इस परीक्षा में उच्च पदों पर चयनित हुए हैं, जिन्होंने घर पर ही स्वाध्याय किया। उचित एवं गतिशील रणनीति, स्तरीय अध्ययन सामग्री, जागरूकता, ईमानदारीपूर्वक किया गया प्रयास इत्यादि सफलता की कुंजी हैं। कोचिंग संस्थान आपको एक दिशा-निर्देश देते हैं जिस पर अंततः आपको ही चलना होता है। वर्तमान में कई प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थानों  के नोट्स बाज़ार में उपलब्ध हैं जिनका अध्ययन किया जा सकता है।

कौटिल्य एकडेमी इस बात से भली-भाँति अवगत है कि किसी गाँव/शहर में रहकर सिविल सेवा में जाने का सपना पाले कई अभ्यर्थी उचित दिशा-निर्देशन एवं सटीक सामग्री के अभाव में अधूरी तैयारी तक सीमित रहने को विवश होते हैं। वे आर्थिक, पारिवारिक, व्यावसायिक आदि कारणों से कोचिंग कक्षा कार्यक्रम से नहीं जुड़ पाते हैं। इसके अतिरिक्त, बाज़ार में बड़ी मात्रा में मौजूद स्तरहीन पाठ्य सामग्रियाँ भी इन अभ्यर्थियों  को भटकाव के पथ पर ले जाती हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए ‘कौटिल्य एकडेमी ’ ने “दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम” (डी.एल.पी.) के तहत सिविल सेवा परीक्षा प्रारूप का अनुकरण कर सामान्य अध्ययन (प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा), सीसैट (प्रारंभिक परीक्षा), हिन्दी साहित्य तथा दर्शनशास्त्र (वैकल्पिक विषय) की अतुलनीय पाठ्य-सामग्री तैयार की है।  सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे उन अभ्यर्थियों तक सिविल सेवा से जुड़ी उपयुक्त एवं समुचित अध्ययन सामग्री की सुगम पहुँच बनाना है जो किसी कारणवश कोचिंग संस्था के स्तर पर मार्गदर्शन लेने में असमर्थ हैं।

प्रश्न-4:  कुछ लोग कहते हैं कि यह परीक्षा एक बड़े महासागर के समान है और इसमें प्रश्न पाठ्यक्रम से बाहर से भी पूछे जाते हैं। वे यह भी कहते हैं कि इसमें प्रश्न उन स्रोतों से पूछे जाते हैं जो सामान्यतः अभ्यर्थियों की पहुँच से बाहर होते हैं, क्या यह सत्य है?
उत्तर: जी नहीं, यह बिल्कुल गलत है। यूपीएससी अपने पाठ्यक्रम पर दृढ़ है। सामान्य अध्ययन के कुछ प्रश्नपत्रों के कुछ शीर्षकों के उभयनिष्ठ (Common) होने के कारण सामान्यत: अभ्यर्थियों में यह भ्रम उत्पन्न होता है कि कुछ प्रश्न पाठ्यक्रम से बाहर पूछे गए हैं जबकि वे किसी-न-किसी शीर्षक से संबंधित रहते हैं। आपको इस प्रकार की भ्रामक बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिये। यूपीएससी का उद्देश्य योग्य अभ्यर्थियों का चयन करना है न कि अभ्यर्थियों से अनावश्यक प्रश्न पूछकर उन्हें परेशान करना।

प्रश्न-5: लाखों अभ्यर्थी इस परीक्षा में भाग लेते हैं जबकि कुछ मेधावी अभ्यर्थी ही आईएएस बनते हैं। इस प्रश्न को लेकर मेरे मन में भय उत्पन्न हो रहा है, कृपया उचित मार्गदर्शन करें ?
उत्तर: आपको भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है, यद्यपि इस परीक्षा के लिये लाखों अभ्यर्थी आवेदन करते हैं और इस परीक्षा में सम्मिलित होते हैं, परन्तु वास्तविक प्रतिस्पर्द्धा केवल 8-10 हज़ार गंभीर अभ्यर्थियों के बीच ही होती है। ये वे अभ्यर्थी होते हैं जो व्यवस्थित ढंग से और लगातार अध्ययन करते हैं और इस परीक्षा में सफल होते हैं। यदि आप भी ऐसा ही करते हैं तो आप भी उन सभी में से एक हो सकते हैं। तैयारी आरंभ करने से पूर्व आपको भयभीत नहीं होना है। आपको इस दौड़ में शामिल होना चाहिये तथा इसे जीतने के लिये कड़ी मेहनत करनी चाहिये।

प्रश्न-6: कुछ लोग कहते हैं कि इस परीक्षा को पास करने के लिये भाग्य की ज़रूरत है, क्या यह सत्य है ?
उत्तर: यदि आप भाग्य को मानते हैं तो स्पष्ट रूप से इस बात को समझ लें कि इस परीक्षा को पास करने में भाग्य का योगदान मात्र 1% और आपके परिश्रम का 99% है। आप अपने हाथों से सफलता के 99% अंश को न गवाएँ। यदि आप ईमानदारी से परिश्रम करेंगे तो भाग्य आपका साथ अवश्य देगा। ध्यान रहे, ‘ईश्वर उन्हीं की सहायता करता है जो अपनी सहायता स्वयं करते हैं’।

प्रश्न-7: वैकल्पिक विषयों का चयन कैसे करें? कुछ लोगों का मानना है कि ऐसे विषय का चयन करना चाहिये जिसका पाठ्यक्रम अन्य विषयों की तुलना में छोटा हो और जो सामान्य अध्ययन में भी मदद करता हो, क्या यह सत्य है ?
उत्तर: उपयुक्त वैकल्पिक विषय का चयन ही वह निर्णय है जिस पर किसी उम्मीदवार की सफलता का सबसे ज़्यादा दारोमदार होता है। विषय चयन का असली आधार सिर्फ यही है कि वह विषय आपके माध्यम में कितना ‘ स्कोरिंग’ है? विषय छोटा है या बड़ा, वह सामान्य अध्ययन में मदद करता है या नहीं, ये सभी आधार भ्रामक हैं। अगर विषय छोटा भी हो और सामान्य अध्ययन में मदद भी करता हो किंतु दूसरे विषय की तुलना में 50 अंक कम दिलवाता हो तो उसे चुनना निश्चित तौर पर घातक है। भूलें नहीं, आपका चयन अंततः आपके अंकों से ही होता है, इधर-उधर के तर्कों से नहीं। इस संबंध में विस्तार से समझने के लिये “’कैसे करें वैकल्पिक विषय का चयन’” शीर्षक को पढ़ें|

प्रश्न-8: वैकल्पिक विषयों के चयन में माध्यम का क्या प्रभाव पड़ता है? कुछ लोगों का मानना है कि हिंदी माध्यम की तुलना में अंग्रेज़ी माध्यम के अभ्यर्थी ज़्यादा अंक प्राप्त करते हैं, क्या यह सत्य है?
उत्तर: जी नहीं, यह पूर्णत: सही नहीं है। किसी विषय में अच्छे अंक प्राप्त करना उम्मीदवार की उस विषय में रुचि, उसकी व्यापक समझ, स्तरीय पाठ्य सामग्री की उपलब्धता, अच्छी लेखन शैली एवं समय प्रबंधन इत्यादि पर निर्भर करता है। अभ्यर्थी को उसी विषय का चयन वैकल्पिक विषय के रूप में करना चाहिये जिसमें वह सहज हो। हिंदी माध्यम के अभ्यर्थी उन्हीं विषयों या प्रश्नपत्रों में अच्छे अंक (यानी अंग्रेज़ी माध्यम के गंभीर उम्मीदवारों के बराबर या उनसे अधिक अंक) प्राप्त कर सकते हैं जिनमें तकनीकी शब्दावली का प्रयोग कम या नहीं के बराबर होता हो, अद्यतन जानकारियों की अधिक अपेक्षा न रहती हो और जिन विषयों पर पुस्तकें और परीक्षक हिंदी में सहजता से उपलब्ध हों।

प्रश्न-9: कुछ लोग कहते हैं कि आईएएस की नियुक्ति में भ्रष्टाचार होता है, क्या यह सत्य है ?
उत्तर:  यह आरोप पूर्णतः गलत है। यह पूरी परीक्षा इतनी निष्पक्ष है कि आप इस पर आँख बंद करके विश्वास कर सकते हैं। परीक्षा के संचालन के तरीके में खामी हो सकती है लेकिन सिविल सेवा अधिकारियों की नियुक्ति में भ्रष्टाचार नहीं होता है। इनकी नियुक्तियाँ निष्पक्ष होती हैं। आप इस पर विश्वास कर सकते हैं।

परिचय (Introduction):

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एम.पी.पी.एस.सी.), इंदौर द्वारा राज्य विशेष प्रशासन से सम्बंधित विभिन्न पदों सहित अन्य अधीनस्थ सेवाओं का आयोजन किया जाता है। सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले ज्यादातर अभ्यर्थी (विशेषकर हिंदी माध्यम) संघ लोक सेवा आयोग (यू.पी.एस.सी.) की परीक्षा के साथ-साथ इस आयोग द्वारा आयोजित सर्वाधिक प्रतिष्ठित ‘मध्य प्रदेश राज्य सेवा परीक्षा’ में भी सम्मिलित होते हैं। प्रश्नों की प्रकृति एवं प्रक्रिया में अंतर होने के बावजूद यू.पी.एस.सी. के प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा के पाठ्यक्रम के अध्ययन की इस परीक्षा में सार्थक भूमिका होती है, इसलिये सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र इस परीक्षा में भी सफल होते हैं।

आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाएँ:

  • मध्य प्रदेश में राज्य आधारित सरकारी, अर्द्ध-सरकारी, न्यायिक, राज्य वन सेवा एवं अन्य अधीनस्थ सेवाओं का आयोजन मुख्य रूप से मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एम.पी.पी.एस.सी.), इंदौर द्वारा किया जाता है।
  • आयोग द्वारा आयोजित सर्वाधिक लोकप्रिय परीक्षा ‘मध्य प्रदेश राज्य सेवा परीक्षा’ एवं ‘मध्य प्रदेश राज्य वन सेवा परीक्षा’ है। वर्ष 2017 में आवेदन पत्र के प्रारूप में परिवर्तन किया गया जिससे अभ्यर्थी अब इन दोनों परीक्षाओं के लिये कॉमन ऑनलाइन आवेदन पत्र भर सकते हैं , बशर्ते कि वे राज्य वन सेवा परीक्षा में भी बैठने की अर्हता रखते हों।
  • ‘मध्य प्रदेश राज्य सेवा परीक्षा’ के लिये सामान्य शैक्षणिक योग्यता जहाँ किसी भी विषय के साथ स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण होना है, वहीं ‘मध्य प्रदेश राज्य वन सेवा परीक्षा’ के लिये सामान्यत: विज्ञान विषय के साथ स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। स्नातक के अंतिम वर्ष में अध्ययनरत अभ्यर्थी भी आवेदन पत्र भरने के पात्र (कुछ शर्तों के साथ) होते हैं।
  • ‘मध्य प्रदेश राज्य सेवा परीक्षा’ को प्रायः ‘एम.पी.पी.सी.एस.’ के नाम से भी जाना जाता है।

एम.पी.पी.सी.एस. परीक्षा- प्रकृति एवं प्रक्रिया

परीक्षा की प्रकृति: 

  • आयोग द्वारा आयोजित इस प्रतियोगी परीक्षा में सामान्यत: क्रमवार तीन स्तर सम्मिलित हैं-
    1 :  प्रारंभिक परीक्षा – वस्तुनिष्ठ प्रकृति
    2 :  मुख्य परीक्षा – वर्णनात्मक प्रकृति
    3 :  साक्षात्कार – मौखिक
  • वर्ष 2012 में आयोग द्वारा एम.पी.पी.एस.सी. की प्रारंभिक परीक्षा एवं वर्ष 2014 में मुख्य परीक्षा की प्रकृति एवं पाठ्यक्रम में महत्त्वपूर्ण बदलाव किया गया। इसका विस्तृत विवरण नीचे दिया गया है।

परीक्षा की प्रक्रिया:

प्रारंभिक परीक्षा की प्रक्रिया:

  • सर्वप्रथम आयोग द्वारा इन परीक्षाओं से सम्बंधित विज्ञप्ति जारी की जाती है उसके पश्चात ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरने की प्रक्रिया शुरू होती है। फॉर्म भरने की प्रक्रिया संबंधी विस्तृत जानकारी ‘विज्ञप्ति’ के अंतर्गत ‘ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?’ शीर्षक में दी गयी होती है।
  • विज्ञप्ति में उक्त परीक्षा से सम्बंधित विभिन्न पहलुओं का विस्तृत विवरण दिया गया होता है। अत: फॉर्म भरने से पहले इसका अध्ययन करना लाभदायक रहता है।
  • फॉर्म भरने की प्रक्रिया समाप्त होने के बाद सामान्यतः 1 से 2 माह पश्चात् प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की जाती है।
  • यह प्रारंभिक परीक्षा एक ही दिन आयोग द्वारा निर्धारित राज्य के विभिन्न केन्द्रों पर सम्पन्न होती है।
  • आयोग द्वारा आयोजित इस प्रारंभिक परीक्षा की प्रकृति वस्तुनिष्ठ (बहुविकल्पीय) होती है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक प्रश्न के लिये दिये गए चार संभावित विकल्पों (a, b, c और d) में से एक सही विकल्प का चयन करना होता है।
  • प्रश्न से सम्बंधित इस चयनित विकल्प को आयोग द्वारा दिये गए ओ.एम.आर. शीट में उसके सम्मुख दिये गए सम्बंधित गोले (सर्किल) में उचित स्थान पर केवल काले बॉल पॉइंट पेन से भरना होता है।
  • एम.पी.पी.एस.सी. द्वारा आयोजित इस परीक्षा में गलत उत्तर के लिये किसी भी प्रकार की नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान नहीं है।
  • यदि किसी प्रश्न का अभ्यर्थी एक से अधिक उत्तर देता हैं, तो उस उत्तर को गलत माना जाएगा।
  • प्रश्नपत्र दो भाषाओं (हिंदी एवं अंग्रेजी) में दिये गए होते हैं, अभ्यर्थी इन दोनों में से किसी भी भाषा में अपनी सहजता के आधार पर प्रश्नों का उत्तर दे सकते हैं।
  • आयोग द्वारा वर्ष 2012 में इस प्रारंभिक परीक्षा की प्रकृति में बदलाव किया गया जिसके अनुसार, द्वितीय प्रश्नपत्र में पूछे जाने वाले वैकल्पिक विषय (वस्तुनिष्ठ) के स्थान पर ‘सामान्य अभिरुचि परीक्षण’ (जनरल एप्टिट्यूड टेस्ट) के प्रश्नपत्र को अपनाया गया।
  • वर्तमान में आयोग की इस प्रारंभिक परीक्षा में दो अनिवार्य प्रश्नपत्र (क्रमशः ‘सामान्य अध्ययन’ एवं ‘सामान्य अभिरुचि परीक्षण’) पूछे जाते हैं, जिसकी परीक्षा एक ही दिन दो विभिन्न पालियों में दो-दो घंटे की समयावधि में सम्पन्न होती है।  ‘सामान्य अभिरुचि परीक्षण’ के प्रश्नपत्र को ‘सीसैट’ (सिविल सर्विस एप्टिट्यूड टेस्ट) के नाम से भी से जाना जाता है।
  • प्रथम प्रश्नपत्र ‘सामान्य अध्ययन’ का है, जिसमें प्रश्नों की कुल संख्या 100 एवं अधिकतम अंक 200 निर्धारित हैं।
  • द्वितीय प्रश्नपत्र ‘सामान्य अभिरुचि परीक्षण का है, जिसमें प्रश्नों की कुल संख्या 100 एवं अधिकतम अंक 200 निर्धारित हैं।
  • वर्ष 2017 से ‘मध्य प्रदेश राज्य सेवा परीक्षा’ एवं  ‘मध्य प्रदेश राज्य वन सेवा परीक्षा’ के लिये एक ही (कॉमन) प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की जाएगी जबकि मुख्य परीक्षा पूर्व की भाँति अलग-अलग आयोजित होगी।
  • मध्य प्रदेश राज्य सेवा परीक्षा’  के लिये यह प्रारंभिक परीक्षा 200 अंकों की होती है क्योंकि इसमें ‘सामान्य अभिरुचि परीक्षण’ के प्रश्नपत्र में प्राप्त अंकों को कट-ऑफ निर्धारण में नहीं जोड़ा जाता है, जबकि ‘मध्य प्रदेश राज्य वन सेवा परीक्षा’ के लिये यह परीक्षा कुल 400 अंकों की होती है क्योंकि इसमें ‘सामान्य अभिरुचि परीक्षण’ के प्रश्नपत्र में प्राप्त अंकों को कट-ऑफ निर्धारण में जोड़ा जाता है।
  • वर्ष 2015 से आयोग ने ‘मध्य प्रदेश राज्य सेवा परीक्षा’ के इस चरण में ‘सामान्य अभिरुचि परीक्षण’ के प्रश्नपत्र को केवल क्वालिफाइंग कर दिया है। अर्थात इस प्रश्नपत्र में आयोग द्वारा निर्धारित क्वालिफाइंग अंक प्राप्त करने वाले तथा सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्र में निर्धारित कट-ऑफ स्तर को प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी ही मुख्य परीक्षा के लिये सफल घोषित किये जाएंगे।
  • प्रारंभिक  परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिये सामान्यत: 75–80% अंक प्राप्त करने की आवश्यकता होती है, किन्तु कभी-कभी प्रश्नों के कठिनाई स्तर को देखते हुए यह प्रतिशत कम भी हो सकता है।
  • प्रारंभिक परीक्षा की प्रकृति क्वालिफाइंग होती है। इसमें प्राप्त अंकों को मुख्य परीक्षा या साक्षात्कार के अंकों के साथ नहीं जोड़ा जाता है।

नोट: 

  • मुख्य परीक्षा की पात्रता के लिये अभ्यर्थी को प्रारंभिक परीक्षा के प्रत्येक प्रश्नपत्र में न्यूनतम 40% अंक प्राप्त करना अनिवार्य है।
  • राज्य के अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/ अन्य पिछड़ा वर्ग एवं विकलांग श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिये न्यूनतम अर्हकारी अंक 30% निर्धारित किया गया है।

मुख्य परीक्षा की प्रक्रिया:

  • मुख्य परीक्षा में प्रवेश पाने वाले अभ्यर्थियों की संख्या विज्ञापन में प्रदर्शित की गई सेवा तथा पदों के विभिन्न प्रवर्गों से भरी जाने वाली कुल रिक्तियों की संख्या से 15 गुना होगी तथा समान अंक प्राप्त (वर्गवार/श्रेणीवार) अभ्यर्थियों को भी मुख्य परीक्षा हेतु अर्ह घोषित किया जाएगा।
  • प्रारंभिक परीक्षा में सफल हुए अभ्यर्थियों के लिये मुख्य परीक्षा का आयोजन आयोग द्वारा निर्धारित राज्य के विभिन्न केन्द्रों पर किया जाता है।
  • वर्ष 2014 में एम.पी.पी.एस.सी. की इस मुख्य परीक्षा के पाठ्यक्रम में आमूलचूल परिवर्तन किया गया। इससे पूर्व इस मुख्य परीक्षा में सामान्य अध्ययन के साथ-साथ दो वैकल्पिक विषयों के प्रश्नपत्र भी पूछे जाते थे, जिन्हें अब हटा दिया गया है।
  • अब इस मुख्य परीक्षा में छ: अनिवार्य प्रश्नपत्र  [सामान्य अध्ययन प्रथम प्रश्नपत्र,  सामान्य अध्ययन द्वितीय प्रश्नपत्र,  सामान्य अध्ययन तृतीय प्रश्नपत्र, सामान्य अध्ययन चतुर्थ प्रश्नपत्र, सामान्य हिंदी (पंचम प्रश्नपत्र) एवं ‘हिन्दी निबंध लेखन’ (षष्ठम प्रश्नपत्र)] पूछे जाएंगे। इसकी विस्तृत जानकारी के अंतर्गत ‘पाठ्यक्रम’ शीर्षक में दी गई है।
  • मुख्य परीक्षा की प्रकृति वर्णनात्मक/विश्लेषणात्मक होगी, इसमें प्रश्नों का स्वरुप अत्यंत लघु, लघु एवं दीर्घउत्तरीय या निबंधात्मक प्रकृति का होगा। इन सभी प्रश्नों के उत्तर को आयोग द्वारा दी गयी उत्तर-पुस्तिका में अधिकतम तीन घंटे (षष्ठम प्रश्नपत्र ‘निबंध लेखन’ के लिए दो घंटे की समय सीमा) की समय सीमा में लिखना होता है।
  • मुख्य परीक्षा कुल 1400 अंकों की होती है।
  • सामान्य अध्ययन के क्रमशः तीन प्रश्नपत्र (सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र, सामान्य अध्ययन द्वितीय प्रश्नपत्र एवं सामान्य अध्ययन तृतीय प्रश्नपत्र) में प्रत्येक के लिये अधिकतम 300-300 अंक निर्धारित हैं।
  • सामान्य अध्ययन चतुर्थ प्रश्नपत्र एवं सामान्य हिंदी (पंचम प्रश्नपत्र) के लिये 200-200 अंक निर्धारित हैं।
  • ‘हिन्दी निबंध लेखन’ (षष्ठम प्रश्नपत्र) के लिये 100 अंक निर्धारित हैं।
  • सामान्य हिंदी तथा ‘हिन्दी निबंध लेखन’ के प्रश्नपत्र को छोड़कर सामान्य अध्ययन के चारों प्रश्नपत्र हिंदी तथा अंग्रेजी माध्यम में उपलब्ध होंगे। अभ्यर्थी केवल उसी भाषा में परीक्षा दे सकेगा जो उसने अपने मुख्य परीक्षा के आवेदन पत्र में माध्यम के रूप में चयनित किया है।
  • सामान्य अध्ययन के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय प्रश्नपत्र दो खंडों (‘अ’ एवं ‘ब’) में विभाजित रहेंगे। प्रत्येक खंड 150 अंकों का होगा तथा  प्रत्येक खंड में 15 अति लघु उत्तरीय, 10 लघु उत्तरीय एवं 3 दीर्घउत्तरीय या निबंधात्मक प्रकृति के प्रश्न रहेंगे। आयोग द्वारा प्रश्नों की संख्या में आवश्यकतानुसार परिवर्तन किया जा सकता है।
  • चतुर्थ प्रश्नपत्र में एक ही खंड रहेगा जिसमें 15 लघु स्तरीय तथा 15 लघु स्तरीय संक्षिप्त टिप्पणियाँ सम्मिलित रहेंगी तथा एक या दो केस स्टडी से सम्बंधित लघु स्वरुप के प्रश्न पूछे जाएंगे। आयोग द्वारा प्रश्नों की संख्या में आवश्यकतानुसार परिवर्तन किया जा सकता है।
  • पंचम प्रश्नपत्र ‘सामान्य हिंदी’ का होगा। इसका उत्तर अभ्यर्थियों को अनिवार्य रूप से हिंदी में देना होगा। इसमें 20 लघु स्तरीय, एक गद्यांश का हिंदी से अंग्रेजी में अनुवाद तथा 8 लघु स्तरीय संक्षिप्त टिप्पणियाँ सम्मिलित रहेंगी। आयोग द्वारा प्रश्नों की संख्या में आवश्यकतानुसार परिवर्तन किया जा सकता है।
  • षष्ठम प्रश्नपत्र ‘हिन्दी निबंध लेखन’ का होगा। यह प्रश्नपत्र तीन खण्डों में विभाजित होगा। प्रत्येक खंड से एक निबंध लिखना होगा।
  • परीक्षा के इस चरण में सफलता प्राप्त करने के लिये सामान्यत: 60-65% अंक प्राप्त करने की आवश्यकता होती है। हालाँकि पाठ्यक्रम में बदलाव के कारण यह प्रतिशत कुछ कम या ज़्यादा भी हो सकता है।
  • पूर्व की भाँति ही इन प्रश्नपत्रों में प्राप्त किये गए अंक मेधा सूची में जोड़े जाएंगे।
  • परीक्षा के सभी विषयों में कम से कम शब्दों में की गई संगठित, सूक्ष्म और सशक्त अभिव्यक्ति को श्रेय मिलेगा।

साक्षात्कार की प्रक्रिया:

  • मुख्य परीक्षा में चयनित अभ्यर्थियों को सामान्यत: एक माह पश्चात् आयोग के समक्ष साक्षात्कार के लिये उपस्थित होना होता है।
  • साक्षात्कार के दौरान अभ्यर्थियों के व्यक्तित्व का परीक्षण किया जाता है। इसमें आयोग के सदस्यों द्वारा आयोग में निर्धारित स्थान पर मौखिक प्रश्न पूछे जाते हैं, जिसका उत्तर अभ्यर्थी को मौखिक रूप से देना होता है। यह प्रक्रिया अभ्यर्थियों की संख्या के अनुसार एक से अधिक दिनों तक चलती है।
  • वर्ष 2014 में एम.पी.पी.एस.सी. की इस परीक्षा में साक्षात्कार के लिये कुल 175 अंक निर्धारित किया गया (पूर्व में यह 250 अंकों का होता था)।
  • मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार में प्राप्त किये गए अंकों के योग के आधार पर अंतिम रूप से मेधा सूची (मेरिट लिस्ट) तैयार की जाती है।
  • सम्पूर्ण साक्षात्कार समाप्त होने के सामान्यत: एक सप्ताह पश्चात अन्तिम रूप से चयनित अभ्यर्थियों की सूची जारी की जाती है।
  • उपरोक्त वर्णित प्रत्येक प्रश्नपत्र में 40 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य है। अनुसूचित जाति / जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा नि:शक्त श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम अर्हकारी अंक 30 प्रतिशत होगे।

प्रश्न – 1 : एम.पी.पी.सी.एस. प्रारंभिक परीक्षा में द्वितीय प्रश्नपत्र (सीसैट) के क्वालिफाइंग होने का क्या अर्थ है?
उत्तर: एम.पी.पी.सी.एस. प्रारंभिक परीक्षा में द्वितीय प्रश्नपत्र ‘सीसैट’ जिसे ‘सामान्य अभिरुचि परीक्षण’ के नाम से जाना जाता है, के क्वालिफाइंग होने का अर्थ है कि इसमें न्यूनतम 40% अंक प्राप्त करना अनिवार्य है चूँकि इस प्रश्नपत्र में प्रश्नों की कुल संख्या 100 एवं अधिकतम अंक 200 निर्धारित है। अत: अभ्यर्थियों को अपनी सफलता सुनिश्चित करने के लिये इस प्रश्नपत्र में न्यूनतम 80 अंक या उससे अधिक अंक प्राप्त करने अनिवार्य होंगे।
इस प्रश्नपत्र में 80 अंक से कम अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों के प्रथम प्रश्नपत्र की कॉपी का मूल्यांकन ही नहीं किया जाता है, इसलिये प्रथम प्रश्नपत्र में चाहे जितना भी अच्छा प्रदर्शन किया गया हो द्वितीय प्रश्नपत्र में क्वालिफाइंग अंक प्राप्त करना अनिवार्य है।
आयोग द्वारा सामान्य श्रेणी एवं राज्य के बाहर के अभ्यर्थियों के लिये यह न्यूनतम अर्हकारी अंक 40% तथा राज्य के अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग एवं विकलांग श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिये न्यूनतम 30% निर्धारित किया गया है।

प्रश्न – 2 : प्रारंभिक परीक्षा के दौरान प्रश्नों का समाधान किस क्रम में करना चाहिये? क्या किसी विशेष क्रम से लाभ होता है?

उत्तर : प्रारंभिक परीक्षा के दौरान प्रश्नों के समाधान के क्रम को लेकर ज्यादातर अभ्यर्थियों में भ्रम की स्थिति बनी रहती है। इस परीक्षा में प्रश्नों को किस क्रम में हल किया जाये? इसका उत्तर सभी के लिये एक नहीं हो सकता। अगर आप सामान्य अध्ययन एवं सीसैट के सभी विषयों में सहज हैं और आपकी गति भी संतोषजनक है तो आप किसी भी क्रम में प्रश्न हल करके सफल हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में बेहतर यही होता है कि जिस क्रम में प्रश्न आते जाएँ, उसी क्रम में उन्हें हल करते हुए बढ़ें। किन्तु अगर आपकी स्थिति इतनी सुरक्षित नहीं है तो आपको प्रश्नों के क्रम पर विचार करना चाहिये। ऐसी स्थिति में आप सबसे पहले, उन प्रश्नों को हल करें जो सबसे कम समय लेते हैं।
यदि आपकी मध्य प्रदेश राज्य विशेष के सन्दर्भ में पकड़ अच्छी है तो आपको इससे सम्बंधित पूछे जाने वाले 20-25 प्रश्नों को पहले हल कर लेना चाहिये क्योंकि उनमें समय कम लगेगा और उत्तर ठीक होने की संभावना भी ज़्यादा होगी। ये 20-25 प्रश्न हल करने के बाद आपकी स्थिति काफी मजबूत हो चुकी होगी। इसके बाद, आप तेज़ी से वे प्रश्न करते चलें जिनमें आप सहज हैं और उन्हें छोड़ते चलें जो आपकी समझ से परे हैं। जिन प्रश्नों के संबंध में आपको लगता है कि वे पर्याप्त समय मिलने पर हल किये जा सकते हैं, उन्हें कोई निशान लगाकर छोड़ते चलें।
सीसैट के प्रश्नपत्र में भी यही प्रक्रिया अपनायी जा सकती है। अर्थात उन प्रश्नों को पहले हल कर लेना चाहिये जिसमें समय कम लगता हो और उत्तर ठीक होने की संभावना ज़्यादा होती है।
एक सुझाव यह भी हो सकता है कि एक ही प्रकार के प्रश्न लगातार करने से बचें। अगर आपको ऐसा लगे तो बीच में आधारभूत संख्यनन के कुछ सवाल कर लें, उसके बाद अन्य प्रश्नों को हल करें। सरल से कठिन प्रश्नों की ओर बढ़ने की यह प्रक्रिया दोनों प्रश्नपत्रों को हल करते समय अपनायी जा सकती है। चूँकि इस परीक्षा में किसी भी प्रकार के ऋणात्मक अंक का प्रावधान नहीं है इसलिये किसी भी प्रश्न को अनुत्तरित न छोड़ें और अंत में शेष बचे हुए प्रश्नों को अनुमान के आधार पर हल करने का प्रयास करें।

प्रश्न – 3 : परीक्षा में समय-प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है, उसके लिये क्या किया जाना चाहिये?

उत्तर :  पिछले प्रश्न के उत्तर में दिये गए सुझावों पर ध्यान दें। उसके अलावा, परीक्षा से पहले मॉक-टेस्ट शृंखला में भाग लें और हर प्रश्नपत्र में परीक्षण करें कि किस वर्ग के प्रश्न कितने समय में हो पाते हैं। ज़्यादा समय लेने वाले प्रश्नों को पहले ही पहचान लेंगे तो परीक्षा में समय बर्बाद नहीं होगा। बार-बार अभ्यास करने से गति बढ़ाई जा सकती है।

प्रश्न – 4 : ‘कट-ऑफ’ क्या है? इसका निर्धारण कैसे होता है?

उत्तर : ‘कट-ऑफ’ का अर्थ है- वे न्यूनतम अंक जिन्हें प्राप्त कर के कोई उम्मीदवार परीक्षा में सफल हुआ है। एम.पी.पी.एस.सी. परीक्षा में हर वर्ष प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा तथा साक्षात्कार के परिणाम में ‘कट-ऑफ’ तय की जाती है। ‘कट-ऑफ’ या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवार सफल घोषित किये जाते हैं और शेष असफल। आरक्षण व्यवस्था के अंतर्गत यह कट-आॉफ भिन्न-भिन्न वर्गों के उम्मीदवारों के लिए भिन्न-भिन्न होती हैं।
प्रारंभिक परीक्षा में ‘कट-ऑफ’ का निर्धारण प्रथम प्रश्नपत्र सामान्य अध्ययन के अंकों के आधार पर किया जाता है, क्योंकि द्वितीय प्रश्नपत्र सीसैट केवल क्वालिफाइंग होता है।
‘कट-ऑफ’ की प्रकृति स्थिर नहीं है। इसमें हर साल उतार-चढ़ाव होता रहता है। इसका निर्धारण सीटों की संख्या, प्रश्नपत्रों के कठिनाई स्तर तथा उम्मीदवारों की संख्या व गुणवत्ता जैसे कारकों पर निर्भर करता है।  अगर प्रश्नपत्र सरल होंगे, या उम्मीदवारों की संख्या व गुणवत्ता ऊँची होगी तो कट-ऑफ बढ़ जाएगा और विपरीत स्थितियों में अपने आप कम हो जाएगा।
कुछ लोग कहते हैं कि सीसैट के प्रश्नपत्र में क्वालिफाइंग अंक से अधिक अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को वरीयता दी जाती है जबकि कम अंक प्राप्त करने वाले परीक्षा से बाहर हो जाते हैं। वस्तुतः ये दोनों बातें भ्रामक हैं। ऐसी अफवाहों पर आपको ध्यान नहीं देना चाहिये।

प्रश्न – 5 : मैं शुरू से गणित में कमज़ोर हूँ, क्या मैं सीसैट में सफल हो सकता हूँ?

उत्तर : जी हाँ, आप ज़रूर सफल हो सकते हैं। सीसैट के 100 प्रश्नों में से गणित के अधिकतम 15-20 प्रश्न पूछे जाते हैं और उनमें से भी आधे प्रश्न तर्कशक्ति (रीजनिंग) के होते हैं। इन प्रश्नों की प्रकृति साधारण होती है अत: थोड़ा प्रयास करने से हल हो जाते हैं। हो सके तो गणित में कुछ ऐसे टॉपिक्स तैयार कर लीजिये जो आपको समझ में आते हैं और जिनसे प्रायः सवाल भी पूछे जाते हैं। उदाहरण के लिये, अगर आप प्रतिशतता और अनुपात जैसे टॉपिक्स तैयार कर लेंगे तो गणित के 3-4 प्रश्न ठीक हो जाएंगे। ऋणात्मक अंक के निर्धारित न होने से आप कुछ प्रश्न अनुमान से भी सही कर सकते हैं।

प्रश्न – 6 : एम.पी.पी.एस.सी. की प्रारम्भिक परीक्षा में ‘मध्य प्रदेश राज्य विशेष’ के सन्दर्भ में कितने प्रश्न पूछे जाते हैं? इसकी तैयारी कैसे करें?

उत्तर : एम.पी.पी.एस.सी. की प्रारम्भिक परीक्षा में ‘मध्य प्रदेश राज्य विशेष’ के सन्दर्भ में लगभग 20-25 प्रश्न पूछे जाते हैं। सामान्य अध्ययन के इस प्रश्नपत्र में कुल 100 प्रश्नों में से 20-25 प्रश्न केवल मध्य प्रदेश राज्य विशेष के सन्दर्भ में पूछा जाना इस विषय की महत्ता को स्वयं ही स्पष्ट करता है। मध्य प्रदेश राज्य विशेष’ के सन्दर्भ में मध्य प्रदेश का इतिहास, कला एवं  संस्कृति तथा भूगोल के साथ-साथ यहाँ की राजनीति एवं अर्थव्यवस्था पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं। इसी प्रकार प्रारम्भिक परीक्षा के पूरे पाठ्यक्रम का मध्य प्रदेश राज्य के सन्दर्भ में अध्ययन करना लाभदायक रहता है। मध्य प्रदेश राज्य विशेष से सम्बंधित प्रश्नों को हल करने में मध्य प्रदेश सरकार के प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘मध्य प्रदेश राज्य विशेष’ या बाजार में उपलब्ध किसी मानक राज्य स्तरीय पुस्तक का अध्ययन करना लाभदायक रहेगा।

प्रश्न – 7 : क्या ‘मॉक टेस्ट’ देने से प्रारम्भिक परीक्षा में कोई लाभ होता है? अगर हाँ, तो क्या ?

उत्तर : 

  • प्रारम्भिक परीक्षाओं के लिये मॉक टैस्ट देना अत्यंत लाभदायक सिद्ध होता है। इसका पहला लाभ है कि आप परीक्षा में होने वाले तनाव (Anxiety) पर नियंत्रण करना सीख जाते हैं।
  • दूसरे, अलग-अलग परीक्षाओं में आप यह प्रयोग कर सकते हैं कि प्रश्नों को किस क्रम में करने से आप सबसे बेहतर परिणाम तक पहुँच पा रहे हैं। इन प्रयोगों के आधार पर आप अपनी परीक्षा संबंधी रणनीति निश्चित कर सकते हैं।
  • तीसरे, समय प्रबंधन की क्षमता बेहतर होती है।
  • चौथा लाभ है कि आपको यह अनुमान होता रहता है कि अपने प्रतिस्पर्द्धियों की तुलना में आपका स्तर क्या है?
  • ध्यान रहे कि ये सभी लाभ तभी मिलते हैं अगर आपने मॉक टेस्ट शृंखला का चयन भली-भाँति सोच-समझकर किया है।

 

प्रश्न – 8 : मैं हिंदी व्याकरण में शुरू से ही अपने को असहज महसूस करता हूँ, क्या मैं एम.पी.पी.एस.सी. की मुख्य परीक्षा में सफल हो पाऊँगा?

उत्तर : जी हाँ, आप ज़रूर सफल हो सकते हैं। मुख्य परीक्षा का पंचम प्रश्नपत्र भाषागत ज्ञान से सम्बंधित है जिसमें ‘सामान्य हिंदी’ के संबंध में कुल 200 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं, जिसका उत्तर आयोग द्वारा दी गयी उत्तर-पुस्तिका में लिखना होता है। इसमें ‘सामान्य हिंदी’ का प्रश्नपत्र स्नातक स्तर का होता है। इसके पाठ्यक्रम में पल्लवन, संधि, समास, संक्षेपण, प्रारूप लेखन, वाक्य प्रयोग, शब्दावली तथा प्रारंभिक व्याकरण, अपठित गद्यांश, प्रतिवेदन एवं अनुवाद शामिल है। सच यह है कि हिंदी व्याकरण के ये प्रश्न काफी आसान होते हैं जिसमें एक सामान्य अभ्यर्थी भी नियमित अभ्यास करके औसत अंक प्राप्त कर सकता है।

प्रश्न – 9 : मैं अंग्रेज़ी में शुरू से ही कमजोर हूँ, क्या मैं एम.पी.पी.एस.सी. की मुख्य परीक्षा में सफल हो पाऊँगा?

उत्तर : जी हाँ, आप ज़रूर सफल हो सकते हैं। मुख्य परीक्षा का पंचम प्रश्नपत्र भाषागत ज्ञान से सम्बंधित है, जिसमें कुल 200 अंक के प्रश्न पूछे जाते हैं, जिसका उत्तर आयोग द्वारा दी गई उत्तर-पुस्तिका में लिखना होता है। इस प्रश्नपत्र में केवल 20 अंकों वाले अनुवाद खंड में अंग्रेजी के ज्ञान की आवश्यकता होती है (शेष 180 अंक के प्रश्न सामान्य हिंदी से सम्बंधित होते हैं)। इसमें दिये गए वाक्य/गद्यांश का अंग्रेजी से हिंदी एवं हिंदी से अंग्रेजी में अनुवाद करना होता है। सच तो यह है कि ये वाक्य/गद्यांश काफी आसान भाषा में दिये गए होते हैं और एक सामान्य विद्यार्थी भी इसका नियमित अभ्यास करके अच्छा अनुवाद कर सकता हैं।

प्रश्न – 10 : क्या सभी प्रश्नों के उत्तर को ओ.एम.आर. शीट पर एक साथ भरना चाहिये या उत्तर का चयन करने के साथ-साथ भरते रहना चाहिये?

उत्तर : प्रश्नों को हल करना जितना महत्त्वपूर्ण है उतना ही महत्त्वपूर्ण उसे ओ.एम.आर. शीट पर भरना है। बेहतर होगा कि 4-5 प्रश्नों के उत्तर निकालकर उन्हें शीट पर भरते जाएँ। हर प्रश्न के साथ उसे ओ.एम.आर. शीट पर भरने में ज़्यादा समय खर्च होता है। दूसरी ओर, कभी-कभी ऐसा भी होता है कि कई उम्मीदवार अंत में एक साथ ओ.एम.आर. शीट भरना चाहते हैं पर समय की कमी के कारण उसे भर ही नहीं पाते। ऐसी दुर्घटना से बचने के लिये सही तरीका यही है कि आप 4-5 प्रश्नों के उत्तरों को एक साथ भरते चलें। सीसैट के प्रश्नों में प्रायः एक अनुच्छेद या सूचना के आधार पर 5-6 प्रश्न पूछे जाते हैं। ऐसी स्थिति में वे सभी प्रश्न एक साथ कर लेने चाहिये और साथ ही ओ.एम आर. शीट पर भी उन्हें भर दिया जाना चाहिये। चूँकि गोलों को केवल काले बॉल पॉइंट पेन से भरना होता है, अत: उन्हें भरते समय विशेष सावधानी रखें। व्हाइटनर का प्रयोग कदापि न करें।

प्रश्न – 11 : एम.पी.पी.एस.सी. की मुख्य परीक्षा में ‘हिन्दी निबंध लेखन’ के प्रश्नपत्र की क्या भूमिका है? इसमें अच्छे अंक प्राप्त करने के लिये क्या रणनीति अपनायी जानी चाहिये?

उत्तर : इस मुख्य परीक्षा का षष्ठम प्रश्नपत्र ‘हिन्दी निबंध लेखन’ से सम्बंधित है जिसमें कुल 100 अंकों के तीन निबंध पूछे जाते हैं, जिसका उत्तर आयोग द्वारा दिये गए उत्तर-पुस्तिका में अधिकतम दो घंटे की समय सीमा में लिखना होता है। एम.पी.पी.एस.सी. की मुख्य परीक्षा में कुल 1400 अंकों में हिंदी निबंध के लिये 100 अंकों का निर्धारित होना इस विषय की महत्ता एवं अंतिम चयन में सहभागिता को स्वयं ही स्पष्ट करती है।
निबंध लेखन के माध्यम से किसी व्यक्ति की मौलिकता एवं व्यक्तित्व का परीक्षण किया जाता है। वास्तव में निबंध लेखन एक कला है जिसका विकास एक कुशल मार्गदर्शन में सतत अभ्यास से किया जा सकता हैं। पूर्व में निबंध के लिये बाज़ार में कोई स्तरीय पुस्तक उपलब्ध नहीं होने के कारण इसके लिये अध्ययन सामग्री की कमी थी। लेकिन हाल ही में कौटिल्य एकडेमी द्वारा प्रकाशित  पुस्तक ने इस कमी को दूर कर दिया है। इस पुस्तक में लिखे गए निबंध न केवल परीक्षा के दृष्टिकोण से श्रेणी के अनुसार विभाजित हैं बल्कि प्रत्येक निबंध की भाषा-शैली एवं अप्रोच स्तरीय है। इसके अतिरिक्त इसमें अच्छे अंक प्राप्त करने के लिये आप परीक्षा से पूर्व इससे सम्बंधित किसी मॉक टेस्ट शृंखला में सम्मिलित हो सकते हैं।

प्रश्न – 12 : एम.पी.पी.एस.सी. द्वारा आयोजित इस परीक्षा में साक्षात्कार की क्या भूमिका है? इसकी तैयारी कैसे करें?

उत्तर : वर्ष 2014 में एम.पी.पी.एस.सी. की इस परीक्षा में साक्षात्कार के लिये कुल 175 अंक निर्धारित किया गया (पूर्व में यह 250 अंकों का होता था) है। चूँकि मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार में प्राप्त किये गए अंकों के योग के आधार पर ही अंतिम रूप से मेधा सूची (मेरिट लिस्ट) तैयार की जाती है, इसलिये इस परीक्षा में अंतिम चयन एवं पद निर्धारण में साक्षात्कार की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।
साक्षात्कार के दौरान अभ्यर्थियों के व्यक्तित्व का परीक्षण किया जाता है, जिसमें आयोग के सदस्यों द्वारा आयोग में निर्धारित स्थान पर मौखिक प्रश्न पूछे जाते हैं, जिसका उत्तर अभ्यर्थी को मौखिक रूप से देना होता है। एम.पी.पी.एस.सी. के साक्षात्कार में आप सामान्य परिस्थितियों में न्यूनतम 70 अंक तथा अधिकतम 125 अंक प्राप्त कर सकते हैं। यद्यपि साक्षात्कार इस परीक्षा का अंतिम चरण है, लेकिन इसकी तैयारी प्रारंभ से ही शुरू कर देना लाभदायक रहता है। वास्तव में किसी भी अभ्यर्थी के व्यक्तित्व का विकास एक निरंतर प्रक्रिया है। साक्षात्कार में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिये ‘साक्षात्कार की तैयारी’ (interview preparation) शीर्षक का अध्ययन करें।

रणनीति की आवश्यकता क्यों? 

  •  मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एम.पी.पी.एस.सी.), इंदौर द्वारा आयोजित परीक्षा में सफलता सुनिश्चित करने के लिये उसकी प्रकृति के अनुरूप उचित एवं गतिशील रणनीति बनाने की आवश्यकता है।
  • यह वह प्रथम प्रक्रिया है जिससे आप की आधी सफलता प्रारम्भ में ही सुनिश्चित हो जाती है।
  • ध्यातव्य है कि मध्य प्रदेश राज्य सेवा परीक्षा सामान्यत: तीन चरणों (प्रारंभिक, मुख्य एवं साक्षात्कार) में आयोजित की जाती है, जिसमें प्रत्येक अगले चरण में पहुँचने के लिये उससे पूर्व के चरण में सफल होना आवश्यक है।
  • इन तीनों चरणों की परीक्षा की प्रकृति एक दूसरे से भिन्न होती है। अत: प्रत्येक चरण में सफलता सुनिश्चित करने के लिये  अलग-अलग रणनीति बनाने की आवश्यकता है।

प्रारम्भिक परीक्षा की रणनीति :

  •  विगत 5 से 10 वर्षों में प्रारम्भिक परीक्षा में पूछे गये प्रश्नों का सूक्ष्म अवलोकन करें और उन बिंदुओं तथा शीर्षकों पर ज्यादा ध्यान दें जिससे विगत वर्षों में प्रश्न पूछने की प्रवृत्ति ज्यादा रही है।
  • प्रथम प्रश्नपत्र ‘सामान्य अध्ययन’ के पाठ्यक्रम में सामान्य विज्ञान एवं पर्यावरण, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय महत्त्व की वर्तमान घटनाएँ, भारत का इतिहास एवं स्वतंत्र भारत, भारत का भूगोल एवं विश्व की सामान्य भौगोलिक जानकारी, भारतीय राजनीति एवं अर्थव्यवस्था, खेलकूद, मध्य प्रदेश का भूगोल, इतिहास एवं संस्कृति, मध्य प्रदेश की राजनीति एवं अर्थव्यवस्था, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी तथा कुछ अधिनियम जैसे- अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण अधिनियम) 1989, नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955 एवं मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 सम्मिलित हैं। इसकी विस्तृत जानकारी ‘पाठ्यक्रम’ शीर्षक में दी गई है।
  • इस परीक्षा के पाठ्यक्रम और विगत वर्षों में पूछे गये प्रश्नों की प्रकृति का सुक्ष्म अवलोकन करने पर ज्ञात होता है कि इसके कुछ खण्डों की गहरी अवधारणात्मक एवं तथ्यात्मक जानकारी अनिवार्य है। जैसे- ‘गदर पार्टी’ की स्थापना किसने की थी?  कंप्यूटर के किस भाग में स्मृतियों का संकलन होता है? मध्य प्रदेश का सबसे ऊँचा जलप्रपात कौन-सा है? इत्यादि ।
  • इन प्रश्नों को याद रखने और हल करने का सबसे आसान तरीका है कि विषय की तथ्यात्मक जानकारी से सम्बंधित संक्षिप्त नोट्स बना लिया जाए और उसका नियमित अध्ययन किया जाए जैसे– एक प्रश्न पूछा गया कि भारतीय संविधान में ‘संघवाद’ की अवधारणा किस देश से ली गई है? तो आप को भारतीय संविधान में विभिन्न देशों से ली गई प्रमुख अवधारणाओं की एक लिस्ट तैयार कर लेनी चाहिये ।
  • इस परीक्षा में पूछे जाने वाले विभिन्न अधिनियमों तथा संस्थाओं इत्यादि से सम्बंधित प्रश्नों के लिये भारत सरकार के प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित ‘भारत’ (इण्डिया इयर बुक) का बाज़ार में उपलब्ध संक्षिप्त विवरण तथा दृष्टि वेबसाइट पर उपलब्ध सम्बंधित पाठ्य सामग्री एवं इंटरनेट की सहायता ली जा सकती है।
  • इस परीक्षा में खेल कूद, कंप्यूटर, समसामयिक घटनाओं एवं राज्य विशेष से पूछे जाने वाले प्रश्नों की आवृति ज्यादा होती है, अत: इनका नियमित रूप से गंभीर अध्ययन करना चाहिये।
  • ‘विज्ञान’ एवं कंप्यूटर’ आधारित प्रश्नों को हल करने के लिये ‘सामान्य विज्ञान-लूसेंट’ की किताब सहायक हो सकती है। साथ ही दृष्टि प्रकाशन द्वारा प्रकाशित मानक मासिक पत्रिका ‘दृष्टि करेंट अफेयर्स टुडे’ के ‘विज्ञान विशेषांक’ का अध्ययन करना अभ्यर्थियों के लिये लाभदायक रहेगा।
  • ‘समसामयिक घटनाओं’ एवं ‘खेलकूद’ के प्रश्नों की प्रकृति और संख्या को ध्यान में रखते हुए आप नियमित रूप से किसी दैनिक अख़बार जैसे- द हिन्दू , दैनिक जागरण (राष्ट्रीय संस्करण) इत्यादि के साथ-साथ दृष्टि वेबसाइट पर उपलब्ध करेंट अफेयर्स के बिन्दुओं का अध्ययन कर सकते हैं। इसके अलावा इस खंड की तैयारी के लिये मानक मासिक पत्रिका ‘दृष्टि करेंट अफेयर्स टुडे’  का अध्ययन करना लाभदायक सिद्ध होगा।
  • राज्य विशेष से सम्बंधित प्रश्नों को हल करने में मध्य प्रदेश सरकार के प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘मध्य प्रदेश राज्य विशेष’ या बाजार में उपलब्ध किसी मानक राज्य स्तरीय पुस्तक का अध्ययन करना लाभदायक रहेगा।
  • द्वितीय प्रश्नपत्र ‘सामान्य अभिरुचि परीक्षण’ (सीसैट) केवल क्वालिफाइंग होता है। इसमें प्रश्नों की प्रकृति मैट्रिक स्तर की होती है। इसकी विस्तृत जानकारी ‘पाठ्यक्रम’ शीर्षक में दी गई है।
  • सामान्य मानसिक योग्यता से सम्बंधित प्रश्नों का अभ्यास पूर्व में पूछे गए प्रश्नों को विभिन्न खंडों में वर्गीकृत करके किया जा सकता है।
  • एम.पी.पी.एस.सी. की प्रारंभिक परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान नहीं होने के कारण किसी भी प्रश्न को अनुत्तरित न छोड़ें  और अंत में शेष बचे हुए प्रश्नों को अनुमान के आधार पर हल करने का प्रयास करें।
  • प्रारम्भिक परीक्षा तिथि से सामान्यत: 15-20 दिन पूर्व प्रैक्टिस पेपर्स एवं विगत वर्षों में प्रारम्भिक परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों  को निर्धारित समय सीमा (सामान्यत: दो घंटे) के अंदर हल करने का प्रयास करना लाभदायक होता है। इन प्रश्नों को हल करने से जहाँ विषय की समझ विकसित होती है, वहीं इन परीक्षाओं में दोहराव (रिपीट) वाले प्रश्नों को हल करना आसान हो जाता है।

मुख्य परीक्षा की रणनीति:

  • एम.पी.पी.एस.सी. की मुख्य परीक्षा की प्रकृति वर्णनात्मक/विश्लेषणात्मक होने के कारण इसकी तैयारी की रणनीति प्रारंभिक परीक्षा से भिन्न होती है।
  • प्रारंभिक परीक्षा की प्रकृति जहाँ क्वालिफाइंग होती है, वहीं मुख्य परीक्षा में प्राप्त अंकों को अंतिम मेधा सूची में जोड़ा जाता है। अत: परीक्षा का यह चरण अत्यंत महत्त्वपूर्ण एवं काफी हद तक निर्णायक होता है।
  • सामान्य अध्ययन के प्रथम प्रश्नपत्र में ‘इतिहास एवं  संस्कृति’, ‘भूगोल’, ‘जल प्रबंधन’ तथा ‘आपदा एवं आपदा प्रबंधन’ से सम्बंधित टॉपिक्स सम्मिलित हैं, जिनका अभ्यर्थियों को मानक पुस्तकों के साथ अध्ययन करना एवं मुख्य परीक्षा के प्रश्नों की प्रकृति के अनुरूप संक्षिप्त बिन्दुवार नोट्स बनाना लाभदायक रहता है।
  • इतिहास विषय के अंतर्गत इस परीक्षा में विश्व के इतिहास को भी शामिल किया गया है, जिसका गहन अवलोकन एवं प्रश्नों की प्रकृति के अनुरूप उत्तर-लेखन ही अच्छे अंक दिलाने में सहायक होगा।
  • ‘आपदा एवं आपदा प्रबंधन’ विषय पर ‘दृष्टि करेंट अफेयर्स टुडे’ के आपदा प्रबंधन विशेषांक की सामग्री परीक्षोपयोगी है।
  • सामान्य अध्ययन द्वितीय प्रश्नपत्र में ‘संविधान, शासन की राजनैतिक एवं प्रशासनिक संरचना’, ‘बाह्य एवं आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे’, ‘सामाजिक एवं महत्त्वपूर्ण विधान’, ‘सामाजिक क्षेत्र, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं सशक्तिकरण’, ‘शिक्षण प्रणाली’, ‘मानव संसाधन विकास’, ‘कल्याणकारी कार्यक्रम’, ‘लोक सेवाएँ’, ‘लोक व्यय एवं लेखा’ तथा ‘अन्तर्राष्ट्रीय संगठन’ सम्मिलित हैं।
  • इस प्रश्नपत्र के पाठ्यक्रम को मानक पुस्तकों तथा इंटरनेट की सहायता से तैयार किया जा सकता है। जैसे- भारतीय राजव्यवस्था एवं प्रशासन तथा सामाजिक समस्याओं पर मानक पुस्तकों का अध्ययन किया जा सकता है। अन्य पाठ्यक्रम के लिये इण्डिया इयर बुक (भारत) तथा इंटरनेट की सहायता ली जा सकती है।
  • सामान्य अध्ययन तृतीय प्रश्नपत्र में ‘विज्ञान एवं तकनीकी’, ‘तर्क एवं आँकड़ों की व्याख्या’, ‘विकासशील तकनीकी’, ‘ऊर्जा’, ‘पर्यावरण एवं धारणीय विकास’ एवं ‘भारतीय अर्थव्यवस्था’ शामिल हैं।
  • इस पाठ्यक्रम की मानक अध्ययन सामग्री ‘दृष्टि द विज़न संस्थान’, दिल्ली के ‘डिस्टेंस लर्निंग प्रोग्राम’ (DLP) से प्राप्त की जा सकती है, जो इस प्रश्नपत्र एवं अन्य प्रश्नपत्रों से संबंधित पाठ्यक्रम की विस्तारपूर्वक अध्ययन-सामग्री की उपलब्धिता सुनिश्चित करेगा।
  • ‘तर्क एवं आँकड़ों की व्याख्या’ के लिये अंकगणित के अवधारणात्मक पहलुओं के साथ-साथ सांख्यिकी से सम्बंधित अवधारणाओं एवं प्रश्नों का अभ्यास अत्यंत आवश्यक है।
  • सामान्य अध्ययन का चतुर्थ प्रश्नपत्र मानवीय आवश्यकताओं एवं अभिप्रेरणाओं से संबंधित है। इसकी विस्तृत जानकारी ‘पाठ्यक्रम’ शीर्षक में दी गई है।
  • इस प्रश्नपत्र के पाठ्यक्रम की सामग्री के लिये दृष्टि प्रकाशन द्वारा प्रकाशित ‘दृष्टि करेंट अफेयर्स टुडे’ का ‘एथिक्स विशेषांक’ अभ्यर्थियों के लिये विशेष उपयोगी रहेगा। साथ ही सभी प्रश्नपत्रों से संबंधित प्रश्नों का उत्तर-लेखन अभ्यास, परीक्षा में प्रभावशाली प्रस्तुतिकरण  में सहायक रहेगा।
  • पंचम प्रश्नपत्र ‘सामान्य हिंदी’ से संबंधित है। इस प्रश्नपत्र का उद्देश्य अभ्यर्थी की भाषागत कौशल की जाँच करना है। इसके पाठ्यक्रम की विस्तृत जानकारी ‘विज्ञप्ति का संक्षिप्त विवरण’ के अंतर्गत ‘पाठ्यक्रम’ शीर्षक में दी गई है।
  • इस प्रश्नपत्र का स्तर स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण छात्रों के समकक्ष होगा। इसके लिये हिंदी की स्तरीय पुस्तक जैसे– वासुदेवनंदन, हरदेव बाहरी द्वारा लिखित पुस्तकों का गहराई से अध्ययन एवं उपरोक्त विषयों पर निरंतर लेखन कार्य करना लाभदायक रहेगा।
  • षष्ठम प्रश्नपत्र ‘हिन्दी निबंध लेखन’ का होगा। इसके अंतर्गत अभ्यर्थियों को तीन निबंध लिखने होंगे।

⇒ निबंध लेखन की रणनीति के लिये इस Link पर क्लिक करें

  • प्रथम निबंध (लगभग 1000 शब्दों में) के लिये 50 अंक, द्वितीय निबंध (लगभग 250 शब्दों में) के लिये 25 अंक एवं तृतीय निबंध (लगभग 250 शब्दों में) के लिये 25 अंक निर्धारित किया गया है।
  • निबंध को रोचक बनाने के लिये श्लोक, कविता, उद्धरण, महापुरुषों के कथन इत्यादि का प्रयोग किया जा सकता है। निबंध की तैयारी के लिये दृष्टि प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘निबंध-दृष्टि’ का अध्ययन करना लाभदयक रहेगा।
  • उपरोक्त से स्पष्ट है कि मुख्य परीक्षा के समस्त पाठ्यक्रम का मध्य प्रदेश राज्य के सन्दर्भ में अध्ययन किया जाना लाभदायक रहेगा।
  • परीक्षा के इस चरण में सफलता प्राप्त करने के लिये सामान्यत: 60-65% अंक प्राप्त करने की आवश्यकता होती है। हालाँकि पाठ्यक्रम में बदलाव के कारण यह प्रतिशत कुछ कम भी हो सकता है।
  • परीक्षा के सभी विषयों में कम से कम शब्दों में की गई संगठित, सूक्ष्म और सशक्त अभिव्यक्ति को श्रेय मिलेगा।
  • विदित है कि वर्णनात्मक प्रकृति वाले प्रश्नपत्रों के उत्तर को उत्तर-पुस्तिका में लिखना होता है, अत: ऐसे प्रश्नों के उत्तर लिखते समय लेखन-शैली एवं तारतम्यता के साथ-साथ समय प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिये।
  • लेखन शैली एवं तारतम्यता का विकास निरंतर अभ्यास से आता है, जिसके लिये विषय की व्यापक समझ अनिवार्य है।

⇒ मुख्य परीक्षा में अच्छी लेखन शैली के विकास संबंधी रणनीति के लिये इस Link पर क्लिक करें

साक्षात्कार की रणनीति:

  • मुख्य परीक्षा में चयनित अभ्यर्थियों (सामान्यत: विज्ञप्ति में वर्णित कुल रिक्तियों की संख्या का 3 गुना) को सामान्यत: एक माह पश्चात आयोग के समक्ष साक्षात्कार के लिये उपस्थित होना होता है।
  • साक्षात्कार किसी भी परीक्षा का अंतिम एवं महत्त्वपूर्ण चरण होता है।
  • अंकों की दृष्टि से कम लेकिन अंतिम चयन एवं पद निर्धारण में इसका विशेष योगदान होता है।
  • साक्षात्कार के दौरान अभ्यर्थियों के व्यक्तित्व का परीक्षण किया जाता है, जिसमें आयोग के सदस्यों द्वारा आयोग में निर्धारित स्थान पर मौखिक प्रश्न पूछे जाते हैं जिसका उत्तर अभ्यर्थी को मौखिक रूप से देना होता है।
  • वर्ष 2014 में एम.पी.पी.एस.सी. की इस परीक्षा में साक्षात्कार के लिये कुल 175 अंक निर्धारित किया गया (पूर्व में यह 250 अंकों का होता था)।
  • आपका अंतिम चयन मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार में प्राप्त किये गए अंकों के योग के आधार पर तैयार किये गए मेधा सूची के आधार पर होता है।
  • साक्षात्कार में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिये ‘साक्षात्कार की तैयारी’ (interview preparation) शीर्षक का अध्ययन करें।

परिचय

  • साक्षात्कार (Interview) किसी भी परीक्षा का अंतिम एवं महत्त्वपूर्ण चरण होता है।
  • इसमें न तो प्रारंभिक परीक्षा की तरह सही उत्तर के लिये विकल्प दिये जाते हैं और न ही मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्रों की तरह अपनी सुविधा से प्रश्नों के चयन की सुविधा होती है। साक्षात्कार में आपको हर प्रश्न का उत्तर देना अनिवार्य होता है, साथ ही आपके द्वारा किसी भी प्रश्न के लिये दिये गए उत्तर पर प्रति-प्रश्न (Counter-question) भी पूछे जाने की संभावना रहती है। आपके द्वारा दिये गए किसी भी गलत या हल्के उत्तर का ‘नैगेटिव मार्किंग’ जैसा ही प्रभाव पड़ने की संभावना रहती है। किसी भी उम्मीदवार के लिये साक्षात्कार के चरण की सबसे मुश्किल बात यह होती है कि प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा के विपरीत इसके लिये कोई निश्चित पाठ्यक्रम निर्धारित नहीं है। यही वजह है कि साक्षात्कार के दौरान पूछे जाने वाले प्रश्नों का दायरा बहुत व्यापक होता है।
  • सिविल सेवा परीक्षा में इंटरव्यू के लिये कुल 275 अंक निर्धारित हैं। सामान्य रूप से देखें तो मुख्य परीक्षा के अंकों (1750 अंक) की तुलना में इस चरण के लिये निर्धारित अंक कम अवश्य हैं लेकिन अंतिम चयन एवं पद निर्धारण में इंटरव्यू के अंकों की विशेष भूमिका रहती है।
  • मुख्य परीक्षा में चयनित उम्मीदवारों को सामान्यत: एक महीने के बाद इंटरव्यू के लिये बुलाया जाता है।
  • वस्तुतः सामान्य मान्यता यह है कि इंटरव्यू के दौरान अभ्यर्थियों के व्यक्तित्व का परीक्षण किया जाता है, जिसमें आयोग द्वारा चयनित इंटरव्यू बोर्ड के सदस्यों द्वारा उम्मीदवारों से मौखिक प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनका उत्तर भी उम्मीदवार को मौखिक रूप में ही देना होता है। हालाँकि, कई बार ऐसा भी हुआ है कि कुछ राज्य लोक सेवा आयोगों में इंटरव्यू बोर्ड के सदस्यों ने उम्मीदवार से कुछ लिखने की भी अपेक्षा की। इंटरव्यू की  प्रक्रिया अभ्यर्थियों की संख्या के अनुसार एक से अधिक दिनों तक चलती है।
  • मुख्य परीक्षा एवं इंटरव्यू में प्राप्त अंकों के योग के आधार पर अंतिम रूप से मेधा सूची (Merit list) तैयार की जाती है।
  • इस चरण में शामिल किये गए सभी अभ्यर्थियों का इंटरव्यू समाप्त होने के सामान्यत: एक सप्ताह पश्चात् अंतिम रूप से चयनित उम्मीदवारों की सूची जारी की जाती है।

इंटरव्यू की तैयारी क्यों करें?

  • मुख्य परीक्षा देने के बाद परीक्षार्थियों को यह उम्मीद रहती है कि उन्हें इंटरव्यू देने का अवसर मिलेगा। उनमें से कुछ मुख्य परीक्षा के तुरंत बाद इंटरव्यू की तैयारी शुरू कर देते हैं जबकि कुछ मुख्य परीक्षा के परिणाम का इंतज़ार करते हैं और परीक्षा में सफल होने पर ही इंटरव्यू के बारे में सोचना शुरू करते हैं।
  • हालाँकि, यह कहना तो ठीक नहीं होगा कि मुख्य परीक्षा परिणाम आने से पहले ही तैयारी शुरू करने वाले अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में अनिवार्यतः ज़्यादा अंक मिलते हैं, लेकिन इस बात की संभावना ज़रूर रहती है क्योंकि इंटरव्यू के अंक कई कारकों पर निर्भर होते हैं जिनमें तैयारी एक महत्त्वपूर्ण कारक है।
  • ऐसा हो सकता है कि बहुत कम तैयारी के बावजूद कोई उम्मीदवार काफी अच्छे अंक हासिल कर ले जबकि 3-4 महीने तैयारी में जुटे रहने के बावजूद कोई उम्मीदवार अच्छे अंक हासिल न कर पाए।
  • इस अंतराल की वज़ह यह है कि इंटरव्यू की तैयारी वस्तुतः जीवन के शुरुआती चरण से ही निरंतर चलती रहती है। जिन उम्मीदवारों को घर, स्कूल और कॉलेज में विविध अनुभव और अवसर हासिल हुए होते हैं, उनका व्यक्तित्व प्रायः ज़्यादा विकसित हो जाता है। ऐसे उम्मीदवार अगर बिना किसी तैयारी के भी इंटरव्यू देने चले जाएँ तो इस बात की पर्याप्त संभावना बनती है कि वे अच्छे अंक हासिल कर लेंगे।
  • इंटरव्यू की तैयारी करने से यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि उम्मीदवार को अच्छे अंक मिल ही जाएंगे और तैयारी नहीं करने से यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि उसे खराब अंक ही मिलेंगे। फिर भी एक बात तय है कि उम्मीदवार के व्यक्तित्व का विकास जिस भी स्तर पर हुआ है, अगर वह व्यवस्थित तैयारी करेगा तो अपने स्तर पर सामान्यतः मिलने वाले अंकों में कुछ अंकों का इज़ाफा तो कर ही लेगा।
  • हमारा उद्देश्य उम्मीदवारों को यह समझाना है कि उन्हें बिल्कुल भी समय व्यर्थ नहीं करना चाहिये। हिंदी व अन्य भारतीय भाषाओं के माध्यम से परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों को तो वैसे भी इंटरव्यू में औसतन कम अंक प्राप्त होते हैं क्योंकि उन्हें बचपन से वैसा माहौल ही नहीं मिला होता है जिसमें इंटरव्यू बोर्ड के सदस्यों को पसंद आने वाला व्यक्तित्व अपने आप उभरता है। उनके लिये तो यह और भी ज़रूरी हो जाता है कि मुख्य परीक्षा के तुरंत बाद इंटरव्यू की तैयारी में जुट जाएँ।
  • ध्यान रहे कि अंतिम परिणाम में सिर्फ 1 अंक के अंतर से भी कई बार 10 रैंक तक का फर्क पड़ जाता है। इसलिये अगर अभी की मेहनत से 20-25 या अधिक अंकों का इज़ाफा किया जा सकता है तो इस अवसर को छोड़ना मूर्खता ही होगी।
  • अतः श्रेयस्कर यही होगा कि आप अनुकूल समय प्रंबंधन द्वारा सही दिशा में तैयारी आरंभ कर दें।

इंटरव्यू की तैयारी कैसे करें?

  • उम्मीदवारों को यह सवाल बार-बार परेशान करता है कि इतनी कठिन परीक्षा की तैयारी कैसे की जाए- क्या पढ़ा जाए और क्या नहीं? सिर्फ़ पढ़ा जाए या किताबों से बाहर भी झाँका जाए? आत्मविश्वास कैसे लाया और बढ़ाया जाए? ऐसा व्यक्तित्व कैसे गढ़ा जाए कि उस आधे घंटे के भीतर हम इंटरव्यू पैनल के सदस्यों को सम्मोहित कर पाने में सफल हो जाएँ।
  • इसके लिये सर्वप्रथम यह जानना आवश्यक है कि इंटरव्यू बोर्ड के सदस्य आखिर किस आधार पर उम्मीदवारों का मूल्यांकन करते हैं? कुछ लोग सोचते हैं कि हम जितने प्रश्नों के सही जवाब दे पाते हैं, उसी के अनुपात में हमें अंक मिलते हैं; यह इंटरव्यू को लेकर व्याप्त सबसे बड़ा भ्रम है।
  • सच यह है कि कुछ लोग लगभग सभी सवालों के सही जवाब देने के बावजूद 25-30% अंकों पर अटक जाते हैं जबकि कुछ उम्मीदवार दस से अधिक प्रश्नों के उत्तर में ‘सॉरी’ बोलने के बाद भी 65-70% तक अंक अर्जित कर लेते हैं।
  • फिर प्रश्न उठता है कि आखिर किन कसौटियों के आधार पर इंटरव्यू में अंक मिलते हैं? क्या यह चेहरे की सुंदरता और ड्रेसिंग सेंस से तय होता है? क्या सदस्य हमारी भाषा-शैली और हाव-भाव से हमारा मूल्यांकन करते हैं? क्या अंकों का सीधा संबंध हमारे उत्तरों की गुणवत्ता से होता है? क्या जीवन और विभिन्न मुद्दों के प्रति हमारा नज़रिया इसमें केंद्रीय भूमिका निभाता है?
  • सच बात यह है कि ये सभी चीज़ें संयुक्त रूप से इंटरव्यू बोर्ड पर असर डालती हैं। हालाँकि यह दावा करना कठिन है कि इनका अनुपात क्या होगा? हर उम्मीदवार के मामले में इन तत्त्वों का अनुपात अलग-अलग हो सकता है।
  • संभव है कि कोई उम्मीदवार तथ्यों में कमज़ोर हो, दिखने में कम आकर्षक हो पर अपने सुलझे हुए दृष्टिकोण की बदौलत बोर्ड पर ठीक-ठाक प्रभाव कायम करने में सफल हो जाए। इसी तरह, यह भी संभव है कि कोई उम्मीदवार अपने आकर्षक चेहरे, प्रभावी ड्रेसिंग कौशल तथा जादुई अभिव्यक्ति सामर्थ्य के सहारे अपनी ज्ञान संबंधी कमियों को एक हद तक ढकने में कामयाब हो जाए।
  • इसके लिये आवश्यक है कि उम्मीदवार सर्वप्रथम अपने बेहतर व कमज़ोर पक्षों की पहचान कर लें, कमज़ोर पक्षों को सुधारने का निरंतर प्रयास करें और इंटरव्यू के समय कोशिश करें कि बेहतर पक्ष ज़्यादा से ज़्यादा सामने आएँ जबकि कमज़ोर पक्ष यथासंभव छिपे रहें।
  • सामान्यत: जिस कसौटी पर इंटरव्यू में अंक तय होते हैं, वह सिर्फ यह है कि उम्मीदवार की उपस्थिति में बोर्ड के सदस्यों ने कैसा महसूस किया? उन्हें इंटरव्यू का समय पूरा करने के लिये संघर्ष करना पड़ा या उन्हें पता ही नहीं चला कि समय कब गुज़र गया। उन्हें सिर्फ बताने का मौका मिला या कुछ नया सीखने का भी? उन्हें रोचकता का अनुभव हुआ या नीरसता का? उन्हें उम्मीदवार के उत्तरों में घिसी-पिटी बातें मिलीं या कुछ नया और मौलिक भी मिला? उन्हें उम्मीदवार डींगें हाँकने वाला और झूठा लगा या ईमानदारी से अपनी कमियाँ स्वीकार लेने वाला विनम्र और सच्चा व्यक्ति लगा? ये सब चीज़ें मिलकर उस अनुभूति या ‘मूड’ का निर्माण करती हैं जो उम्मीदवार का परिणाम तय करता है।
  • फिर भी, अगर इन तत्त्वों का अनुपात तय करना ही है तो मैं कहूंगा कि आकर्षक चेहरा और ड्रेसिंग सेंस शायद 5-10% से अधिक फायदा नहीं पहुँचाते होंगे। हाँ, अगर ड्रेसिंग सेंस बहुत ख़राब हो तो यह ज़्यादा नुकसान कर सकता है।
  • अभिव्यक्ति कौशल की भूमिका इससे ज़्यादा होती है। बहुत अच्छी अभिव्यक्तिगत क्षमता आपको 20-25% तक का फायदा पहुँचा सकती है तो इसका अभाव इतना या इससे अधिक नुकसान पहुँचा सकता है। अगर बोर्ड के सदस्य परिपक्व हों तो उम्मीदवार की तथ्यात्मक जानकारी भी 10-15% से ज़्यादा असर नहीं डालतीं। हाँ, अगर उम्मीदवार अपने क्षेत्र से संबंधित या एकदम सरल प्रश्नों के उत्तर न दे पाए तो नुकसान ज़्यादा अवश्य हो जाता है।
  • सबसे अधिक महत्त्व होता है उम्मीदवार के नज़रिये का, अर्थात् किसी मुद्दे पर वह कितने व्यापक और संतुलित तरीके से सोच पाता है, किसी नई और तात्कालिक समस्या को सुलझाने के लिये सही और त्वरित निर्णय कर पाता है या नहीं, मुद्दे के व्यावहारिक और सैद्धांतिक पक्षों और उनके अंतर्संबंधों को कितनी गहराई से समझ पाता है इत्यादि।
  • उम्मीदवारों को हमारा यह सुझाव है कि आप जब भी किसी विवादास्पद मुद्दे पर विचार करें तो तटस्थ होकर उसके दोनों पक्षों की गहराई में जाएँ। विचार करते समय अपने हितों और नुकसानों को चेतना पर हावी न होने दें। कागज़ पर वह विषय लिखकर दो हिस्सों में पक्ष और विपक्ष के तर्क व तथ्य नोट करें। ज़्यादा तर्क न सूझें तो इंटरनेट का सहारा लें। दोस्तों से उस मुद्दे पर वाद-विवाद या विमर्श करें। अंत में दो तीन वाक्यों में अपनी राय लिख लें।
  • जब आप यह प्रक्रिया 15-20 बार दोहरा लेंगे तो खुद पाएंगे कि आपका नज़रिया संतुलित तथा परिपक्व होने लगा है और आपके अंदर अदभुत आत्मविश्वास का विकास हुआ है।

इंटरव्यू की तैयारी के विविध पक्ष

  • इंटरव्यू की तैयारी को कुल 4 भागों में बाँटकर देखा जा सकता है-
    1. ज्ञान पक्ष
    2. दृष्टिकोण पक्ष
    3. अभिव्यक्ति पक्ष
    4. वेशभूषा आदि की तैयारी

ज्ञान पक्ष:

  • यह इंटरव्यू की तैयारी के दौरान सबसे अधिक तनाव पैदा करने वाला पक्ष है। कारण यह है कि लगभग हर उम्मीदवार के बायोडाटा में इतने सारे पक्ष लिखे होते हैं कि अगर वह उन सभी क्षेत्रों से जुड़ी जानकारियाँ याद करना चाहे तो यह प्रायः असंभव हो जाता है।
  • इस कठिनाई के कारण कुछ पक्षों की तैयारी छूट ही जाती है किंतु इंटरव्यू तक लगातार यह भय बना रहता है कि कहीं उसी हिस्से से प्रश्न न पूछ लिये जाएँ जिसकी तैयारी कम हुई है। यहाँ सवाल है कि इस भय से मुक्ति कैसे मिल सकती है?
  • सबसे पहले यह मान लेना चाहिये कि ज्ञान या जानकारियों के स्तर पर उम्मीदवार की तैयारी चाहे जितनी भी हो, अगर इंटरव्यू बोर्ड के सदस्य ठान लेंगे तो उसे किसी न किसी क्षेत्र में उलझा ही देंगे। उनके लिये यह अनुमान करना बहुत मुश्किल नहीं होता कि उम्मीदवार किस क्षेत्र में कमज़ोर है।
  • अगर वो उम्मीदवार को परेशान करना चाहें तो कमज़ोर क्षेत्र का अनुमान करके लगातार उसी से प्रश्न पूछते रहेंगे ताकि उम्मीदवार पूरी तरह पराजय स्वीकार कर ले। इसलिये, तैयारी के स्तर पर हमें अपना उद्देश्य यह नहीं रखना चाहिये कि एक भी प्रश्न हमारी परिधि से बाहर का न हो। उद्देश्य सिर्फ इतना होना चाहिये कि सामान्यतः हम सभी प्रश्नों के उत्तर दे सकें, और अगर हमसे कोई प्रश्न छूटे तो वह केवल वही होना चाहिये जो अपनी प्रकृति में बेहद जटिल हो। महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इंटरव्यू बोर्ड के सदस्य भी यह समझते हैं कि कोई उम्मीदवार सभी प्रश्नों के उत्तर नहीं दे सकता।
  • इंटरव्यू के दौरान कई बार ऐसी भी स्थिति बन जाती है कि बोर्ड के किसी सदस्य द्वारा पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर बाकी सदस्यों को भी नहीं पता होते। ऐसी स्थिति में वे सहज रूप से यह समझते हैं कि अगर उम्मीदवार बहुत कठिन और अप्रचलित प्रश्न का उत्तर नहीं दे पा रहा है तो यह उसके प्रति नकारात्मक राय बनाने का पर्याप्त कारण नहीं है।
  • बहुत कठिन प्रश्नों पर तो बोर्ड की संवेदना अपने आप उम्मीदवार के पक्ष में मुड़ जाती है। हाँ, अगर प्रश्न आसान है या उम्मीदवार की पृष्ठभूमि से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है तो उसका जवाब न देना अपराध जैसा मामला बनता है और उम्मीदवार को उसकी सज़ा भुगतनी पड़ सकती है।
  • चूँकि ज्ञान या जानकारियों का पक्ष अनंत है, इसलिये सबसे पहले यही समझना चाहिये कि किसी क्षेत्र विशेष पर उम्मीदवार को कितना पढ़ना चाहिये और कितना हिस्सा छोड़ देना चाहिये? अगर इस विवेकशीलता का प्रयोग न किया जाए तो एक विशेष समस्या सामने आती है।
  • उम्मीदवार सबसे पहले जिस विषय को उठाता है, अपना अधिकांश समय उसी में गँवा देता है क्योंकि उसे यह संतोष ही नहीं मिलता कि उस क्षेत्र में उसकी तैयारी पूरी हो गई है। इस तरीके से पढ़ते-पढ़ते वह 10-12 प्रमुख क्षेत्रों में से 2-3 को ही ठीक से तैयार कर पाता है और बाकी क्षेत्र छूट जाते हैं।
  • आपके साथ यह दुर्घटना न हो, इसके लिये ज़रूरी है कि ‘क्या पढ़ना है’ से ज़्यादा स्पष्ट समझ इस विषय पर हो कि ‘क्या नहीं पढ़ना है’।
  • सबसे पहले उन विषयों की सूची बना लीजिये जो आपके बायोडाटा में दिखाई पड़ते हैं। इन विषयों में आपका वैकल्पिक विषय तो है ही, साथ ही सामान्य अध्ययन के प्रमुख खंड, आपकी अकादमिक पृष्ठभूमि के विषय, आपकी रुचियाँ, आपका गृह राज्य, गृह जनपद आदि सभी शामिल हैं।
  • अपने बायोडाटा को बोर्ड सदस्य की निगाह से कई बार पढ़िये और सोचिये कि उसकी नज़र किस-किस शब्द पर टिक सकती है? ऐसे सभी शब्दों को रेखांकित कर लीजिये और मानकर चलिये कि आपको उन सभी पर किसी न किसी मात्रा में तैयारी करने की ज़रूरत है।
  • इसके बाद एक-एक करके विभिन्न विषयों को उठाइये और संभावित प्रश्नों की सूची बनाइये। इस सूची को तीन भागों में बाँटकर तैयार कीजिये-
    1. अत्यधिक संभावित प्रश्न
    2. सामान्य संभावित प्रश्न
    3. कम संभावित प्रश्न
  • कौन सा प्रश्न इंटरव्यू के लिये कितना संभावित है, इसका निर्धारण करते हुए सभी विषयों को बोर्ड सदस्यों की निगाह से देखने की आदत विकसित कीजिये।
  • बेहतर होगा कि आप इन प्रश्नों की सूची बनाने में सिर्फ अपने विवेक से काम लेने की बजाय अपने कुछ साथियों को भी शामिल कर लें- खासतौर पर उन्हें जो आपके साथ इंटरव्यू की तैयारी कर रहे हैं और वह विषय या क्षेत्र उनके बायोडाटा में भी शामिल है।
  • ये सूचियाँ इस तरह से बनाई जानी चाहियें कि बाद में भी नए प्रश्नों को शामिल करने की संभावना बनी रहे।
  • अगर आप अपने बायोडाटा के हर क्षेत्र पर ऐसी सूची बना लेंगे तो संभवतः आपके पास 500-700 प्रश्न इकट्ठे हो जाएंगे जिनमें से 100-150 प्रश्न ‘अत्यधिक संभावित’ वर्ग के होंगे। बेहतर होगा कि सबसे पहले आप इन्हीं 100-150 प्रश्नों की तैयारी करें क्योंकि पूरी संभावना है कि आपके इंटरव्यू का 50-70 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं प्रश्नों के इर्द-गिर्द घूमेगा।
  • अगर आपने इन प्रश्नों पर महारत हासिल कर ली तो आप बोर्ड को यह महसूस कराने में सफल हो जाएंगे कि आप अत्यंत गंभीर तथा योग्य उम्मीदवार हैं।
  • अब सवाल यह उठता है कि इन प्रश्नों की तैयारी कैसे करें? इसका सही तरीका है कि प्रश्नों से जुड़ी जानकारियों को 2-3 बिंदुओं के रूप में नोट करते जाएँ। कुछ उम्मीदवार तो पूरे-पूरे उत्तर लिखकर तैयार करते हैं जो दरअसल एक व्यर्थ प्रक्रिया है। वे भूल जाते हैं कि इंटरव्यू के तनाव भरे माहौल में रटे हुए उत्तर देना संभव नहीं होता। वहाँ आपको सिर्फ कुछ बिंदु याद आते हैं जो आपकी अपनी सहज भाषा में ही व्यक्त होते हैं। इसलिये, अपने नोट्स केवल बिंदुओं के रूप में ही बनाएँ ताकि आपका समय व्यर्थ न हो और आप बेझिझक उत्तर दे सकें।
  • यदि 2-4 प्रश्न ऐसे हों जो आपको निरंतर बेचैन करते हों तो उनके उत्तर लिखकर रख लेना गलत नहीं होगा क्योंकि उन उत्तरों से आपका आत्मविश्वास बना रहेगा। वैसे भी, 2-4 याद किये हुए उत्तरों का प्रयोग तो इंटरव्यू के तनावपूर्ण माहौल में भी किया ही जा सकता है।
  • प्रश्नों की सूची बनाने के बारे में दो बातों पर विशेष ध्यान दें। एक तो उस विषय पर यह ज़रूर देख लें कि उसमें आज के समय में क्या नया हो रहा है? उदाहरण के लिये, अगर आपका विषय हिंदी साहित्य है तो आपको हल्का-फुल्का यह भी पता होना चाहिये कि पिछले 5-10 वर्षों में कौन सी प्रसिद्ध रचनाएँ लिखी गई हैं? दूसरे, इस बात पर विशेष ध्यान दें कि किसी विषय का प्रशासन में क्या योगदान हो सकता है? आपका विषय चाहे दर्शनशास्त्र ही क्यों न हो, पूरी संभावना है कि आपसे यह पूछा जाएगा कि दर्शन आपको प्रशासन के क्षेत्र में क्या मदद पहुँचाएगा?

दृष्टिकोण पक्ष:

  • इंटरव्यू की तैयारी में सबसे अधिक समय भले ही ज्ञान या जानकारियों के संग्रहण व स्मरण में खर्च होता हो, पर सच यह है कि जो चीज़ इंटरव्यू में सफलता की दृष्टि से सबसे अधिक असर रखती है, वह है- विभिन्न मुद्दों के प्रति उम्मीदवार का दृष्टिकोण। एक अच्छा इंटरव्यू बोर्ड उम्मीदवार के दृष्टिकोण से ही तय करता है कि वह सिविल सेवाओं में शामिल होने के लिये उपयुक्त है या नहीं?
  • संघ लोक सेवा आयोग सिविल सेवा के उम्मीदवारों से अपेक्षा रखता है कि उनका दृष्टिकोण एकतरफा न होकर संतुलित तथा प्रगतिशील हो। इसलिये, आपको दिन-प्रतिदिन की चर्चाओं में उठने वाले विवादास्पद मुद्दों के दोनों पक्षों को गहराई से देखने का अभ्यास तत्काल शुरू कर देना चाहिये।
  • आपके उत्तरों से यह भाव स्पष्ट होना चाहिये कि आप किसी भी विषय पर निर्णय करने से पहले अपनी तर्क बुद्धि का सही उपयोग करते हैं, किसी के बहकावे या उकसावे में नहीं आते।
  • इसके लिये ज़्यादा से ज़्यादा विवादास्पद मुद्दों पर आपको अभ्यास करते रहने की ज़रूरत है। उदाहरण के लिये- समलैंगिकता उचित है या नहीं, वेश्यावृत्ति को वैधता प्रदान की जानी चाहिये या नहीं, शराबबंदी की नीति उचित है या नहीं आदि। इस तरह के हर उस सवाल के पक्ष-विपक्ष में अपने तर्क सोचकर रखिये जो अख़बारों या सोशल मीडिया के माध्यम से आपके सामने आता है। कुछ अपवाद के मुद्दों को छोड़कर आपका दृष्टिकोण संतुलित और व्यावहारिक होना चाहिये।
  • हो सके तो पक्ष-विपक्ष के सभी तर्कों को नोट कर लेने के बाद एक पैराग्राफ में अपना निष्कर्ष लिखने का अभ्यास भी करें।
  • निष्कर्ष की भाषा सीधी सपाट या एकतरफा न होकर ऐसी होनी चाहिये कि उसमें समस्या की जटिलता, आपकी प्रगतिशीलता तथा संतुलन बनाने की क्षमता ठीक तरीके से अभिव्यक्त हो।

अभिव्यक्ति पक्ष:

  • इंटरव्यू की तैयारी का एक महत्त्वपूर्ण पक्ष, जिसे अधिकांश उम्मीदवार गौण समझकर छोड़ देते हैं, अभिव्यक्ति क्षमता से जुड़ा है। सरल भाषा में इसका अर्थ है कि उम्मीदवार अपनी बातों को इंटरव्यू बोर्ड के सामने कितनी प्रभावशीलता के साथ प्रस्तुत करता है? उसकी शब्दावली, उच्चारण, उतार-चढ़ाव, शारीरिक अभिव्यक्तियाँ आदि वे पक्ष हैं जो समग्र रूप में उसकी अभिव्यक्ति शैली को परिभाषित करते हैं।
  • पहली बाधा यही है कि इंटरव्यू बोर्ड के सामने उम्मीदवार घबराहट के मारे मौन न हो जाए। अगर आपकी पृष्ठभूमि में ऐसे अनुभव नहीं रहे हैं तो मुख्य परीक्षा के बाद से ही 8-10 मित्रों का समूह बना लीजिये और दैनिक तौर पर उन सभी के सामने किसी अचानक मिले विषय पर 10-15 मिनट निरंतर बोलने की कोशिश कीजिये। एक महीना होते-होते आपके लिये अपनी बात रखना कठिन नहीं रह जाएगा।
  • अगर आप किसी ऐसे क्षेत्र का पर्याप्त अनुभव रखते हैं जिसमें अभिव्यक्ति शैली का विकास अपने आप हो जाता है तो आप प्रायः निश्चिंत रह सकते हैं। उदाहरण के लिये, अगर आपने स्कूल या कॉलेज स्तर पर वाद-विवाद या भाषण प्रतियोगिताओं में खूब भाग लिया है या आपको अध्यापन या वकालत जैसे कार्य का अनुभव है तो पहली बाधा दूर हो जाती है।
  • अपनी बात को मंच पर रखना एक बात है और इंटरव्यू बोर्ड के समक्ष रखना दूसरी बात है। कई बार कुछ अध्यापक और वकील यहीं मार खा जाते हैं। वे अपने व्यवसाय में विद्यार्थी या मुवक्किल के सामने जिस वर्चस्वशाली मनःस्थिति में होते हैं, कई बार उसी मनःस्थिति से इंटरव्यू बोर्ड में पेश आते हैं जो अंततः उनके लिये घातक साबित होता है।
  • इसलिये, बेहतर यही है कि अपनी अभिव्यक्ति को इंटरव्यू के अनुकूल ढाला जाए। इसके लिये उचित समय पर आप 4 मित्रों का समूह बनाएँ और उनमें से 3-3 मित्र मिलकर चौथे मित्र का इंटरव्यू लें। कोशिश यह होनी चाहिये कि आज से इंटरव्यू वाले दिन तक रोज़ कम-से-कम एक मॉक इंटरव्यू का अभ्यास होता रहे।
  • यह ज़रूर ध्यान रखिये कि आप मित्रों द्वारा दी गई हर राय को महत्त्व न दें, केवल उन्हीं सलाहों को स्वीकार करें जिन्हें लेकर उनमें आम राय है और आप खुद भी उनसे सहमत हैं।
  • ऐसे साक्षात्कारों का निरंतर अभ्यास होने के बाद कोई वज़ह नहीं रह जाती कि उम्मीदवार इंटरव्यू बोर्ड में नर्वस हो या खुद को ठीक से व्यक्त न कर पाए।
  • एक उपयोगी सुझाव यह भी है कि इंटरव्यू की तैयारी बंद कमरे में करने की बजाय गंभीर मित्रों के छोटे समूह के साथ करें और अधिक से अधिक मुद्दों पर सामूहिक परिचर्चा करें। इससे बहुत कम समय में किसी विषय के सभी आयाम खुल जाते हैं, साथ में अभिव्यक्ति क्षमता तो मज़बूत होती ही है।

वेशभूषा आदि की तैयारी:

  • इंटरव्यू की तैयारी में सबसे पहला प्रश्न यही आता है कि उम्मीदवार इंटरव्यू में क्या पहने और किस तरह की वेशभूषा से परहेज करे? इसका सामान्य सा नियम यही है कि एक औपचारिक बैठक के लिये व्यक्ति की जैसी वेशभूषा होनी चाहिये, वैसी ही वेशभूषा इंटरव्यू में अपेक्षित होती है।
  • इस पक्ष का अर्थ है कि उम्मीदवार इंटरव्यू में प्रभावशाली व्यक्तित्व का धनी दिखे। उसकी वेशभूषा, हेयर स्टाइल, बैठने और चलने का तरीका आदि इसमें शामिल हैं।

पुरुष उम्मीदवारों की वेशभूषा

  • यूपीएससी के इंटरव्यू में पुरुष उम्मीदवारों की वेशभूषा औपचारिक (Formal) होनी चाहिये। इसके लिये बेहतर होगा कि वे पूरी बाँहों की औपचारिक (Formal) सी दिखने वाली कमीज़ (Shirt) पहनें और वैसी ही औपचारिक (Formal) पैंट या ट्राउज़र्स को प्राथमिकता दें।
  • ध्यान रखें कि वेशभूषा का औपचारिक होना अत्यंत आवश्यक है। उम्मीदवार को किसी भी स्थिति में जींस जैसी अनौपचारिक (Casual) वेशभूषा से बचना चाहिये। आधी बाँह की कमीज़ भी प्रायः अनौपचारिक मानी जाती है, इसलिये बेहतर होगा कि उम्मीदवार इस तरह के किसी भी परिधान को धारण करने से बचें।
  • कुछ उम्मीदवार इंटरव्यू में कोट-पैंट, ब्लेज़र या सूट पहनना पसंद करते हैं। ब्लेज़र का विकल्प काफी अच्छा है क्योंकि उसमें व्यक्ति एकदम अफसर जैसा दिखने लगता है। वहीं सूट में औपचारिकता थोड़ी ज़्यादा होती है। वस्तुतः सर्दी के मौसम में होने वाले साक्षात्कारों में ब्लेज़र, कोट या सूट पहना जा सकता है पर गर्मी के मौसम में ऐसी वेशभूषा को धारण करने से बचना ज़्यादा बेहतर विकल्प होगा।
  • अगर किसी उम्मीदवार को गर्मी के मौसम में ब्लेज़र या सूट पहनने की अधिक इच्छा हो तो उसे इस प्रश्न का उत्तर देने के लिये तैयार रहना चाहिये कि ‘आपने इतनी गर्मी में सूट क्यों पहना है?’ हालाँकि यह प्रश्न बहुत कठिन नहीं है और इसका आसान सा उत्तर यह हो सकता है कि “सर, यह एक समर कोट है। इसे पहनने से कोट वाली फॉर्मल फीलिंग तो आती है पर इसमें गर्मी की समस्या नहीं है।”
  • जहाँ तक कपड़ों के रंगों का प्रश्न है, इस संबंध में पुरुष उम्मीदवारों के पास बहुत अधिक विकल्प नहीं होते है। वस्तुतः इंटरव्यू आदि की वेशभूषा का एक बुनियादी सिद्धांत यह है कि कमीज़ और पैंट (ट्राउज़र्स) के रंग कंट्रास्ट हो अर्थात् दोनों का रंग एक-दूसरे के विपरीत हो क्योंकि कंट्रास्ट रंगों को धारण करने से व्यक्तित्व का आकर्षण उभरता है।
  • औपचारिक वेशभूषा के सन्दर्भ में प्रायः यह माना जाता है कि कमीज़ का रंग हल्का होना चाहिये और ट्राउज़र्स का रंग गहरा। हालाँकि इसके विपरीत भी पहनावा रखा जा सकता है, (अर्थात् गहरे रंग की कमीज़ के साथ हल्के रंग की ट्राउज़र्स) परंतु वह अधिक प्रचलित विकल्प नहीं है।
  • आमतौर पर आसमानी, हल्की सलेटी (ग्रे), बादामी (क्रीम) या सफेद रंग की कमीज़ इंटरव्यू के लिये पहनी जाती हैं। जहाँ तक पैंट का प्रश्न है, वह कमीज़ के रंग के कंट्रास्ट में होनी चाहिये। उदाहरण के लिये, अगर आसमानी रंग की कमीज़ है तो गहरे नीले रंग की ट्राउज़र्स बेहतर होगी।
  • पुरुष उम्मीदवारों को चाहिये कि वे कमीज़ के साथ टाई भी पहनें। हिंदी माध्यम तथा ग्रामीण पृष्ठभूमि से परीक्षा देने वाले कई उम्मीदवारों की समस्या यह होती है कि आदत न होने के कारण वे टाई पहनने के नाम से ही असहज होने लगते हैं। पर इस संबंध में यह समझना ज़रूरी है कि इंटरव्यू बोर्ड उम्मीदवार से एक भावी अधिकारी वाले तेवर की उम्मीद करता है। टाई लगाते ही उम्मीदवार का व्यक्तित्व न सिर्फ औपचारिक (Formal) हो जाता है बल्कि उसमें आकर्षण भी बढ़ जाता है।
  • अगर कोई उम्मीदवार इस तर्क के आधार पर टाई नहीं लगाता है कि वह इसमें सहज नहीं है तो ध्यान रखें कि यह कोई प्रभावकारी तर्क नहीं है। क्योंकि इस संबंध में इंटरव्यू बोर्ड उम्मीदवार से यह प्रश्न कर सकता है कि अगर आप एक टाई के साथ भी सहज नहीं हो पा रहे हैं तो हम आपसे यह उम्मीद कैसे करें कि आईएएस बनने के बाद आप रोज़-रोज़ नई चुनौतियों का सामना सहजता से कर पाएंगे?
  • जहाँ तक किसी राज्य लोक सेवा आयोग के इंटरव्यू का प्रश्न है, वहाँ टाई के बिना इंटरव्यू देना प्रायः गलत नहीं माना जाता है, हालाँकि वहाँ भी बेहतर यही रहेगा कि उम्मीदवार टाई लगाए। रही बात संघ लोक सेवा आयोग की- तो यहाँ टाई नहीं लगाने पर उम्मीदवार के बारे में बोर्ड की राय नकारात्मक हो जाने की पर्याप्त संभावना रहती है।
  • टाई चुनते समय कोशिश करनी चाहिये कि उसका रंग कमीज़ के रंग के कंट्रास्ट में हो किंतु वह ट्राउज़र्स के रंग से मिलती-जुलती भी न हो। उदाहरण के लिये, अगर उम्मीदवार आसमानी रंग की कमीज़ और गहरे नीले रंग की ट्राउज़र्स पहनता है तो टाई का रंग गाढ़ा मैरून, जिस पर गहरे नीले रंग की तिरछी रेखाएँ हों, बेहतर रहेगा। अगर सफेद रंग की कमीज़ और डार्क ग्रे रंग की ट्राउज़र्स हैं तो गहरे नीले या गहरे मैरून रंग की टाई जँचेगी। सिर्फ एक रंग की यानी प्लेन टाई बुरी तो नहीं लगती, पर उसका प्रभाव बहुत अच्छा नहीं पड़ता। बेहतर होगा कि टाई में एक बेस रंग हो तथा एक अन्य रंग का डिज़ाइन अवश्य हो।
  • किसी गहरे रंग के बेस पर किसी दूसरे रंग की तिरछी रेखाओं वाली टाई इंटरव्यू जैसी औपचारिक स्थिति के लिए बेहतर मानी जाती है। तिरछी रेखाओं का डिज़ाइन पसंद न आए तो कोई दूसरा डिज़ाइन (जैसे छोटे आकार का चैक प्रिंट) भी लिया जा सकता है, किंतु यह ज़रूरी है कि वह डिज़ाइन व्यवस्थित प्रकार का हो, न कि बिखरा हुआ और अव्यवस्थित।
  • पुरुष उम्मीदवारों की वेशभूषा में तीसरा पक्ष जूतों का होता है। इस संबंध में ज़्यादा विकल्प नहीं हैं। यह लगभग अनिवार्य माना जाता है कि उम्मीदवार काले रंग के चमड़े के जूते पहने। यहाँ इस बात पर विशेष गौर करने की आवश्कता है कि जूते फैंसी किस्म के नहीं होने चाहिये बल्कि साधारण होने चाहिये। फीते बांधने वाले परंपरागत किस्म के जूतों को ही औपचारिक वेशभूषा का हिस्सा माना जाता है।
  • जूतों को अच्छे तरीके से पॉलिश करना न भूलें। उनके साथ किसी एक ही रंग के मोजे पहनें, रंग-बिरंगे नहीं। आमतौर पर सफेद, काले या ग्रे रंग के मोजे इंटरव्यू जैसे औपचारिक मौकों के लिये उचित माने जाते हैं।
  • जूतों को वेशभूषा का गौण पक्ष न समझें। यह सही है कि आमतौर पर इंटरव्यू देते समय बोर्ड के सदस्यों की निगाह उम्मीदवार के जूतों पर नहीं जाती, किंतु यह भी उतना ही सही है कि कुछ इंटरव्यू विशेषज्ञ जूतों पर बहुत अधिक ध्यान देते हैं। ऐसे लोगों की राय में व्यक्ति के व्यक्तित्व की काफी हद तक पहचान इसी बात से हो जाती है कि वह अपने जूतों के रख-रखाव को लेकर कितना सचेत है।

महिला उम्मीदवारों की वेशभूषा

  • महिला उम्मीदवारों को सबसे पहले तय कर लेना चाहिये कि वे साड़ी पहनने को वरीयता देंगी या सूट को? हालाँकि बेहतर यही रहेगा कि वे साड़ी पहनने का विकल्प चुनें। यह तर्क देना एकदम गलत होगा कि मुझे साड़ी पहनने का अभ्यास नहीं है। ऐसी सफाई पर इंटरव्यू बोर्ड की वही प्रतिक्रिया होगी जो किसी पुरुष उम्मीदवार के यह कहने पर होती है कि उसे टाई पहनने का अभ्यास नहीं है।
  • अगर कोई महिला उम्मीदवार किसी राज्य लोक सेवा आयोग का इंटरव्यू दे रही है तो वह एक बार सूट के विकल्प पर विचार कर सकती है, हालाँकि वहाँ भी बेहतर यही रहेगा कि वह साड़ी पहने।
  • संघ लोक सेवा आयोग के इंटरव्यू में तो यह अपेक्षा की ही जाती है कि महिला उम्मीदवार साड़ी जैसी औपचारिक वेशभूषा में ही उपस्थित हों। इसके बाद भी अगर कोई महिला उम्मीदवार सूट के विकल्प को ही चुने तो उसे इतना ध्यान रखना चाहिये कि सूट का रंग और डिज़ाइन औपचारिक या फॉर्मल हो। फैंसी किस्म का सूट पहनकर किसी भी स्थिति में इंटरव्यू देने न जाएँ।
  • अगर कोई महिला उम्मीदवार कमीज़ और ट्राउज़र्स पहनकर इंटरव्यू देना चाहे तो यह विकल्प भी बुरा नहीं है। किसी प्रदेश लोक सेवा आयोग के इंटरव्यू में यह प्रयोग शायद अटपटा सा लगे, किंतु संघ लोक सेवा आयोग के इंटरव्यू में ऐसा प्रयोग किया जा सकता है। फिर भी, अगर साड़ी और अन्य विकल्पों की तुलना करनी हो तो इंटरव्यू बोर्ड के सदस्यों पर सकारात्मक प्रभाव डालने की दृष्टि से साड़ी का विकल्प अधिक बेहतर रहेगा।
  • जहाँ तक साड़ी के रंग और डिज़ाइन का प्रश्न है, तो इस संबंध में सामान्य नियम सिर्फ इतना है कि वेशभूषा औपचारिक बनी रहे। साड़ी का रंग चटकीला न हो, उसमें ज़्यादा रंगों की उपस्थिति न हो।
  • आमतौर पर, साड़ी का रंग गहरा नीला, गहरा हरा, हल्का गुलाबी, बादामी, मैरुन या काला होना चाहिये और उसमें कंट्रास्ट करता हुआ एक पतला सा बोर्डर होना चाहिये। इसके अलावा, साड़ी के बीच-बीच में कोई व्यवस्थित सा डिज़ाइन (जैसे कहीं-कहीं कुछ रेखाएँ, चैक या कोई प्रतीकात्मक आकृति) रहे तो बेहतर दिखेगा, पर यह डिज़ाइन बहुत भारी या लाउड किस्म का नहीं होना चाहिये।
  • अगर उम्मीदवार का शारीरिक गठन कमज़ोर है तो उसे सूती यानी कॉटन की साड़ी पहननी चाहिये और अगर शारीरिक गठन कुछ भारी है तो रेशम यानी सिल्क की साड़ी बेहतर होगी। इसका कारण यह है कि जहाँ कॉटन के कपड़े कुछ फूले हुए से नज़र आते हैं, वहीं सिल्क के कपड़े अतिरिक्त स्थान नहीं घेरते। जिन उम्मीदवारों का दैहिक गठन सामान्य है, वे अपनी रुचि से कोई भी विकल्प चुन सकती हैं।
  • अगर इंटरव्यू ठंडे मौसम में हो रहा है तो बेहतर होगा कि महिला उम्मीदवार साड़ी पर ब्लेज़र भी पहनें। ब्लेज़र पहनने से व्यक्तित्व एकदम अफसरों जैसा लगने लगता है। ब्लेज़र साड़ी के रंग से कंट्रास्ट में होना चाहिये। आमतौर पर काला या नेवी ब्लू ब्लेज़र ही उपयुक्त रहता है।
  • सामान्यतः महिला उम्मीदवारों से अपेक्षा की जाती है कि वे फॉर्मल से नज़र आने वाले सैंडल पहनें जिनमें कोई फैंसी टच न हो। बेहतर होगा कि सैंडल काले, भूरे या क्रीम रंग के हों। अगर वे चाहें तो साड़ी या शर्ट-पैंट के साथ फॉर्मल जूते भी पहन सकती हैं, पर उनके जूते फीते वाले नहीं, खुले हों तो अच्छा रहेगा।
  • इंटरव्यू में किसी भी तरह का पर्स लेकर नहीं जाना चाहिये। अगर रुमाल जैसी एकाध चीज़ साथ ले जाना ज़रूरी लगे तो उसे हाथ में ही ले जाएँ। बेहतर यही होगा कि उससे भी परहेज़ करें।

महिला तथा पुरुष दोनों उम्मीदवारों की वेशभूषा से जुड़े कुछ अन्य सुझाव:

  • अगर उम्मीदवार ने अपने हाथों में कोई अंगूठी इत्यादि पहन रखी है तो इस पर कुछ गंभीर प्रश्न पूछे जा सकते हैं। अगर अंगूठी का संबंध सगाई या शादी से है तो कोई समस्या नहीं है, किंतु अगर उसके पीछे ज्योतिष या नक्षत्र विज्ञान जैसा कोई आधार है तो समस्या हो सकती है।
  • इस समस्या से बचने के लिये उम्मीदवार के पास दो ही विकल्प हैं- या तो वह ऐसी चीज़ें पहनकर न जाए, या फिर उनसे संबंधित प्रश्नों के उत्तर देने के लिये तैयार रहे।
  • इंटरव्यू में उम्मीदवार का हेयर स्टाइल भी मायने रखता है। जहाँ तक पुरुष उम्मीदवारों का सवाल है, उनसे इतनी ही अपेक्षा है कि उनके बाल छोटे व व्यवस्थित हों। बहुत लंबे बाल रखने वाले व्यक्तियों को प्रायः प्रशासनिक सेवाओं के संदर्भ में सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता।
  • महिला उम्मीदवारों के पास दोनों विकल्प हैं। वे लंबे बाल भी रख सकती हैं और छोटे भी, पर दोनों ही स्थितियों में हेयर स्टाइल व्यवस्थित तथा औपचारिक होना चाहिये। अगर लंबे बाल हों तो खुले बालों के साथ इंटरव्यू देना अच्छा नहीं माना जाता।
  • कुछ उम्मीदवारों के लिये, जिनकी आयु अमूमन 30 वर्ष से ज़्यादा होती है, उनके लिये एक और सुझाव है। अगर उनके कुछ बाल सफेद हो गए हैं और वे नज़र आते हैं तो बेहतर होगा कि इंटरव्यू से पहले वे उन पर हेयर कलर या मेहंदी जैसा कुछ उपाय कर लें।
  • अगर उम्मीदवार बूढ़ा दिखता है तो स्वाभाविक तौर पर बोर्ड के सदस्यों के मन में उसके प्रति अच्छा भाव उत्पन्न नहीं होगा। जिसका कारण यह है कि किसी वृद्ध उम्मीदवार को चयनित करने की अपेक्षा बोर्ड द्वारा किसी नए उम्मीदवार को चयनित करने पर अधिक बल दिया जाता हैं।
  • अगर उम्मीदवार नज़र का चश्मा लगाते हैं, उन्हें इस बात पर ध्यान देना चाहिये कि चश्मा उनके चेहरे का सौंदर्य बढ़ाता हो, न कि उस पर हावी होता हो। आमतौर पर बहुत बड़े फ्रेम के चश्मे चेहरे को ढक देते हैं जिनसे बचना चाहिये।
  • अगर आप चश्मा नहीं पहनते हैं और आपकी आँखें कुछ धँसी हुई सी हैं या उनके नीचे काले घेरे बने हुए हैं तो इंटरव्यू में उन्हें छिपाने के लिये ज़ीरो नंबर का रिमलैस फ्रेम पहन लेना उचित होगा।
  • इस पक्ष को समझने तथा अपने व्यक्तित्व को इंटरव्यू के अनुकूल बनाने में बहुत अधिक समय और ऊर्जा व्यय करने की आवश्यकता नहीं होती, अतः इसे मुख्य परीक्षा के परिणाम के बाद के समय के लिये छोड़ देना बेहतर होता है।

इंटरव्यू से जुड़े अन्य पहलू 

इंटरव्यू बोर्ड की संरचना:

  • इंटरव्यू से पूर्व उम्मीदवार को यह जानना ज़रूरी है कि इंटरव्यू बोर्ड में कितने सदस्य होते हैं और उनकी क्या भूमिका होती है?
  • संघ लोक सेवा आयोग की सामान्य नीति है कि इंटरव्यू बोर्ड में पाँच सदस्य होने चाहिये। अगर कोई उम्मीदवार किसी भारतीय भाषा (हिंदी या किसी अन्य भाषा) के माध्यम से इंटरव्यू देता है तो उसके बोर्ड में पाँच सदस्यों के अलावा एक व्यक्ति (दुभाषिया या इंटरप्रेटर) भी उपस्थित होता है जिसका कार्य अनुवाद संबंधी समस्याओं को सुलझाना होता है।
  • प्रत्येक बोर्ड में एक अध्यक्ष और चार सदस्य होते हैं । अध्यक्ष के तौर पर वही व्यक्ति हो सकता है जो संघ लोक सेवा आयोग का सदस्य हों।
  • इंटरव्यू बोर्ड में अध्यक्ष के अलावा जो चार सदस्य होते हैं, उनमें से प्रायः दो से तीन नौकरशाही के ही ऊँचे स्तर के अधिकारी होते हैं। आमतौर पर संयुक्त सचिव या उससे वरिष्ठ स्तर के अधिकारियों को इस भूमिका के लिये  आमंत्रित किया जाता है।
  • बोर्ड में कम से कम एक सदस्य अकादमिक जगत से संबंधित होता है। इस कार्य के लिये प्रायः किसी विश्वविद्यालय के उपकुलपति या प्रोफेसर स्तर के व्यक्ति को आमंत्रित किया जाता है।
  • आयोग की कोशिश रहती है कि इंटरव्यू लेने वाले पाँच सदस्यों में कम से कम एक महिला सदस्य अवश्य शामिल हो, हालाँकि यह कोई लौह-नियम नहीं है। तथापि उम्मीदवार को इस बात के लिये तैयार रहना चाहिये कि बोर्ड में कम से कम एक महिला सदस्य भी उपस्थित होगी।

इंटरव्यू कक्ष में प्रवेश कैसे करें?

  • उम्मीदवारों का इंटरव्यू आयोग के एक बंद कमरे में इंटरव्यू बोर्ड के सदस्यों के समक्ष होता हैं। कुछ कमरे ऐसे हैं जिनमें प्रवेश करते ही सामने आपको बोर्ड के सभी सदस्य बैठे हुए नज़र आते हैं जबकि कुछ कमरे काफी बड़े आकार के हैं जिनमें कुछ कदम चलने के बाद मुड़ने पर बोर्ड के सदस्य दिखाई पड़ते हैं।
  • जैसे ही आपको बुलाए जाने के लिये घंटी बजेगी, आयोग का कर्मचारी स्वयं ही आपके लिये दरवाज़ा खोल देगा। जैसे ही आपके लिये दरवाज़ा खोला जाएगा, वहीं से आपकी परीक्षा शुरू हो जाएगी।
  • इंटरव्यू की पहली चुनौती यह है कि बोर्ड के सदस्यों का अभिवादन कैसे किया जाए? अभिवादन ठीक उस बिंदु पर किया जाना चाहिये जहाँ से पहली बार बोर्ड सदस्यों के साथ आपकी नज़रें मिलती हैं। अगर दरवाज़ा खुलते ही वे लोग सामने बैठे हुए दिखें तो आपको प्रवेश करने के साथ ही अभिवादन करना चाहिये। यदि थोड़ा चलकर मुड़ने के बाद वे आपको नज़र आएँ तो मोड़ पर पहुँचकर (यानी उनके सामने पहुँचकर) आपको अभिवादन करना चाहिये।
  • अगर आपको लगे कि बोर्ड के अध्यक्ष का ध्यान आपकी ओर नहीं है या सभी सदस्य आपस में बातचीत में मशगूल हैं तो सबसे पहले आपको पूछना चाहिये कि “क्या मैं आ सकता हूँ, सर/मैडम” ? यह वाक्य हिंदी में ही बोला जाए, ऐसी कोई बाध्यता नहीं है। अगर आप अंग्रेज़ी में सहज हैं तो ‘मे आई कम इन, सर/मैडम’ भी कह सकते हैं। आमतौर पर बोर्ड के सदस्य बहुत सुलझे हुए होते हैं और ऐसी छोटी-मोटी बातों को तवज्जो नहीं देते।
  • जैसे ही आप भीतर आने की अनुमति मांगेंगे, वैसे ही अध्यक्ष या कोई न कोई सदस्य आपको अनुमति दे देंगे। अनुमति मिलते ही आपको अभिवादन करना चाहिये। अभिवादन के लिये ‘नमस्कार’, ‘गुड मॉर्निंग’, ‘गुड आफ्टरनून’ में से कुछ भी बोल सकते हैं, परन्तु यहाँ किसी भी प्रकार की नाटकीयता से बचना चाहिये।
  • सभी सदस्यों को बारी-बारी नमस्कार करने की बजाए सिर्फ एक बार अध्यक्ष की तरफ हल्का सा सिर झुकाकर नमस्कार कर देना काफी होता है। नमस्कार के लिए हाथ न जोड़ें क्योंकि उससे अति औपचारिकता या चापलूसी का भाव नज़र आता है। अगर आपने ठाना हुआ है कि सभी सदस्यों को नमस्कार करना ही है तो ज़्यादा से ज़्यादा दो बार नमस्कार कह दें- एक बार बाईं ओर के सदस्यों को देखते हुए और एक बार दाईं ओर के सदस्यों को देखते हुए।
  • कुछ लोगों द्वारा यह भी कहा जाता हैं कि अगर बोर्ड में कोई महिला सदस्य उपस्थित हो तो उन्हें अलग से अभिवादन किया जाना चाहिये। यह बात गलत नहीं है पर इसे बहुत ज़्यादा महत्त्व नहीं देना चाहिये। सहजता से ऐसा कर पाएँ तो ठीक है, पर भूल जाएँ तो तनाव न लें। इसका बोर्ड के सदस्यों पर कोई विशेष फर्क नहीं पड़ता।
  • ऐसा भी हो सकता है कि जैसे ही आप बोर्ड के समक्ष पहुँचें, आपके अनुमति मांगने से पहले ही वे आपसे भीतर आने के लिए कह दें। ऐसा हो तो घबराएँ नहीं। वे किसी साजिश के तहत ऐसा नहीं करते हैं, वरन् सामान्य भाव से करते हैं। ऐसी स्थिति में आपको बातचीत की शुरुआत अभिवादन से करनी चाहिये।
  • जैसे ही आप अभिवादन करेंगे, वे आपको जवाब देने के बाद बैठने के लिये कहेंगे। ऐसा होते ही आपको ‘धन्यवाद सर/मैडम’ कहकर बैठ जाना चाहिये। ‘सर’ और ‘मैडम’ में से किस संबोधन का प्रयोग करना है, इसका फैसला अध्यक्ष के अनुसार या उस सदस्य के अनुसार करना चाहिये जिसने आपसे बैठने के लिये कहा है।
  • कभी-कभी ऐसा होता है कि बोर्ड सदस्य आपके अभिवादन का जवाब देने के बाद भी आपको बैठने के लिये न कहें। अगर ऐसा हो तो भी आप घबराएँ नहीं। मानकर चलें कि यह भी किसी साजिश के तहत नहीं बल्कि भूलवश हुआ होगा। कुछ देर शांति से वहीं खड़े रहें। बोर्ड के सदस्य आपको खड़ा हुआ देखकर खुद ही बैठने को कह देंगे। अगर उनका ध्यान आपकी ओर न जाए तो आपको स्वयं उनसे पुनः निवेदन कर लेना चाहिये।

बैठने का सही तरीका:

  • इंटरव्यू कक्ष में प्रवेश करते ही बोर्ड के सदस्य उम्मीदवार से बैठने का निवेदन करते हैं। उनकी मेज़ के सामने उम्मीदवार के लिये एक कुर्सी रखी होती है। कई उम्मीदवार सोचते हैं कि उन्हें कुर्सी को आगे-पीछे नहीं करना चाहिये क्योंकि ऐसा करने पर अवांछनीय शोर होता है। इस भय के कारण वे कुर्सी पर बैठ तो जाते हैं किंतु सहज नहीं हो पाते।
  • इस संबंध में ध्यान रखने की बात यह है कि अगर उम्मीदवार सहज होकर बैठेगा ही नहीं तो वह अगले आधे घंटे तक ठीक से बात कैसे करेगा? उसके मन में कहीं न कहीं यह तनाव बना रहेगा कि वह सुविधाजनक तरीके से नहीं बैठा है। इसी तनाव में उसका निष्पादन कमज़ोर हो जाएगा और कुल मिलाकर एक छोटे से भय के कारण उसकी संभावित सफलता भी खतरे में पड़ जाएगी।
  • इसका समाधान यह है कि बैठते समय अपनी सहजता को सर्वाधिक महत्त्व दें। अगर आपकी कुर्सी सदस्यों की मेज़ से बहुत दूर या अत्यंत नज़दीक रखी है तो उसे आगे या पीछे करने में बिल्कुल भी संकोच न करें। कोशिश करनी चाहिये कि यह प्रक्रिया दो-तीन सेकण्ड से ज़्यादा लंबी न हो।

इंटरव्यू की शुरुआत: 

  • इंटरव्यू की शुरुआत बोर्ड अध्यक्ष द्वारा की जाती है। सामान्य परंपरा यह है कि अध्यक्ष महोदय उम्मीदवार का परिचय शेष सदस्यों से करवाते हैं। वह उसके बायोडाटा की कुछ महत्त्वपूर्ण बातें पढ़कर सुनाते हैं ताकि शेष सदस्य यह तय कर सकें कि वे उम्मीदवार से किस संदर्भ में प्रश्न पूछेंगे।
  • यहाँ यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि सभी सदस्यों के पास उम्मीदवार द्वारा मुख्य परीक्षा के फॉर्म में दी गई जानकारियों का संक्षिप्त रिकॉर्ड होता है और वे उसके आधार पर उससे कोई भी प्रश्न पूछ सकते हैं।
  • अध्यक्ष महोदय शुरुआत में आमतौर पर बायोडाटा से जुड़े बुनियादी प्रश्न पूछते हैं। उनका पहला दायित्व यही होता है कि वे उम्मीदवार का तनाव कम करके उसे सहज स्थिति में ले आएँ। उम्मीदवार को विशेष रूप से कोशिश करनी चाहिये कि वह बोर्ड अध्यक्ष के प्रश्नों का जवाब उत्कृष्टता के साथ दे।
  • अपनी बात पूरी कर लेने के बाद बोर्ड अध्यक्ष अपने निकट बैठे सदस्य से निवेदन करते हैं कि वे उम्मीदवार से प्रश्न पूछें।
  • आपका इंटरव्यू कितना देर चलेगा इसका संबंध इस बात से है कि आप माहौल को कितना रोचक बना पा रहे हैं? यह ज़रूरी तो नहीं है लेकिन आमतौर पर इंटरव्यू लंबा चलने और अधिक अंक आने में सहसंबंध देखा जाता है।

इंटरव्यू के दौरान होने वाली सामान्य बातें:

  • यहाँ हमें एक सवाल पर विचार करना चाहिये जिसे लेकर बहुत से उम्मीदवार संशय में रहते हैं। प्रश्न यह है कि जिस समय कोई सदस्य उम्मीदवार से बातचीत कर रहा होता है, उस समय उम्मीदवार को सिर्फ उसी से बातचीत करनी चाहिये या बोर्ड के बाकी सदस्यों को भी बातचीत में शामिल करना चाहिये?
  • कुछ लोगों के अनुसार, उम्मीदवार को सभी बोर्ड सदस्यों से बातचीत करनी चाहिये। इसके लिये उसे जवाब देते समय शेष सदस्यों को भी देखते रहना चाहिये ताकि वे उसके इंटरव्यू में इन्वॉल्व (Involve) हो सकें। कुछ विशेषज्ञ इस शैली को ‘साइमल्टेनियस आई कॉन्टेक्ट’ (Simultaneous Eye Contact) कहते हैं। उनका तर्क है कि अगर उम्मीदवार किसी एक सदस्य से ही बातचीत करता रहेगा तो बाकी सदस्य उसके इंटरव्यू में इन्वॉल्व नहीं होंगे और अंकों के स्तर पर उसे इसका नुकसान झेलना पड़ेगा।
  • सच कहें तो यह एक भ्रांति है। सही बात यह है कि उम्मीदवार को सिर्फ और सिर्फ उसी सदस्य से बात करनी चाहिये जिसने उससे प्रश्न पूछा है। इस सलाह के पीछे दो कारण हैं।
  • पहला यह कि जब उम्मीदवार किसी सदस्य से बातचीत करते हुए बीच-बीच में दाएँ-बाएँ देखता है तो उस सदस्य को अपना अपमान महसूस होता है। साथ ही उसे यह भी लग सकता है कि उम्मीदवार में आत्मविश्वास या सहजता की कमी है।
  • दूसरा यह है कि बाकी सदस्य भी उम्मीदवार के ऐसे प्रयासों से खुश होने की बजाय नाराज़ हो सकते हैं। जब उम्मीदवार किसी विशेष सदस्य से बात कर रहा होता है तो शेष सदस्य निश्चिंत होकर उसे देखते हैं और उसके जवाबों का मूल्यांकन करते हैं। कभी-कभी वे आपस में बातचीत भी करते हैं और ज़रूरत होने पर अपना कोई व्यक्तिगत कार्य भी (जैसे फोन पर मैसेज पढ़ना, चाय पीना इत्यादि) करते हैं। अगर इस समय उम्मीदवार उनकी ओर देखने लगता है तो वे दबाव में आ जाते हैं। उन्हें इंटरव्यू की गरिमा बनाए रखने के लिए सजग होकर उम्मीदवार की ओर देखते रहना पड़ता है और उनकी सहजता खत्म हो जाती है। सहजता खत्म होने से उनका तनाव बढ़ता है और उम्मीदवार के प्रति नाराज़गी का भाव पैदा होता है। इसलिये बेहतर यही है कि उम्मीदवार उनकी सहजता में दखल न दे और सिर्फ उसी सदस्य की ओर मुखातिब रहे जो उससे प्रश्न पूछ रहा है।
  • कभी-कभी ऐसा होता है कि जब उम्मीदवार किसी सदस्य के प्रश्न का उत्तर दे रहा होता है, तभी कोई दूसरा सदस्य या अध्यक्ष स्वयं उम्मीदवार को टोक देता है। यह भी हो सकता है कि एक सदस्य प्रश्न पूछे और दूसरा सदस्य उस प्रश्न से जुड़ी एक बात और पूछ ले। यहाँ प्रश्न यह है कि ऐसी स्थिति में उम्मीदवार को क्या करना चाहिये?
  • ऐसी स्थिति को संभालना चुनौतीपूर्ण होता है लेकिन कुछ सामान्य सिद्धांतों के आधार पर इसे सुलझाया जा सकता है। पहली बात यह है कि अगर बोर्ड का अध्यक्ष बीच में दखल दे तो उम्मीदवार की प्राथमिक ज़िम्मेदारी उसी के प्रति बनती है। उसे पहले बोर्ड अध्यक्ष के प्रश्न का उत्तर देना चाहिये और फिर वापस उस सदस्य की ओर लौटना चाहिये जिसने मूल प्रश्न पूछा था।
  • वैसे, बोर्ड के अध्यक्ष आमतौर पर खुद ही इस बात का ध्यान रखते हैं। अगर उन्होंने किसी सदस्य के प्रश्न में कोई प्रश्न अपनी ओर से जोड़ा है या उम्मीदवार के उत्तर पर कोई प्रतिप्रश्न किया है तो उम्मीदवार द्वारा उत्तर शुरू करते ही वे खुद इशारा कर देते हैं कि आप इन सदस्य को ही जवाब दें। ऐसा निर्देश मिलने पर उक्त स्थिति उम्मीदवार के लिये अधिक सहज हो जाती है।
  • दूसरा सिद्धांत यह है कि अगर एक सदस्य से बात करते हुए किसी दूसरे सदस्य ने टोका है तो टोकने वाले सदस्य की बात को उसी की ओर देखते हुए ध्यान से सुना जाना चाहिये। किंतु, उत्तर देते समय उम्मीदवार को पहले उसी सदस्य को संतुष्ट करना चाहिये जिसने प्रश्न की शुरुआत की थी क्योंकि ऐसा न होने पर उस सदस्य को अपना अपमान महसूस हो सकता है।
  • अगर टोकने वाले सदस्य का प्रश्न काफी लंबा हो या उसे देखकर ऐसा लगे कि वह उम्मीदवार से अपेक्षा कर रहा है कि वह उसे ही संबोधित करते हुए उत्तर दे तो उम्मीदवार को चाहिये कि उससे विनम्रतापूर्वक अनुमति मांगकर मूल प्रश्न पूछने वाले सदस्य की ओर मुखातिब हो जाए।

इंटरव्यू कक्ष से बाहर निकलना:

  • आमतौर पर, सभी सदस्यों द्वारा प्रश्न पूछे जाने के बाद बोर्ड अध्यक्ष पुनः 2-3 प्रश्न पूछते हैं और उसके बाद इंटरव्यू के समापन की घोषणा करते हैं।
  • चूँकि यह इंटरव्यू बोर्ड के साथ संवाद की अंतिम कड़ी है, इसलिये कोशिश करनी चाहिये कि इस बिंदु पर कोई चूक न हो।
  • ध्यान रखें कि इंटरव्यू के शुरुआती मिनटों में हुई गलतियाँ विशेष नुकसान नहीं करतीं क्योंकि मूल्यांकन के समय तक सदस्य उन्हें भूल चुके होते हैं, किंतु इंटरव्यू के अंत में होने वाली गलतियाँ अक्षम्य मानी जाती हैं क्योंकि ठीक उसी समय इंटरव्यू का मूल्यांकन किया जाता है और वे गलतियाँ सदस्यों को याद रहती हैं।
  • जैसे ही बोर्ड अध्यक्ष जाने के लिये कहें, वैसे ही उम्मीदवार को सभी सदस्यों को धन्यवाद कहना चाहिये।
  • सभी को अलग-अलग धन्यवाद कहना अत्यंत कृत्रिम होता है, इसलिये एक ही अभिव्यक्ति में सभी सदस्यों को धन्यवाद कहना चाहिये। इसके लिये “आप सभी का धन्यवाद सर” या “थैंक्स टू ऑल ऑफ यू सर” कहते हुए गर्दन विनम्रता के साथ थोड़ी बहुत झुका लें तो बेहतर होगा।
  • इसके बाद कुर्सी से उठकर उसे वापस उसी स्थिति में रख देना चाहिये जैसी वह उम्मीदवार को मिली थी।
  • इसके बाद की प्रक्रिया पर अलग-अलग विशेषज्ञों के अपने-अपने मत हैं। कुछ का मानना है कि इसके बाद उम्मीदवार को सीधे इंटरव्यू कक्ष से बाहर निकल जाना चाहिये जबकि कुछ के अनुसार उसे इंटरव्यू कक्ष से बाहर निकलते समय पुनः एक बार बोर्ड के सदस्यों का अभिवादन करना चाहिये।
  • इस बिंदु पर किये जाने वाले अभिवादन की भाषा “गुड डे सर” या “धन्यवाद सर” हो सकती है।
  • यह अभिवादन ठीक उस स्थान से किया जाना चाहिये जिसके बाद उम्मीदवार को बोर्ड के सदस्य दिखने बंद हो जाए।
  • कोशिश करनी चाहिये कि उम्मीदवार कुर्सी से उठकर इंटरव्यू कक्ष के दरवाज़े तक इस तरह चले कि बोर्ड सदस्यों को उसकी पीठ नज़र न आए।

इंटरव्यू बोर्ड की संरचना:

  • इंटरव्यू से पूर्व उम्मीदवार को यह जानना ज़रूरी है कि इंटरव्यू बोर्ड में कितने सदस्य होते हैं और उनकी क्या भूमिका होती है?
  • संघ लोक सेवा आयोग की सामान्य नीति है कि इंटरव्यू बोर्ड में पाँच सदस्य होने चाहिये। अगर कोई उम्मीदवार किसी भारतीय भाषा (हिंदी या किसी अन्य भाषा) के माध्यम से इंटरव्यू देता है तो उसके बोर्ड में पाँच सदस्यों के अलावा एक व्यक्ति (दुभाषिया या इंटरप्रेटर) भी उपस्थित होता है जिसका कार्य अनुवाद संबंधी समस्याओं को सुलझाना होता है।
  • प्रत्येक बोर्ड में एक अध्यक्ष और चार सदस्य होते हैं । अध्यक्ष के तौर पर वही व्यक्ति हो सकता है जो संघ लोक सेवा आयोग का सदस्य हों।
  • इंटरव्यू बोर्ड में अध्यक्ष के अलावा जो चार सदस्य होते हैं, उनमें से प्रायः दो से तीन नौकरशाही के ही ऊँचे स्तर के अधिकारी होते हैं। आमतौर पर संयुक्त सचिव या उससे वरिष्ठ स्तर के अधिकारियों को इस भूमिका के लिये  आमंत्रित किया जाता है।
  • बोर्ड में कम से कम एक सदस्य अकादमिक जगत से संबंधित होता है। इस कार्य के लिये प्रायः किसी विश्वविद्यालय के उपकुलपति या प्रोफेसर स्तर के व्यक्ति को आमंत्रित किया जाता है।
  • आयोग की कोशिश रहती है कि इंटरव्यू लेने वाले पाँच सदस्यों में कम से कम एक महिला सदस्य अवश्य शामिल हो, हालाँकि यह कोई लौह-नियम नहीं है। तथापि उम्मीदवार को इस बात के लिये तैयार रहना चाहिये कि बोर्ड में कम से कम एक महिला सदस्य भी उपस्थित होगी।

इंटरव्यू कक्ष में प्रवेश कैसे करें?

  • उम्मीदवारों का इंटरव्यू आयोग के एक बंद कमरे में इंटरव्यू बोर्ड के सदस्यों के समक्ष होता हैं। कुछ कमरे ऐसे हैं जिनमें प्रवेश करते ही सामने आपको बोर्ड के सभी सदस्य बैठे हुए नज़र आते हैं जबकि कुछ कमरे काफी बड़े आकार के हैं जिनमें कुछ कदम चलने के बाद मुड़ने पर बोर्ड के सदस्य दिखाई पड़ते हैं।
  • जैसे ही आपको बुलाए जाने के लिये घंटी बजेगी, आयोग का कर्मचारी स्वयं ही आपके लिये दरवाज़ा खोल देगा। जैसे ही आपके लिये दरवाज़ा खोला जाएगा, वहीं से आपकी परीक्षा शुरू हो जाएगी।
  • इंटरव्यू की पहली चुनौती यह है कि बोर्ड के सदस्यों का अभिवादन कैसे किया जाए? अभिवादन ठीक उस बिंदु पर किया जाना चाहिये जहाँ से पहली बार बोर्ड सदस्यों के साथ आपकी नज़रें मिलती हैं। अगर दरवाज़ा खुलते ही वे लोग सामने बैठे हुए दिखें तो आपको प्रवेश करने के साथ ही अभिवादन करना चाहिये। यदि थोड़ा चलकर मुड़ने के बाद वे आपको नज़र आएँ तो मोड़ पर पहुँचकर (यानी उनके सामने पहुँचकर) आपको अभिवादन करना चाहिये।
  • अगर आपको लगे कि बोर्ड के अध्यक्ष का ध्यान आपकी ओर नहीं है या सभी सदस्य आपस में बातचीत में मशगूल हैं तो सबसे पहले आपको पूछना चाहिये कि “क्या मैं आ सकता हूँ, सर/मैडम” ? यह वाक्य हिंदी में ही बोला जाए, ऐसी कोई बाध्यता नहीं है। अगर आप अंग्रेज़ी में सहज हैं तो ‘मे आई कम इन, सर/मैडम’ भी कह सकते हैं। आमतौर पर बोर्ड के सदस्य बहुत सुलझे हुए होते हैं और ऐसी छोटी-मोटी बातों को तवज्जो नहीं देते।
  • जैसे ही आप भीतर आने की अनुमति मांगेंगे, वैसे ही अध्यक्ष या कोई न कोई सदस्य आपको अनुमति दे देंगे। अनुमति मिलते ही आपको अभिवादन करना चाहिये। अभिवादन के लिये ‘नमस्कार’, ‘गुड मॉर्निंग’, ‘गुड आफ्टरनून’ में से कुछ भी बोल सकते हैं, परन्तु यहाँ किसी भी प्रकार की नाटकीयता से बचना चाहिये।
  • सभी सदस्यों को बारी-बारी नमस्कार करने की बजाए सिर्फ एक बार अध्यक्ष की तरफ हल्का सा सिर झुकाकर नमस्कार कर देना काफी होता है। नमस्कार के लिए हाथ न जोड़ें क्योंकि उससे अति औपचारिकता या चापलूसी का भाव नज़र आता है। अगर आपने ठाना हुआ है कि सभी सदस्यों को नमस्कार करना ही है तो ज़्यादा से ज़्यादा दो बार नमस्कार कह दें- एक बार बाईं ओर के सदस्यों को देखते हुए और एक बार दाईं ओर के सदस्यों को देखते हुए।
  • कुछ लोगों द्वारा यह भी कहा जाता हैं कि अगर बोर्ड में कोई महिला सदस्य उपस्थित हो तो उन्हें अलग से अभिवादन किया जाना चाहिये। यह बात गलत नहीं है पर इसे बहुत ज़्यादा महत्त्व नहीं देना चाहिये। सहजता से ऐसा कर पाएँ तो ठीक है, पर भूल जाएँ तो तनाव न लें। इसका बोर्ड के सदस्यों पर कोई विशेष फर्क नहीं पड़ता।
  • ऐसा भी हो सकता है कि जैसे ही आप बोर्ड के समक्ष पहुँचें, आपके अनुमति मांगने से पहले ही वे आपसे भीतर आने के लिए कह दें। ऐसा हो तो घबराएँ नहीं। वे किसी साजिश के तहत ऐसा नहीं करते हैं, वरन् सामान्य भाव से करते हैं। ऐसी स्थिति में आपको बातचीत की शुरुआत अभिवादन से करनी चाहिये।
  • जैसे ही आप अभिवादन करेंगे, वे आपको जवाब देने के बाद बैठने के लिये कहेंगे। ऐसा होते ही आपको ‘धन्यवाद सर/मैडम’ कहकर बैठ जाना चाहिये। ‘सर’ और ‘मैडम’ में से किस संबोधन का प्रयोग करना है, इसका फैसला अध्यक्ष के अनुसार या उस सदस्य के अनुसार करना चाहिये जिसने आपसे बैठने के लिये कहा है।
  • कभी-कभी ऐसा होता है कि बोर्ड सदस्य आपके अभिवादन का जवाब देने के बाद भी आपको बैठने के लिये न कहें। अगर ऐसा हो तो भी आप घबराएँ नहीं। मानकर चलें कि यह भी किसी साजिश के तहत नहीं बल्कि भूलवश हुआ होगा। कुछ देर शांति से वहीं खड़े रहें। बोर्ड के सदस्य आपको खड़ा हुआ देखकर खुद ही बैठने को कह देंगे। अगर उनका ध्यान आपकी ओर न जाए तो आपको स्वयं उनसे पुनः निवेदन कर लेना चाहिये।

बैठने का सही तरीका:

  • इंटरव्यू कक्ष में प्रवेश करते ही बोर्ड के सदस्य उम्मीदवार से बैठने का निवेदन करते हैं। उनकी मेज़ के सामने उम्मीदवार के लिये एक कुर्सी रखी होती है। कई उम्मीदवार सोचते हैं कि उन्हें कुर्सी को आगे-पीछे नहीं करना चाहिये क्योंकि ऐसा करने पर अवांछनीय शोर होता है। इस भय के कारण वे कुर्सी पर बैठ तो जाते हैं किंतु सहज नहीं हो पाते।
  • इस संबंध में ध्यान रखने की बात यह है कि अगर उम्मीदवार सहज होकर बैठेगा ही नहीं तो वह अगले आधे घंटे तक ठीक से बात कैसे करेगा? उसके मन में कहीं न कहीं यह तनाव बना रहेगा कि वह सुविधाजनक तरीके से नहीं बैठा है। इसी तनाव में उसका निष्पादन कमज़ोर हो जाएगा और कुल मिलाकर एक छोटे से भय के कारण उसकी संभावित सफलता भी खतरे में पड़ जाएगी।
  • इसका समाधान यह है कि बैठते समय अपनी सहजता को सर्वाधिक महत्त्व दें। अगर आपकी कुर्सी सदस्यों की मेज़ से बहुत दूर या अत्यंत नज़दीक रखी है तो उसे आगे या पीछे करने में बिल्कुल भी संकोच न करें। कोशिश करनी चाहिये कि यह प्रक्रिया दो-तीन सेकण्ड से ज़्यादा लंबी न हो।

इंटरव्यू की शुरुआत: 

  • इंटरव्यू की शुरुआत बोर्ड अध्यक्ष द्वारा की जाती है। सामान्य परंपरा यह है कि अध्यक्ष महोदय उम्मीदवार का परिचय शेष सदस्यों से करवाते हैं। वह उसके बायोडाटा की कुछ महत्त्वपूर्ण बातें पढ़कर सुनाते हैं ताकि शेष सदस्य यह तय कर सकें कि वे उम्मीदवार से किस संदर्भ में प्रश्न पूछेंगे।
  • यहाँ यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि सभी सदस्यों के पास उम्मीदवार द्वारा मुख्य परीक्षा के फॉर्म में दी गई जानकारियों का संक्षिप्त रिकॉर्ड होता है और वे उसके आधार पर उससे कोई भी प्रश्न पूछ सकते हैं।
  • अध्यक्ष महोदय शुरुआत में आमतौर पर बायोडाटा से जुड़े बुनियादी प्रश्न पूछते हैं। उनका पहला दायित्व यही होता है कि वे उम्मीदवार का तनाव कम करके उसे सहज स्थिति में ले आएँ। उम्मीदवार को विशेष रूप से कोशिश करनी चाहिये कि वह बोर्ड अध्यक्ष के प्रश्नों का जवाब उत्कृष्टता के साथ दे।
  • अपनी बात पूरी कर लेने के बाद बोर्ड अध्यक्ष अपने निकट बैठे सदस्य से निवेदन करते हैं कि वे उम्मीदवार से प्रश्न पूछें।
  • आपका इंटरव्यू कितना देर चलेगा इसका संबंध इस बात से है कि आप माहौल को कितना रोचक बना पा रहे हैं? यह ज़रूरी तो नहीं है लेकिन आमतौर पर इंटरव्यू लंबा चलने और अधिक अंक आने में सहसंबंध देखा जाता है।

इंटरव्यू के दौरान होने वाली सामान्य बातें:

  • यहाँ हमें एक सवाल पर विचार करना चाहिये जिसे लेकर बहुत से उम्मीदवार संशय में रहते हैं। प्रश्न यह है कि जिस समय कोई सदस्य उम्मीदवार से बातचीत कर रहा होता है, उस समय उम्मीदवार को सिर्फ उसी से बातचीत करनी चाहिये या बोर्ड के बाकी सदस्यों को भी बातचीत में शामिल करना चाहिये?
  • कुछ लोगों के अनुसार, उम्मीदवार को सभी बोर्ड सदस्यों से बातचीत करनी चाहिये। इसके लिये उसे जवाब देते समय शेष सदस्यों को भी देखते रहना चाहिये ताकि वे उसके इंटरव्यू में इन्वॉल्व (Involve) हो सकें। कुछ विशेषज्ञ इस शैली को ‘साइमल्टेनियस आई कॉन्टेक्ट’ (Simultaneous Eye Contact) कहते हैं। उनका तर्क है कि अगर उम्मीदवार किसी एक सदस्य से ही बातचीत करता रहेगा तो बाकी सदस्य उसके इंटरव्यू में इन्वॉल्व नहीं होंगे और अंकों के स्तर पर उसे इसका नुकसान झेलना पड़ेगा।
  • सच कहें तो यह एक भ्रांति है। सही बात यह है कि उम्मीदवार को सिर्फ और सिर्फ उसी सदस्य से बात करनी चाहिये जिसने उससे प्रश्न पूछा है। इस सलाह के पीछे दो कारण हैं।
  • पहला यह कि जब उम्मीदवार किसी सदस्य से बातचीत करते हुए बीच-बीच में दाएँ-बाएँ देखता है तो उस सदस्य को अपना अपमान महसूस होता है। साथ ही उसे यह भी लग सकता है कि उम्मीदवार में आत्मविश्वास या सहजता की कमी है।
  • दूसरा यह है कि बाकी सदस्य भी उम्मीदवार के ऐसे प्रयासों से खुश होने की बजाय नाराज़ हो सकते हैं। जब उम्मीदवार किसी विशेष सदस्य से बात कर रहा होता है तो शेष सदस्य निश्चिंत होकर उसे देखते हैं और उसके जवाबों का मूल्यांकन करते हैं। कभी-कभी वे आपस में बातचीत भी करते हैं और ज़रूरत होने पर अपना कोई व्यक्तिगत कार्य भी (जैसे फोन पर मैसेज पढ़ना, चाय पीना इत्यादि) करते हैं। अगर इस समय उम्मीदवार उनकी ओर देखने लगता है तो वे दबाव में आ जाते हैं। उन्हें इंटरव्यू की गरिमा बनाए रखने के लिए सजग होकर उम्मीदवार की ओर देखते रहना पड़ता है और उनकी सहजता खत्म हो जाती है। सहजता खत्म होने से उनका तनाव बढ़ता है और उम्मीदवार के प्रति नाराज़गी का भाव पैदा होता है। इसलिये बेहतर यही है कि उम्मीदवार उनकी सहजता में दखल न दे और सिर्फ उसी सदस्य की ओर मुखातिब रहे जो उससे प्रश्न पूछ रहा है।
  • कभी-कभी ऐसा होता है कि जब उम्मीदवार किसी सदस्य के प्रश्न का उत्तर दे रहा होता है, तभी कोई दूसरा सदस्य या अध्यक्ष स्वयं उम्मीदवार को टोक देता है। यह भी हो सकता है कि एक सदस्य प्रश्न पूछे और दूसरा सदस्य उस प्रश्न से जुड़ी एक बात और पूछ ले। यहाँ प्रश्न यह है कि ऐसी स्थिति में उम्मीदवार को क्या करना चाहिये?
  • ऐसी स्थिति को संभालना चुनौतीपूर्ण होता है लेकिन कुछ सामान्य सिद्धांतों के आधार पर इसे सुलझाया जा सकता है। पहली बात यह है कि अगर बोर्ड का अध्यक्ष बीच में दखल दे तो उम्मीदवार की प्राथमिक ज़िम्मेदारी उसी के प्रति बनती है। उसे पहले बोर्ड अध्यक्ष के प्रश्न का उत्तर देना चाहिये और फिर वापस उस सदस्य की ओर लौटना चाहिये जिसने मूल प्रश्न पूछा था।
  • वैसे, बोर्ड के अध्यक्ष आमतौर पर खुद ही इस बात का ध्यान रखते हैं। अगर उन्होंने किसी सदस्य के प्रश्न में कोई प्रश्न अपनी ओर से जोड़ा है या उम्मीदवार के उत्तर पर कोई प्रतिप्रश्न किया है तो उम्मीदवार द्वारा उत्तर शुरू करते ही वे खुद इशारा कर देते हैं कि आप इन सदस्य को ही जवाब दें। ऐसा निर्देश मिलने पर उक्त स्थिति उम्मीदवार के लिये अधिक सहज हो जाती है।
  • दूसरा सिद्धांत यह है कि अगर एक सदस्य से बात करते हुए किसी दूसरे सदस्य ने टोका है तो टोकने वाले सदस्य की बात को उसी की ओर देखते हुए ध्यान से सुना जाना चाहिये। किंतु, उत्तर देते समय उम्मीदवार को पहले उसी सदस्य को संतुष्ट करना चाहिये जिसने प्रश्न की शुरुआत की थी क्योंकि ऐसा न होने पर उस सदस्य को अपना अपमान महसूस हो सकता है।
  • अगर टोकने वाले सदस्य का प्रश्न काफी लंबा हो या उसे देखकर ऐसा लगे कि वह उम्मीदवार से अपेक्षा कर रहा है कि वह उसे ही संबोधित करते हुए उत्तर दे तो उम्मीदवार को चाहिये कि उससे विनम्रतापूर्वक अनुमति मांगकर मूल प्रश्न पूछने वाले सदस्य की ओर मुखातिब हो जाए।

इंटरव्यू कक्ष से बाहर निकलना:

  • आमतौर पर, सभी सदस्यों द्वारा प्रश्न पूछे जाने के बाद बोर्ड अध्यक्ष पुनः 2-3 प्रश्न पूछते हैं और उसके बाद इंटरव्यू के समापन की घोषणा करते हैं।
  • चूँकि यह इंटरव्यू बोर्ड के साथ संवाद की अंतिम कड़ी है, इसलिये कोशिश करनी चाहिये कि इस बिंदु पर कोई चूक न हो।
  • ध्यान रखें कि इंटरव्यू के शुरुआती मिनटों में हुई गलतियाँ विशेष नुकसान नहीं करतीं क्योंकि मूल्यांकन के समय तक सदस्य उन्हें भूल चुके होते हैं, किंतु इंटरव्यू के अंत में होने वाली गलतियाँ अक्षम्य मानी जाती हैं क्योंकि ठीक उसी समय इंटरव्यू का मूल्यांकन किया जाता है और वे गलतियाँ सदस्यों को याद रहती हैं।
  • जैसे ही बोर्ड अध्यक्ष जाने के लिये कहें, वैसे ही उम्मीदवार को सभी सदस्यों को धन्यवाद कहना चाहिये।
  • सभी को अलग-अलग धन्यवाद कहना अत्यंत कृत्रिम होता है, इसलिये एक ही अभिव्यक्ति में सभी सदस्यों को धन्यवाद कहना चाहिये। इसके लिये “आप सभी का धन्यवाद सर” या “थैंक्स टू ऑल ऑफ यू सर” कहते हुए गर्दन विनम्रता के साथ थोड़ी बहुत झुका लें तो बेहतर होगा।
  • इसके बाद कुर्सी से उठकर उसे वापस उसी स्थिति में रख देना चाहिये जैसी वह उम्मीदवार को मिली थी।
  • इसके बाद की प्रक्रिया पर अलग-अलग विशेषज्ञों के अपने-अपने मत हैं। कुछ का मानना है कि इसके बाद उम्मीदवार को सीधे इंटरव्यू कक्ष से बाहर निकल जाना चाहिये जबकि कुछ के अनुसार उसे इंटरव्यू कक्ष से बाहर निकलते समय पुनः एक बार बोर्ड के सदस्यों का अभिवादन करना चाहिये।
  • इस बिंदु पर किये जाने वाले अभिवादन की भाषा “गुड डे सर” या “धन्यवाद सर” हो सकती है।
  • यह अभिवादन ठीक उस स्थान से किया जाना चाहिये जिसके बाद उम्मीदवार को बोर्ड के सदस्य दिखने बंद हो जाए।
  • कोशिश करनी चाहिये कि उम्मीदवार कुर्सी से उठकर इंटरव्यू कक्ष के दरवाज़े तक इस तरह चले कि बोर्ड सदस्यों को उसकी पीठ नज़र न आए।

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) (सामान्य अध्ययन) परीक्षा के लिये उपयोगी पुस्तकेंसामान्य अध्ययन के सभी परंपरागत विषयों के अध्ययन के लिये कक्षा 6 से 12 (इतिहास, भूगोल, विज्ञान) तथा कक्षा 9 से 12 (राजव्यवस्था और अर्थशास्त्र) तक की एन.सी.ई.आर.टी. की पुस्तकों को पढ़ना अनिवार्य है, क्योंकि ये पुस्तकें अवधारणाओं की वास्तविक समझ विकसित करती हैं। इन पुस्तकों को पढ़ने के बाद ही किसी अन्य लेखक की पुस्तक को अच्छी तरह से पढ़कर समझा जा सकता है।इतिहासप्राचीन भारतउपेन्द्र सिंह, रामशरण शर्मा (ओरिएंट ब्लैकस्वान प्रकाशन )मध्यकालीन भारतसतीश चंद्र (ओरिएंट ब्लैकस्वान प्रकाशन)आधुनिक भारतविपिन चंद्र , राजीव अहीरविश्व इतिहासदीनानाथ वर्माकला एवं संस्कृतिकौटिल्य एकडेमी प्रकाशन की पुस्तक  नोट: संघ लोक सेवा आयोग (upsc) एवं विभिन्न राज्य लोक सेवा आयोगों द्वारा आयोजित की जाने वाली  प्रारंभिक परीक्षाओं के लिये कौटिल्य एकडेमी पब्लिकेशन की पुस्तक “भारतीय इतिहास एवं राष्‍ट्रीय”  आंदोलन को अवश्य पढ़ें।भूगोल कक्षा 6 से लेकर 12 तक की NCERT की  पुस्तक पर्याप्त है तथा इन पुस्तकों का अध्ययन करते समय ऑक्सफोर्ड स्कूल का एटलस की सहायता लें। पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी कौटिल्य एकडेमी पब्लिकेशन की पुस्तक भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था1: एम. लक्ष्मीकांत2: कौटिल्य एकडेमी पब्लिकेशन की पुस्तक (प्रारंभिक परीक्षा के लिये)अर्थव्यवस्था प्रारंभिक समष्टि अर्थशास्त्र टी.आर.जैन एवं वी.के.ओहरी भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास कक्षा 11 की NCERT भारतीय अर्थव्यवस्था संजीव वर्मा एथिक्स नीतिशास्त्र सत्यनिष्ठा और अभिवृत्ति जी. सुब्बाराव, पी.एन. रॉय चौधरी नीतिशास्त्र सत्यनिष्ठा व अभिरुचि Lexicon Publication अंतर्राष्‍ट्रीय संबंध1: समकालीन विश्व राजनीति (कक्षा 11 NCERT)2: तपन बिस्वाल3: कौटिल्य एकडेमी करेंट अफेयर्स टुडे  मैगज़ीन में प्रकाशित अध्ययन-सामग्री एवं कौटिल्य एकडेमी आईएएस की वेबसाइट भारतीय समाज भारतीय समाज राम अहूजा सामाजिक समस्याएँ राम अहूजाआंतरिक सुरक्षा भारत की आंतरिक सुरक्षा अशोक कुमार, विपुलविज्ञान एवं तकनीक1: कक्षा 6 से लेकर 10 तक की एनसीईआरटी की  पुस्तक2: विवास पैनोरमाकरेंट अफेयर्स1: कौटिल्य एकडेमी आईएएस की वेबसाइट (www.Kautilyaacademy.com)2: “कौटिल्य एकडेमी करेंट अफेयर्स टुडे” मैगज़ीननोट: हालाँकि विभिन्न विषयों के लिये इस सूची में जो पुस्तकें सुझाई गई हैं, संभव है कि इन पुस्तको को पढ़ने के बाद सम्पूर्ण पाठ्यक्रम का कुछ हिस्सा छूट जाए, क्योंकि सिविल सेवा परीक्षा के पाठ्यक्रम की प्रकृति ऐसी है कि उसे कुछ पुस्तकों को पढ़कर पूरी तरह तैयार करना न तो संभव है और न ही व्यावहारिक। अतः अगर आप एक ही स्रोत से सम्पूर्ण पाठ्यक्रम को तैयार करना चाहते हैं, तो आप कौटिल्य एकडेमी संस्थान के “दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम” (D.L.P.) को घर बैठे मँगवा सकते हैं और पूरे पाठ्यक्रम को तैयार कर सकते हैं। दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम के संबंध में विस्तृत जानकारी के लिये आप नीचे दिये गए लिंक पर जा सकते हैं: https://www.Kautilyaacademy.com/hindi/postal-course

प्रश्न – 1 : सामान्य अध्ययन की तैयारी कब शुरू कर देनी चाहिये? शुरुआत में कौन-सी पुस्तकें पढ़नी चाहियें?

उत्तर:  नए पाठ्यक्रम की प्रकृति ऐसी है कि स्नातक स्तर के दौरान ही तैयारी शुरू कर देनी चाहिये, हालाँकि अगर किसी ने उस समय तैयारी नहीं की है तो भी घबराने की आवश्यकता नहीं है। आरंभिक स्तर पर एनसीईआरटी की पुस्तकें पढ़ना उपयुक्त है। शुरुआत इतिहास की 11वीं और 12वीं की पुस्तकों से की जा सकती है। अगर इन पुस्तकों में दिक्कत हो तो पहले 9वीं और 10वीं की पुस्तकें पढ़ने में कोई बुराई नहीं है। इसके बाद भूगोल के लिये कक्षा 6 से 12 तक की पुस्तकें पढ़ लेना ठीक होगा। इनके साथ-साथ ‘एटलस’ का निरंतर अभ्यास करना न भूलें। इसके बाद सामाजिक विज्ञान की 9वीं से 12वीं कक्षा की पुस्तकें देख लें (जैसे- ‘हमारा संविधान’, ‘भारत में लोकतंत्र’, ‘समकालीन विश्व राजनीति’ इत्यादि)। इसके बाद कक्षा 6 से 10 तक की विज्ञान की पुस्तकें पढ़ लें। इतना पढ़ने के बाद उन पुस्तकों का अध्ययन शुरू कर सकते हैं जो सीधे तौर पर सिविल सेवाओं के लिये लिखी गई हैं।

प्रश्न – 2 : क्या सामान्य अध्ययन के पाठ्यक्रम की तैयारी अपने आप की जा सकती है? अगर हाँ तो कैसे?

उत्तर:  जी हाँ, यह मुश्किल तो है पर असंभव नहीं। अगर आप विभिन्न खंडों में निहित अवधारणाएँ अपने आप समझ सकते हैं, समसामयिक तथ्यों को उनसे जोड़ सकते हैं, अंग्रेज़ी में उपलब्ध सामग्री को समझकर हिंदी में प्रस्तुत कर सकते हैं और इंटरनेट से उपयुक्त सामग्री खोज सकते हैं तो डेढ़ से दो वर्ष की अवधि में आप सामान्य अध्ययन की तैयारी अपने स्तर पर कर सकते हैं।

प्रश्न – 3 : प्रारंभिक तथा मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन के लिये कौन-सी पुस्तकें पढ़नी चाहियें?

उत्तर:  अगर आप कौटिल्य एकडेमी सामान्य अध्ययन (प्रारंभिक तथा मुख्य परीक्षा) कार्यक्रम में शामिल हैं या होने वाले हैं तो संभवतः आपको एक भी पुस्तक की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। हम कोशिश करते हैं कि अपने विद्यार्थियों को इतनी पाठ्य-सामग्री दे दें कि उन्हें पुस्तकों पर निर्भर न रहना पड़े। कभी-कभी किसी विशेष टॉपिक के लिये ही हम विद्यार्थियों से अपेक्षा करते हैं कि वे कोई पुस्तक पढ़कर आएँ। अगर आप कौटिल्य एकडेमी के विद्यार्थी नहीं हैं तो निम्नलिखित पुस्तकों से अध्ययन करना उपयुक्त होगा। सबसे पहले एनसीईआरटी की वे पुस्तकें पढ़ना ठीक होगा जिनकी चर्चा ऊपर की गई है। उसके बाद विभिन्न खंडों के लिये एक-एक संदर्भ पुस्तक को देखना प्रायः पर्याप्त होगा। कुछ खंडों के लिये अभी कोई पुस्तक उपलब्ध नहीं है, उनके लिये अखबारों के लेख और इंटरनेट की सामग्री को ही आधार बनाना पड़ता है। एक-दो खंड ऐसे भी हैं जिनमें एक पुस्तक पर्याप्त नहीं होती, उनमें कुछ विशेष टॉपिक्स के लिये कुछ अन्य पुस्तकों को भी देखना पड़ता है। इन पुस्तकों के अलावा भूगोल के लिये ‘ऑक्सफोर्ड तथा ओरिएंट लांगमैन एटलस’; अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों के लिये ‘वर्ल्ड फोकस’, ‘फ्रंटलाइन’ तथा ‘द हिंदू’; अर्थव्यवस्था के लिये ‘प्रतियोगिता दर्पण अतिरिक्तांक’; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के लिये ‘विवास पैनोरमा’ तथा ‘परीक्षा मंथन’; पर्यावरण तथा जैव-विविधता के खंड के लिये ‘इग्नू के नोट्स’ और सामाजिक न्याय तथा समसामयिक घटनाक्रम के खंडों के लिये ‘योजना’ और ‘कुरुक्षेत्र’ को देखते रहना चाहिये।

प्रश्न – 4 : सामान्य अध्ययन की तैयारी के लिये कौन-से अखबार तथा पत्रिकाएँ पढ़ना बेहतर होगा?

उत्तर:  अगर आपकी अंग्रेज़ी अच्छी है तो ‘द हिंदू’ के लेख पढ़ना अच्छा होगा; पर अगर आप उन्हें न पढ़ पाते हों तो ज़्यादा तनाव न लें। पत्रिकाओं में आप ‘कौटिल्य भारत ’ को पढ़ें। सिविल सेवा एवं विभिन्न राज्यों की पीसीएस परीक्षा (प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा तथा साक्षात्कार) के सामान्य अध्ययन एवं निबंध प्रश्न-पत्र के समसामयिक पक्ष के लिये यह एक संपूर्ण पत्रिका है।

प्रश्न – 5 : सामान्य अध्ययन की तैयारी के लिये इंटरनेट का फायदा कैसे लिया जा सकता है?

उत्तर: इस वेबसाइट पर ‘द हिन्दू’, ‘इंडियन एक्सप्रेस’, ‘एचटी मिंट’, ‘बिजनेस लाइन’, ‘बिजनेस स्टैण्डर्ड’, ‘डीएनए’, ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ इत्यादि अंग्रेज़ी के अख़बारों के साथ-साथ भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों की वेबसाइटों जैसे पीआईबी आदि का गहन अध्ययन कर न्यूज़ तथा लेख विश्लेषण अपडेट किये जाते हैं| साथ ही दैनिक स्तर पर समसामयिक मुद्दों पर प्रारंभिक परीक्षा के प्रारूप के अनुसार, प्रश्न भी दिए जाते हैं| इसके अतिरिक्त कक्षा 6-12 तक की एनसीआरटी पर आधारित प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्नों के साथ-साथ अन्य प्रमाणित पुस्तकों पर आधारित प्रश्नों की भी एक शृंखला आरंभ की गई है| इसके अलावा मुख्य परीक्षा के प्रारूप पर एक विशेष कार्यक्रम आरंभ करने की रणनीति पर कार्य जारी है| सबसे महत्त्वपूर्ण बात बहुत जल्द www.Kautilyaacademy.com पर लोकसभा, राज्यसभा तथा आकाशवाणी द्वारा संचालित कुछ महत्त्वपूर्ण कार्यक्रमों के लिंक के साथ हिंदी में उनका सार भी प्रस्तुत किया जाएगा| वस्तुतः हमारा उद्देश्य वर्षों से हिंदी माध्यम से चली आ रही सटीक पाठ्यसामग्री की कमी को दूर करते हुए परीक्षा में चयन की दर को बढ़ावा देना है| ध्यान रखें कि इंटरनेट पर सटीक सामग्री ढूँढ़ना आसान नहीं होता। साथ ही, इंटरनेट का प्रयोग करते समय ध्यान भटकने की पर्याप्त आशंका होती है।

प्रश्न – 6 : सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिये प्रतिदिन कितने घंटे अध्ययन की आवश्यकता होती है?

उत्तर: ऐसी कोई समय सीमा निश्चित नहीं है जिसका निर्धारण इस परीक्षा को उत्तीर्ण करने के लिये किया जा सके। वास्तव में सफलता अध्ययन के घंटों से नहीं बल्कि इसकी कुशलता से निर्धारित होती है। यदि कोई अभ्यर्थी एक वर्ष तक रोज़ाना 6 घंटे ध्यानपूर्वक अध्ययन करता है तो इसे लक्ष्य प्राप्ति के लिये अच्छे प्रयास के तौर पर देखा जा सकता है।

प्रश्न – 7 : न्यूनतम कितने वर्ष की आयु में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी प्रारंभ कर देनी चाहिये ?

उत्तर:  सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिये न्यूनतम आयु सीमा क्या हो, इसका सटीक निर्धारण नहीं किया जा सकता फिर भी यदि अभ्यर्थी 20 वर्ष की आयु में तैयारी प्रारंभ कर देता है तो उसकी स्थिति अच्छी रहेगी। यह ऐसा समय होता है जिसमें विद्यार्थी अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर सकता है। यह और बात है कि जहाँ एक ओर बहुत ज़ल्दी तैयारी प्रारंभ करने से उपयुक्त समय आने पर आप थकावट का अनुभव करने लगते हैं वहीं तैयारी की शुरुआत देर से करने पर कुछ नुकसान भी हो सकता है।

प्रश्न – 8 : सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के दौरान सामूहिक चर्चा (group discussion) का क्या महत्त्व है?

उत्तर: सामूहिक चर्चा के सकारात्मक एवं नकारात्मक दोनों पक्ष हैं। अगर आप गंभीर और लक्ष्य के प्रति समर्पित अभ्यर्थियों के साथ सामूहिक चर्चा करते हैं तो यह लाभदायक सिद्ध होगा। ध्यान रखें कि तैयारी के आरंभिक चरणों में सामूहिक चर्चा से बचना चाहिये। इसके अतिरिक्त चर्चा के लिये समूह, संख्या में ज़्यादा बड़ा नही होना चाहिये। आप एक ऐसा समूह बना सकते हैं और किसी निर्धारित विषय पर चर्चा कर सकते हैं जिसका अध्ययन समूह के सभी सदस्यों ने किया हो। यह भी ध्यान रखें कि समूह विजातीय हो जैसे समूह में एक ही क्षेत्र के लोगों को शामिल न करें क्योंकि ऐसे मामलों में चर्चा के निष्कर्ष में क्षेत्र का भाव आ जाता है। सामूहिक चर्चा के दौरान यह औपचारिक होना चाहिये तथा ऐसी चर्चाओं के लिये एक निश्चित समयावधि को पहले से ही निर्धारित कर लेना चाहिये।

प्रश्न – 9 : क्या इस परीक्षा की तैयारी स्नातक के पश्चात् अथवा नौकरी के बिना ही प्रारंभ कर देनी चाहिये अथवा पहले एक नौकरी प्राप्त कर लेनी चाहिये उसके पश्चात् प्रारंभ करनी चाहिये?

उत्तर: सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी एक दीर्घकालिक प्रक्रिया है जिसके लिये सामान्यत: स्नातक के बाद एक से दो वर्ष की गंभीर तैयारी की आवश्यकता होती है। इसकी तैयारी किसी नौकरी अथवा व्यावसायिक कोर्स के साथ भी की जा सकती है।विगत वर्षों के परीक्षा परिणामों पर नज़र डालें तो इसमें हर प्रकार के (नौकरी और बिना नौकरी वाले) अभ्यर्थी सफल हुए हैं। इसलिये आप जिसमें स्वयं को सहज महसूस करते हों उसके अनुसार तैयारी आरंभ करनी चाहिये।

प्रश्न – 10 : कोचिंग संस्थान को चुनने का आधार क्या होना चाहिये ?

उत्तर: यद्यपि कोचिंग संस्थान कई प्रकार से अभ्यर्थियों की सहायता करते हैं फिर भी उचित संस्थान में प्रवेश न लेने से अभ्यर्थियों को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिये कोचिंग संस्थान का चुनाव करते समय अभ्यर्थियों को उचित सावधानी बरतनी चाहिये। संस्थान की विगत वर्षों में सफलता की दरों का आंकलन करके, संस्थान के अध्यापक समूह, अध्ययन प्रणाली, सत्र की अवधि तथा क्रम, पाठ्य-सामग्री, संस्थान के उन विद्यार्थियों तक पहुँच जो इस संस्थान में अध्ययन कर चुके हैं आदि कुछ ऐसे महत्त्वपूर्ण आधार हैं जो एक उचित कोचिंग संस्थान का निर्धारण करने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं।

प्रश्न – 11 : क्या मैं बिना कोचिंग के भी सिविल सेवा परीक्षा में सफल हो सकता हूँ?

उत्तर: जी हाँ, यदि आप स्वयं अच्छी प्रकार अध्ययन कर सकते हैं तो आप निश्चित ही इस परीक्षा में सफल हो सकते हैं। अगर आप स्वयं अच्छी प्रकार अध्ययन नहीं कर पा रहें हैं तो किसी कोचिंग संस्थान से मार्गदर्शन प्राप्त करने में कोई बुराई नहीं है। बहुत से ऐसे अच्छे संस्थान और शिक्षक हैं जो अभ्यर्थियों के समय व उनके प्रयासों के बचाव में उनकी सहायता करते हैं परन्तु सभी कोचिंग संस्थान अच्छी गुणवत्ता की सेवा उपलब्ध नहीं कराते हैं। अतः यदि आप किसी संस्थान में जाना चाहते हैं तो पूरी छान-बीन के पश्चात् ही जाएँ।

प्रश्न – 12 : प्रारंभिक परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों का स्वरूप क्या है?

उत्तर: आयोग द्वारा आयोजित प्रारंभिक परीक्षा की प्रकृति वस्तुनिष्ठ (बहुविकल्पीय) होती है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक प्रश्न के लिये दिये गए चार संभावित विकल्पों (a, b, c और d) में से एक सही विकल्प का चयन करना होता है। इस परीक्षा में गलत उत्तर के लिये ऋणात्मक अंक (Negative marking) का प्रावधान किया गया है, जिसमें प्रत्येक गलत उत्तर के लिये एक तिहाई (1/3) अंक काटे जाते हैं। द्वितीय प्रश्नपत्र (सीसैट) में ‘निर्णयन क्षमता’ से संबंधित प्रश्नों के गलत उत्तर के लिये अंक नहीं काटे जाते हैं।

प्रश्न – 13 : नकारात्मक अंकन के खतरे को देखते हुए प्रारंभिक परीक्षा में कितने प्रश्न करना ठीक होगा? जिन प्रश्नों के उत्तरों में संदेह हो, क्या उन्हें छोड़ देना ही उचित होगा?

उत्तर: इस बात को ठीक से समझने की ज़रूरत है। कई उम्मीदवार नकारात्मक अंकन से डरकर 40-50 प्रश्नों के ही उत्तर देते हैं। ऐसे में, अगर वे सारे उत्तर ठीक हो जाएँ तो भी परीक्षा में सफल होना संभव नहीं रहता। आपको कम से कम उतने प्रश्न तो करने ही चाहिये कि सफल होने की संभावना बन सके। इसके लिये थोड़ा बहुत खतरा उठाना ज़रूरी है। जिन प्रश्नों के चार विकल्पों में से 2 के बारे में आप निश्चित हैं कि सही उत्तर इन्हीं में से एक है, उनमें आपको खतरा उठाना चाहिये। गणितीय दृष्टि से कहें तो इसमें आपका उत्तर सही और गलत होने की संभावना बराबर है पर सही होने पर 2 अंक मिलेंगे जबकि गलत होने पर सिर्फ 0.67 अंकों का नुकसान होगा। ऐसे 4 में से 3 उत्तर गलत और एक सही होने पर आप न-लाभ-न-हानि की स्थिति में रहेंगे जबकि संभाव्यता (Probability) के नियम के अनुसार आशा की जा सकती है कि आपके 4 में से 2 उत्तर सही और 2 गलत होंगे। 2 उत्तर सही और 2 गलत होने की स्थिति में आपको 2.66 अंकों का शुद्ध लाभ होगा। अगर ऐसे प्रश्नों की संख्या 20 है तो यही लाभ बढ़कर लगभग 13 अंकों का हो जाएगा। इस बात को ठीक से समझ लेना ज़रूरी है कि परीक्षा में बहुत डरकर रहने से सफल होने की संभावना कम होती चली जाती है।

प्रश्न – 14 : ‘कट-ऑफ’ क्या है? इसका निर्धारण कैसे होता है?

उत्तर: ‘कट-ऑफ’ का अर्थ है- वे न्यूनतम अंक जिन्हें प्राप्त करके कोई उम्मीदवार परीक्षा में सफल हुआ है। सिविल सेवा परीक्षा में हर वर्ष प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा तथा साक्षात्कार के परिणाम में ‘कट-ऑफ’ तय की जाती है। ‘कट-ऑफ’ या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवार सफल घोषित किये जाते हैं और शेष असफल। आरक्षण व्यवस्था के अंतर्गत यह ‘कट-आॅफ’ भिन्न-भिन्न वर्गों के उम्मीदवारों के लिए भिन्न-भिन्न होती है। प्रारंभिक परीक्षा में ‘कट-ऑफ’ का निर्धारण केवल सामान्य अध्ययन (क्योंकि सीसैट का प्रश्नपत्र क्वालिफाइंग होता है) में प्राप्त किये गए अंकों के आधार पर किया जाता है। सीसैट के प्रश्नपत्र में क्वालिफाई करने के लिये अभ्यर्थियों को निर्धारित 33% अंक (लगभग 27 प्रश्न या 66 अंक) प्राप्त करने आवश्यक हैं। अगर कोई अभ्यर्थी सीसैट के प्रश्नपत्र में क्वालिफाई अंक प्राप्त नहीं कर पाता है तो उसके प्रथम प्रश्नपत्र (सामान्य अध्ययन) की उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन नहीं किया जाता है। ध्यान रहे कि प्रारंभिक परीक्षा में निगेटिव मार्किंग लागू है। ‘कट-ऑफ’ कोई स्थिर स्थिति नहीं है, इसमें हर साल बदलाव होता रहता है। इसका निर्धारण सीटों की संख्या, प्रश्नपत्रों के कठिनाई स्तर तथा उम्मीदवारों की संख्या व गुणवत्ता जैसे कारकों पर निर्भर करता है। स्वाभाविक सी बात है कि अगर प्रश्नपत्र सरल होंगे, या उम्मीदवारों की संख्या व गुणवत्ता ऊँची होगी तो कट-ऑफ बढ़ जाएगा और विपरीत स्थितियों में अपने आप कम हो जाएगा।

प्रश्न – 15 : आयोग द्वारा प्रारंभिक परीक्षा में कितना ‘कट-ऑफ’ निर्धारित किया गया है ?

उत्तर: सामान्य वर्ग के लिये वर्ष 2015 का कट-ऑफ 107.34 रहा। हालाँकि 2016 की परीक्षा का कट-ऑफ अभी प्रकाशित नहीं हुआ है, लेकिन जानकारों की मानें तो सामान्य वर्ग के लिये कट-ऑफ 110-115 तक रह सकता है। इस आधार पर 2017 का कट-ऑफ भी लगभग इसी के आस-पास यानी 110-120 रहने की उम्मीद की जा सकती है।

प्रश्न – 16 : परीक्षा के दौरान प्रश्नों का समाधान किस क्रम में करना चाहिये? क्या किसी विशेष क्रम से लाभ होता है?

उत्तर: इसका उत्तर सभी के लिये एक नहीं हो सकता। अगर आप सीसैट के सभी विषयों में सहज हैं और आपकी गति भी संतोषजनक है तो आप किसी भी क्रम में प्रश्न करके सफल हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में बेहतर यही होता है कि जिस क्रम में प्रश्न आते जाएँ, उसी क्रम में उन्हें करते हुए बढ़ें। पर, अगर आपकी स्थिति इतनी सुरक्षित नहीं है तो आपको प्रश्नों के क्रम पर विचार करना चाहिये। सबसे पहले, निर्णयन तथा अंतर्वैयक्तिक कौशल के 7-8 प्रश्न करने चाहिये क्योंकि वे समय कम लेते हैं तथा उनमें नकारात्मक अंकन का खतरा नहीं होता। साथ ही, चूँकि उनमें ‘भेदात्मक अंकन’ (Differential marking) की व्यवस्था भी है, इसलिये अगर आपका उत्तर सर्वश्रेष्ठ नहीं है तो भी कुछ-न-कुछ अंक मिलने की संभावना बनी रहती है। इसके बाद, आप तेज़ी से वे प्रश्न करते चलें जिनमें आप सहज हैं और उन्हें छोड़ते चलें जो आपकी समझ से परे हैं। जिन प्रश्नों के संबंध में आपको लगता है कि वे पर्याप्त समय मिलने पर किये जा सकते हैं, उन्हें कोई निशान लगाकर छोड़ते चलें। अंत में समय बचे तो उन प्रश्नों को करें और नहीं तो छोड़ दें। एक सुझाव यह भी हो सकता है कि एक ही प्रकार के प्रश्न लगातार करने से बचें। यह बात विशेष तौर पर बोधगम्यता (Comprehension) के प्रश्नों पर लागू होती है। 3-4 अनुच्छेद लगातार पढ़ने के बाद कई बार दिमाग थकने लगता है। अगर आपको ऐसा लगे तो बीच में गणित या तर्कशक्ति के कुछ सवाल कर लें और फिर लौटकर बोधगम्यता पर आ जाएँ। यही तकनीक अन्य खंडों पर भी लागू हो सकती है।

प्रश्न – 17 : परीक्षा में समय-प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। उसके लिये क्या किया जाना चाहिये ?

उत्तर: पिछले प्रश्न के उत्तर में दिये गए सुझावों पर ध्यान दें। उसके अलावा, परीक्षा से पहले मॉक-टेस्ट श्रृंखला में भाग लें और हर प्रश्नपत्र में परीक्षण करें कि किस वर्ग के प्रश्न कितने समय में हल हो पाते हैं। ज़्यादा समय लेने वाले प्रश्नों को पहले ही पहचान लेंगे तो परीक्षा में समय बर्बाद नहीं होगा। बार-बार अभ्यास करने से गति बढ़ाई जा सकती है।

प्रश्न – 18 : मैं शुरू से ही गणित में कमज़ोर हूँ। क्या मैं सीसैट में सफल हो सकता हूँ?

उत्तर: जी हाँ, आप ज़रूर सफल हो सकते हैं। सीसैट के 80 प्रश्नों में से गणित के प्रश्न अधिकतम 15 के आसपास होते हैं और इनमें भी 4-5 आँकड़ों की व्याख्या और पर्याप्तता के होते हैं। अगर आप गणित से पूरी तरह दूर रहना चाहते हैं तो बाकी प्रश्नों पर गंभीरता से मेहनत करें। हो सके तो गणित में कुछ ऐसे टॉपिक तैयार कर लीजिये जो आपको समझ में आते हैं और जिनसे प्रायः सवाल भी पूछे जाते हैं। उदाहरण के लिये, अगर आप प्रतिशतता और अनुपात जैसे टॉपिक तैयार कर लेंगे तो गणित के साथ-साथ ‘आँकड़ों की व्याख्या’ वाले खंड में भी आपके कई प्रश्न ठीक हो जाएँगे। इस तरह अगर आप गणित के 15 में से 3-4 सवाल भी हल कर लेंगे तो आप ‘क्वालिफाइंग’ के स्तर को छू सकते हैं।

प्रश्न – 19 : क्या सभी प्रश्नों को ओ.एम.आर. शीट पर एक साथ भरना चाहिये या साथ-साथ भरते रहना चाहिये ?

उत्तर: बेहतर होगा कि 4-5 प्रश्नों के उत्तर निकालकर उन्हें शीट पर भरते जाएँ। हर प्रश्न के साथ उसे ओ.एम.आर. शीट पर भरने में ज़्यादा समय खर्च होता है। दूसरी ओर, कभी-कभी ऐसा भी होता है कि कई उम्मीदवार अंत में एक साथ ओ.एम.आर. शीट भरना चाहते हैं पर समय की कमी के कारण उसे भर ही नहीं पाते। ऐसी दुर्घटना से बचने के लिये सही तरीका यही है कि आप 4-5 प्रश्नों के उत्तरों को एक साथ भरते चलें। बोधगम्यता तथा आँकड़ों की व्याख्या के प्रश्नों में प्रायः एक अनुच्छेद या सूचना के आधार पर 5-6 प्रश्न पूछे जाते हैं। ऐसी स्थिति में वे सभी प्रश्न एक साथ कर लेने चाहिये और साथ ही ओ.एम आर. शीट पर भी उन्हें भर दिया जाना चाहिये।

प्रश्न – 20 : मुझसे बोधगम्यता (Comprehension) के प्रश्नों में बहुत सी गलतियाँ हो जाती हैं। इस खंड में अपना स्तर सुधारने के लिये मुझे क्या करना चाहिये?

उत्तर: बोधगम्यता के प्रश्नों को आसान समझकर कई उम्मीदवार लापरवाही करते हैं जो अंत में घातक सिद्ध होती है। बेहतर यही है कि उम्मीदवार नियमित तौर पर इस खंड का अभ्यास करते रहें, इसे आसान समझकर हल्के में न लें। संभव हो तो अभ्यास ऐसी पुस्तकों से करना चाहिये जिनमें अनुच्छेद दोनों भाषाओं में आमने-सामने दिये गए हों। हिंदी माध्यम के उम्मीदवारों को यह आदत भी डालनी चाहिये कि जहाँ कहीं हिंदी पाठ में कोई उलझन या तकनीकी शब्द हो, वहाँ वे अंग्रेज़ी पाठ को देखकर जाँच लें कि वे सही अर्थ समझ रहे हैं या नहीं? बोधगम्यता में अपना स्तर सुधारने के लिये एक अच्छा उपाय यह भी हो सकता है कि आप रोज़ अख़बार का कोई लेख पढ़कर अपने शब्दों में उसका सार लिखें। इससे भाषा पर आपकी पकड़ मज़बूत होगी जिससे न सिर्फ बोधगम्यता में आपका स्तर सुधरेगा बल्कि मुख्य परीक्षा के लिये लेखन शैली का भी विकास होगा।

प्रश्न – 21 : क्या ‘मॉक टेस्ट’ देने से प्रारंभिक परीक्षा में कोई लाभ होता है? अगर हाँ, तो क्या?

उत्तर: सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में मॉक टेस्ट देना अत्यंत लाभदायक सिद्ध होता है। इसका पहला लाभ है कि आप परीक्षा में होने वाले तनाव (Anxiety) पर नियंत्रण करना सीख जाते हैं। दूसरे, समय प्रबंधन की क्षमता बेहतर होती है। तीसरे, अलग-अलग परीक्षाओं में आप यह प्रयोग कर सकते हैं कि प्रश्नों को किस क्रम में करने से आप सबसे बेहतर परिणाम तक पहुँच पा रहे हैं। इन प्रयोगों के आधार पर आप अपनी परीक्षा संबंधी रणनीति निश्चित कर सकते हैं। चौथा लाभ यह है कि आपको यह अनुमान होता रहता है कि अपने प्रतिस्पर्द्धियों  की तुलना में आपका स्तर क्या है? ध्यान रहे कि ये सभी लाभ तभी मिलते हैं अगर आपने मॉक टेस्ट श्रृंखला का चयन भली-भाँति सोच-समझकर किया है।

प्रश्न – 22 : प्रारंभिक परीक्षा के सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र हेतु अभ्यर्थियों को किस प्रकार के प्रश्नों का अभ्यास करना चाहिये ?

उत्तर: तैयारी के विभिन्न चरणों में अभ्यर्थियों को विभिन्न प्रकार के प्रश्नों का अभ्यास चाहिये। तैयारी के प्रथम चरण (प्रारंभिक परीक्षा) में विषय आधारित प्रश्नों को शामिल करना चाहिये। एक बार सामान्य अध्ययन के एक भाग को पढ़ने के पश्चात् इस विषय से सम्बन्धित प्रश्नों का अभ्यास किया जाना चाहिये। तैयारी के दूसरे चरण में स्व- मूल्यांकन के लिये मिश्रित प्रश्नों को हल किया जा सकता है। हालाँकि, यह विचारणीय है कि किसी भी विषय को सीखने के लिये प्रश्नों का अभ्यास करना एक उत्तम मार्ग नहीं है, लेकिन प्रश्नों को हल करने से आपकी तैयारी को विस्तार मिलता है और ये आपके समय को नियोजित करते हैं, जिससे आपको आगे अध्ययन करने में सहायता मिलती है।

प्रश्न – 23 : प्रारंभिक परीक्षा और इसके परिणाम के मध्य के समय का उपयोग किस तरह किया जा सकता है?

उत्तर: प्रारंभिक परीक्षा के तुरंत बाद कुछ दिनों के लिये अध्ययन को विराम देना ज़रुरी है। इसके पश्चात् मुख्य परीक्षा के लिये चुने गए वैकल्पिक विषय को इस उद्देश्य से सावधानीपूर्वक पढ़ें ताकि मुख्य परीक्षा से पूर्व आप इससे भली-भाँति परिचित हो जाएँ। सामान्यत: यह देखा गया है कि अभ्यर्थी वैकल्पिक विषय को पिछले पाँच महीनों अथवा प्रारंभिक परीक्षा की तैयारी के दौरान भी नहीं पढ़ते हैं। इसके अतिरिक्त अभ्यर्थी को कुछ समय सामान्य अध्ययन को भी देना चाहिये।

प्रश्न – 24 : मुख्य परीक्षा के लिये वैकल्पिक विषय चुनते समय क्या सावधानी बरतनी चाहिये ?

उत्तर: उपयुक्त वैकल्पिक विषय का चयन ही वह निर्णय है जिस पर किसी उम्मीदवार की सफलता का सबसे ज़्यादा दारोमदार होता है। विषय चयन का असली आधार सिर्फ यही है कि वह विषय आपके माध्यम में कितना ‘स्कोरिंग’ है? विषय छोटा है या बड़ा, वह सामान्य अध्ययन में मदद करता है या नहीं – ये सभी आधार भ्रामक हैं। अगर विषय छोटा भी हो और सामान्य अध्ययन में मदद भी करता हो किंतु दूसरे विषय की तुलना में 100 अंक कम दिलवाता हो तो उसे चुनना निश्चित तौर पर घातक है। भूलें नहीं कि आपका चयन अंततः आपके अंकों से ही होता है, इधर-उधर के तर्कों से नहीं। वर्तमान में, अंक दिलवाने की कौटिल्य एकडेमी से साहित्य के विषय सर्वोच्च स्तर पर हैं। आप जिस भी भाषा में सहज हैं, उसका साहित्य चुन सकते हैं; जैसे हिंदी साहित्य, गुजराती साहित्य इत्यादि। अगर साहित्य के विषय न चुनना चाहें तो अन्य अंकदायी विषयों में से किसी का चयन कर सकते हैं।

प्रश्न – 25 : मैं इंजीनियरिंग में स्नातक हूँ। अंक प्राप्ति के दृष्टिकोण से तैयारी के लिये आप मुझे एक उपयुक्त वैकल्पिक विषय सुझाइए।

उत्तर: हाल के वर्षों में इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों का झुकाव मानविकी विषयों की ओर अधिक हुआ है। इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि के विद्यार्थी सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के वैकल्पिक विषय के रुप में विज्ञान अथवा मानविकी के विषयों का चयन कर सकते हैं। इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि के अधिकांश अभ्यर्थियों में सामान्यत: यह प्रवृत्ति देखी गई है कि वे भूगोल, दर्शनशास्त्र, हिंदी साहित्य अथवा लोक प्रशासन को वैकल्पिक विषय के रूप में अधिक सुविधाजनक मानते हैं। इन चारों वैकल्पिक विषयों में समय का अपव्यय नहीं होता है तथा इन विषयों को कम समय में भी आसानी से तैयार किया जा सकता है।

प्रश्न – 26 : मैं अर्थशास्त्र विषय से स्नातक हूँ लेकिन मैं अर्थशास्त्र विषय को अपने वैकल्पिक विषय के रूप में चुनने का इच्छुक नहीं हूँ। मैंने इंटरमीडिएट की परीक्षा विज्ञान विषयों के साथ उतीर्ण की है। कृपया सुझाव दें कि क्या मैं विज्ञान के किसी विषय को अपने वैकल्पिक विषय के रूप में चुन सकता हूँ?

उत्तर: यदि आप अर्थशास्त्र को वैकल्पिक विषय के रूप में चुनने के इच्छुक नहीं हैं तो आपको मानविकी के किसी भी विषय को वैकल्पिक विषय के रूप में चुनने का सुझाव दिया जा सकता है। इंटरमीडिएट स्तर पर विज्ञान विषयों का अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों में से भी कुछ ही विद्यार्थी विज्ञान के विषयों को वैकल्पिक विषय के रूप में चुनते हैं। आपनी पृष्ठभूमि को देखते हुए आप भूगोल, दर्शनशास्त्र, हिंदी साहित्य अथवा लोक प्रशासन जैसे विषयों में से किसी एक विषय को चुन सकते हैं।

प्रश्न – 27 : क्या एक विद्यार्थी को मुख्य परीक्षा में दी गई शब्द सीमा का पालन करना अनिवार्य है?

उत्तर: चूँकि संघ लोक सेवा आयोग ने उत्तर लेखन की शब्द सीमा निर्धारित की है अतः आयोग इस शब्द सीमा के भीतर ही अभ्यर्थियों द्वारा सभी उपयुक्त सूचना उपलब्ध कराए जाने की अपेक्षा करता है। कुछ विशेष परिस्थितियों में अभ्यर्थी उत्तर लेखन की शब्द सीमा आयोग द्वारा निर्धारित शब्द सीमा से थोड़ी अधिक अथवा कम (सामान्यत: दी गई शब्द सीमा का 10%) रख सकते हैं। निर्धारित शब्द सीमा में उपयोगी ज़रुरी सूचना उपलब्ध कराने के लिये निरंतर अभ्यास की आवश्यकता होती है इसलिये मुख्य परीक्षा में सम्मिलित होने से पूर्व अभ्यर्थियों को उत्तर लेखन अभ्यास अवश्य कर लेना चाहिये।

प्रश्न – 28 : मुख्य परीक्षा के प्रश्नों को लिखते समय अभ्यर्थी को मुख्यतः किन बातों का ध्यान रखना चाहिये?

उत्तर: प्रभावी उत्तर लिखने के लिये प्रश्नों की समझ अनिवार्य शर्त है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिये प्रश्नों का सावधानीपूर्वक अध्ययन करना आवश्यक है। यदि एक प्रश्न को कई भागों में विभाजित किया गया है तो विद्यार्थी को प्रश्नों को कम से कम दो बार अवश्य पढ़ना चाहिये। उत्तर की रुपरेखा तैयार करने से पूर्व अभ्यर्थी को प्रश्न के सभी आयामों को भली-भाँति समझ लेना चाहिये उसके पश्चात् ही शब्द सीमा का ध्यान रखते हुए उत्तर-लेखन प्रारंभ करना चाहिये।

प्रश्न – 29 : अच्छे अंक प्राप्त करने के लिये मुख्य परीक्षा में तथ्यात्मक अथवा विश्लेषणात्मक में से किस प्रकार के प्रश्नों को हल करने का प्रयास किया जाना चाहिये?

उत्तर:  इस परीक्षा में आपके द्वारा लिखे गए उत्तर पर आपको अंक दिये जाते हैं न कि प्रश्नों के स्वरूप पर। एक अभ्यर्थी को प्रश्न के स्वरूप को देखते हुए स्वयं के पास उस प्रश्न से संबंधित सभी सूचनाओं को संकलित करते हुए उन्हें संयोजित करने की अपनी क्षमता के अनुसार प्रश्न का चयन करना चाहिये। हालाँकि ऐसी कोई पूर्वधारणा नहीं है कि तथ्यात्मक अथवा विश्लेषणात्मक प्रश्नों पर सदैव ही अच्छे अंक प्राप्त होंगे।

प्रश्न – 30 : उत्तर लेखन में अभ्यर्थी को सामान्य भाषा का प्रयोग करना चाहिये अथवा अलंकृत भाषा का?

उत्तर: उत्तर लेखन में सूचनाओं और भाषाओं का समायोजन इस प्रकार होना चाहिये कि परीक्षक की अंत तक उसे पढ़ने में रुचि बनी रहे। अतः यह ध्यान देने योग्य है कि यदि आपके द्वारा उत्तर में लिखी गई सूचनाएँ सही हैं और उनका ठीक से समायोजन किया गया है तो निश्चित ही आपको अच्छे अंक प्राप्त होंगे।

प्रश्न – 31 : इस परीक्षा में विगत वर्षों की मुख्य परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्नों का अभ्यास करने के क्या फायदे हैं ?

उत्तर: विगत वर्ष के प्रश्नों का अभ्यास इस परीक्षा के लिये महत्त्वपूर्ण है परन्तु उन्हें कम ही दोहराया जाता है। हालाँकि समय प्रबंधन में इनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका है क्योंकि इससे प्रश्नों के स्वरूप तथा दी गई शब्द सीमा में प्रश्नों के उत्तर लिखने की क्षमता विकसित होती है। सामान्यतः तैयारी के दौरान अभ्यर्थी सूचनाओं के उचित उपयोग को जाने बिना ही उनके संग्रहण पर अपना ध्यान केन्द्रित करते हैं। इन सूचनाओं की परीक्षा में उपयोगिता एवं उचित समायोजन विगत वर्षों के प्रश्नपत्रों का अभ्यास करके सीखा जा सकता है।

प्रश्न – 32 : इस परीक्षा में निबंध लेखन की क्या भूमिका है ? अच्छे निबंध लेखन की प्रवृत्ति को कैसे विकसित किया जाए ?

उत्तर: सिविल सेवा परीक्षा के बदले हुए पाठ्यक्रम ने आपके अंतिम चयन में निबंध को निर्धारक भूमिका में ला खड़ा किया है। सामान्य अध्ययन अथवा वैकल्पिक विषय के प्रश्नपत्रों की अपेक्षा निबंध के प्रश्नपत्र में अपेक्षाकृत कम मेहनत करके अधिक अंक लाए जा सकते हैं। आप 250 अंकों के प्रश्नपत्र में 160-170 अंक तक प्राप्त कर सकते हैं। निबंध लेखन सामान्य अध्ययन अथवा वैकल्पिक विषय के प्रश्नों के उत्तर लेखन से सर्वथा भिन्न होता है। इसके माध्यम से किसी व्यक्ति की मौलिकता एवं व्यक्तित्व का परीक्षण किया जाता है। निबंध लेखन एक ऐसी कला है जो समय के साथ धीरे-धीरे विकसित होती है।

प्रश्न – 33 : सामान्य अध्ययन (मुख्य परीक्षा) के प्रश्नपत्र 4 का संबंध किन विषयों से है? क्या कुछ लोगों का यह दावा ठीक है कि यह लोक प्रशासन या दर्शनशास्त्र का ही हिस्सा है?

उत्तर:  प्रश्नपत्र-4 को किसी एक विषय का हिस्सा बताना भ्रामक है। पाठ्यक्रम को ध्यान से पढ़कर कोई भी इस बात को समझ सकता है कि इस प्रश्नपत्र के अलग-अलग टॉपिक विभिन्न विषयों से संबंधित हैं। उदाहरण के लिये, ‘भावनात्मक योग्यता’ (Emotional Intelligence), ‘अभिवृत्ति’ (Attitude) तथा ‘अभिरुचि’ (Aptitude) जैसे विषयों का संबंध मनोविज्ञान से है; ‘नीतिशास्त्र’ (Ethics) का संबंध दर्शनशास्त्र से है; ‘मानवीय मूल्य’ का कुछ संबंध समाजशास्त्र से है जबकि अंत के दो टॉपिक (जैसे ‘शासन व्यवस्था में ईमानदारी’) लोक-प्रशासन से हैं। इन सब विषयों को मिलाकर ही प्रश्नपत्र-4 को समझा जा सकता है। संघ लोक सेवा आयोग ने यह कोशिश भी की है कि उम्मीदवार की चेतना में ये सभी विषय अलग-अलग न रह जाएँ बल्कि वह इनके पारस्परिक संबंध भी समझे। इसीलिये, प्रश्नपत्र-4 के पाठ्यक्रम में कई स्थानों पर इन विषयों को आपस में जोड़कर उप-शीर्षक बनाए गए हैं, जैसे ‘लोक-प्रशासन में नीतिशास्त्र’, ‘सिविल सेवा के लिये अभिरुचि और बुनियादी मूल्य’ इत्यादि। सच यह है कि प्रश्नपत्र-4 की आत्मा ‘अंतर-विषयक समझ’ (Inter-disciplinary understanding) के सहारे ही पकड़ी जा सकती है। इसलिये, अगर कोई भी कहता है कि यह प्रश्नपत्र किसी एक विषय पर आधारित है तो समझ जाइए कि वह खुद इसका मर्म समझने की अर्हता नहीं रखता।

प्रश्न – 34 : सिविल सेवा परीक्षा में साक्षात्कार कितने अंकों का होता है? अंतिम चयन में इसकी क्या भूमिका है?

उत्तर:  साक्षात्कार किसी भी परीक्षा का अंतिम एवं महत्त्वपूर्ण चरण होता है। सिविल सेवा परीक्षा में साक्षात्कार के लिये 275 अंक (1750 अंक मुख्य परीक्षा के लिये निर्धारित किया गया है) निर्धारित किया गया है। इस परीक्षा के लिये निर्धारित कुल 2025 अंकों में साक्षात्कार के लिये 275 अंकों का निधारित होना अंतिम चयन एवं पद निर्धारण में इसकी भूमिका को स्वयं ही स्पष्ट करता है। यद्यपि साक्षात्कार इन परीक्षाओं का अंतिम चरण है, लेकिन इसकी तैयारी प्रारंभ से ही शुरू कर देना लाभदायक रहता है। वास्तव में किसी भी अभ्यर्थी के व्यक्तित्व का विकास एक निरंतर प्रक्रिया है। साक्षात्कार में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिये ‘साक्षात्कार की तैयारी’ (interview preparation) शीर्षक का अध्ययन करें।

प्रश्न – 35 : क्या साक्षात्कार के दौरान बोर्ड शहरी पृष्ठभूमि के अभ्यर्थियों से ही प्रभावित होता है? क्या ग्रामीण पृष्ठभूमि के अभ्यर्थी को लाभ प्राप्त नहीं होता है?

उत्तर: साक्षात्कार के दौरान अभ्यर्थियों के व्यक्तित्व का परीक्षण किया जाता है न कि उनके पृष्ठभूमि का। विगत वर्षों में सफलता की प्रवृत्ति में कुछ अनुपातिक बदलाव अवश्य देखने को मिला है लेकिन वास्तव में आयोग की ऐसी कोई धारणा नहीं है। अत: आपको अपनी पृष्ठभूमि पर ध्यान न देते हुए परीक्षा की प्रकृति के अनुरूप उचित एवं गतिशील रणनीति बनाते हुए तैयारी करनी चाहिये।

प्रश्न – 36 : क्या साक्षात्कार की तैयारी हेतु, सम्पूर्ण तैयारी के बिना मॉक साक्षात्कारों में भाग लेना अदूरदर्शिता है?

उत्तर: मॉक साक्षात्कार के दौरान विशेषज्ञों द्वारा वास्तविक साक्षात्कार के वातावरण का निर्माण किया जाता है, जिनमें अभ्यर्थियों का व्यक्तित्व परीक्षण एवं विभिन्न विषयों की समझ की जाँच की जाती है। यदि अभ्यर्थी प्रश्नों का उचित तरीके से उत्तर देने में असमर्थ रहता है तो यह अभ्यर्थी पर निराशाजनक प्रभाव डाल सकता है। इसलिये सम्पूर्ण तैयारी के बिना मॉक साक्षात्कारों को पूर्णतः नज़रंदाज किया जाना चाहिये।

प्रश्न – 37 : साक्षात्कार में शिष्टाचार की क्या भूमिका है?

उत्तर: शिष्टाचार का साक्षात्कार में विशेष महत्त्व है क्योंकि इससे साक्षात्कारकर्ता के मस्तिष्क में अभ्यर्थी की एक छवि बनती है जो अंक देते समय उन्हें प्रभावित करती है। अतः यह सलाह दी जाती है कि ऐसे अवसरों पर अभ्यर्थी को सामान्य शिष्टाचार बनाए रखना चाहिये जो उनके प्रदर्शन को मज़बूत आधार प्रदान कर सके।

प्रश्न – 38 : साक्षात्कार के लिये ड्रेस कोड क्या होना चाहिये?

उत्तर:  सिविल सेवा साक्षात्कार, दिन के समय होता है अतः हल्के रंग की पोशाक को प्राथमिकता दी जाती है। इसमें सामान्य रुप से दैनिक जीवन में पहने जाने वाला वस्त्र नहीं होना चाहिये। पुरुषों में सामान्यत: फुल स्लीव शर्ट, कंट्रास्ट कलर पैंट, लेदर बेल्ट,लेदर जूते और एक मैचिंग टाई को पोशाक के रूप में रखा जा सकता है। महिलाओं के लिये हल्के रंग की साड़ी को प्राथमिकता दी गई है यदि वे साड़ी में सुविधाजनक नहीं हैं तो सलवार सूट भी पहन सकती हैं।

प्रश्न – 39 : क्या साक्षात्कार के दौरान सिविल सेवा की पृष्ठभूमि वाले अभ्यर्थी को कोई अतिरिक्त लाभ प्राप्त होता है?

उतर:  नहीं, ऐसी कोई अवधारणा नहीं है। एक समय था जब ऐसा देखा जाता था कि अधिकतर सफल अभ्यर्थी सिविल सेवकों के परिवारों से ही होते थे लेकिन आजकल यह स्थिति नहीं है। एक सिविल सेवक का पुत्र अथवा पुत्री होने से आपको न तो कोई अतिरिक्त लाभ मिलता है और न ही इससे आपकी सफलता को कोई नुकसान पहुँचता है। अभ्यर्थी का चयन उसकी योग्यता से होता है न कि पारिवारिक पृष्ठभूमि से।

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